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बिहार

बिहार की नई सरकार के खिलाफ प्रशांत किशोर ने ऐसे जताया विरोध! चुनाव न लड़ने का क्यों हो रहा अफसोस?

प्रशांत किशोर ने मौन व्रत ऐसे समय रखा जब नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य एनडीए नेताओं की मौजूदगी में ऐतिहासिक 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली.

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Written By: Akarsh Shukla Updated: Nov 20, 2025 18:58

Nitish Kumar Swearing-in: बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार राजनीति के महासंग्राम में उतरे प्रशांत ने खुद तो चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी जन सुराज से उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था. बिहार चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद प्रशांत किशोर को बड़ा झटका लगा, क्योंकि उनकी पार्टी एक भी सीट जीतने में नाकाम रही. इस बीच एनडीए की बिहार सरकार में वापसी के बाद गुरुवार को नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की, साथ ही 26 मंत्रियों ने शपथ ग्रहण की. नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दिन प्रशांत किशोर ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए ‘मौन व्रत’रखा. ऐसे में उनका ये मौन व्रत बिहार की नई सरकार के खिलाफ उनके विरोध के तौर पर देखा जा रहा है.

प्रशांत किशोर क्यों कर रहे विरोध?


जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने अपने एक बयान में कथित तौर पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए बिहार की नई सरकार का विरोध किया. इस क्रम में उन्होंने गुरुवार को भितिहरवा गांधी आश्रम में मौन व्रत रखा. उन्होंने मौन व्रत ऐसे समय रखा जब नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य एनडीए नेताओं की मौजूदगी में ऐतिहासिक 10वीं बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली. इससे पहले मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में किशोर ने घोषणा की थी कि वह 20 नवंबर को गांधी भितिहरवा आश्रम में एक दिन का मौन व्रत रखेंगे.

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‘पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं’


चुनाव में करारी हार के बाद प्रशांत ने अपने एक बयान में कहा था, ‘आपने मुझे पिछले तीन सालों में जितनी मेहनत करते देखा है, मैं उससे दोगुनी मेहनत करूंगा और अपनी पूरी ताकत लगा दूंगा. पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है. जब तक मैं बिहार को बेहतर बनाने का अपना संकल्प पूरा नहीं कर लेता, तब तक पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है.’

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क्या चुनाव न लड़ने का है अफसोस?


बिहार चुनाव नतीजे सामने आने के बाद मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में प्रशांत किशोर ने चुनाव न लड़ने का अफसोस जताया. उन्होंने कहा, ‘मेरे चुनाव ना लड़ने के फैसले को आप गलती मान सकते हैं. अगर मुझे पता होता कि चुनाव में इस कदर हार का सामना करना पड़ता तो मैं अपनी बुद्धि, पैसा, समय और ताकत क्यों लगाता? अगर मुझे अकेला विधायक या सांसद बनना होता तो मैं सारा पैसा लगाकर वही बन जाता. मुझे अगर एक पैसे का भी एहसास होता कि जन सुराज का ऐसा रिजल्ट आएगा तो मैं इतना बड़ा रिस्क क्यों लेता?’

First published on: Nov 20, 2025 06:46 PM

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