बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच अब सबकी नजरें उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार पर टिक गई हैं. अब तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत कुमार को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही जेडीयू में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं और उन्हें बिहार सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. निशांत कुमार अभी तक राजनीति में सक्रिय नहीं रहे. अब तक खुद को 'लो प्रोफाइल' रखते आए हैं. कभी-कभार कैमरे पर नजर आए तो सधी-सटीक और संतुलित बातें कीं. पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था – "जनता पिताजी (नीतीश कुमार) को जरूर मौका देगी, उन्होंने बहुत काम किया है, आगे भी करेंगे." वे बार-बार कहते रहे हैं कि राजनीति में उनकी खास दिलचस्पी नहीं है और उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर ज्यादा है.
पिता की तरह इंजीनियर हैं निशांत
नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पटना के सेंट केरेंस स्कूल से की और फिर मसूरी के मानवा भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल चले गए. खास बात यह है कि अपने पिता नीतीश कुमार की तरह निशांत भी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उन्होंने बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है.0 निशांत कुमार अब तक शादी नहीं कर चुके हैं. वे पटना में रहते हैं, लेकिन पब्लिक लाइमलाइट और चमक-दमक से दूर रहना पसंद करते हैं.
कितनी संपत्ति के मालिक हैं निशांत?
निशांत कुमार भले ही सादगी से रहते हैं, लेकिन वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार निशांत की कुल अनुमानित संपत्ति करीब 3.55 करोड़ रुपये है. चल संपत्ति लगभग 1.63 करोड़ रुपये की है,अचल संपत्ति लगभग 1.92 करोड़ रुपये की है. निशांत को संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपनी दिवंगत मां मंजू सिन्हा से विरासत में मिला है, जो पेशे से एक शिक्षिका थीं. उनके पास नालंदा के कल्याण बीघा और बख्तियारपुर के हकीकतपुर में पैतृक जमीन और मकान हैं. इसके अलावा पटना के कंकड़बाग में भी एक प्लॉट उनके नाम पर है.
क्यों हो रही है चर्चा?
75 वर्षीय नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और उनके केंद्र की राजनीति में जाने के फैसले ने बिहार में उत्तराधिकार की जंग को हवा दे दी है. ऐसे समय में निशांत कुमार का नाम सामने आना जेडीयू के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है. क्या एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अब बिहार की सत्ता के समीकरणों को डिकोड करेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच अब सबकी नजरें उनके इकलौते बेटे निशांत कुमार पर टिक गई हैं. अब तक राजनीति की चकाचौंध से दूर रहने वाले निशांत कुमार को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि वे जल्द ही जेडीयू में औपचारिक रूप से शामिल हो सकते हैं और उन्हें बिहार सरकार में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है. निशांत कुमार अभी तक राजनीति में सक्रिय नहीं रहे. अब तक खुद को ‘लो प्रोफाइल’ रखते आए हैं. कभी-कभार कैमरे पर नजर आए तो सधी-सटीक और संतुलित बातें कीं. पिछले साल विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने कहा था – “जनता पिताजी (नीतीश कुमार) को जरूर मौका देगी, उन्होंने बहुत काम किया है, आगे भी करेंगे.” वे बार-बार कहते रहे हैं कि राजनीति में उनकी खास दिलचस्पी नहीं है और उनका झुकाव आध्यात्मिक जीवन की ओर ज्यादा है.
पिता की तरह इंजीनियर हैं निशांत
नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे निशांत कुमार का जन्म 20 जुलाई 1975 को हुआ था. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा पटना के सेंट केरेंस स्कूल से की और फिर मसूरी के मानवा भारती इंडिया इंटरनेशनल स्कूल चले गए. खास बात यह है कि अपने पिता नीतीश कुमार की तरह निशांत भी एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. उन्होंने बीआईटी मेसरा से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है.0 निशांत कुमार अब तक शादी नहीं कर चुके हैं. वे पटना में रहते हैं, लेकिन पब्लिक लाइमलाइट और चमक-दमक से दूर रहना पसंद करते हैं.
कितनी संपत्ति के मालिक हैं निशांत?
निशांत कुमार भले ही सादगी से रहते हैं, लेकिन वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार निशांत की कुल अनुमानित संपत्ति करीब 3.55 करोड़ रुपये है. चल संपत्ति लगभग 1.63 करोड़ रुपये की है,अचल संपत्ति लगभग 1.92 करोड़ रुपये की है. निशांत को संपत्ति का बड़ा हिस्सा अपनी दिवंगत मां मंजू सिन्हा से विरासत में मिला है, जो पेशे से एक शिक्षिका थीं. उनके पास नालंदा के कल्याण बीघा और बख्तियारपुर के हकीकतपुर में पैतृक जमीन और मकान हैं. इसके अलावा पटना के कंकड़बाग में भी एक प्लॉट उनके नाम पर है.
क्यों हो रही है चर्चा?
75 वर्षीय नीतीश कुमार के स्वास्थ्य और उनके केंद्र की राजनीति में जाने के फैसले ने बिहार में उत्तराधिकार की जंग को हवा दे दी है. ऐसे समय में निशांत कुमार का नाम सामने आना जेडीयू के भीतर बड़े संगठनात्मक बदलाव का संकेत माना जा रहा है. क्या एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर अब बिहार की सत्ता के समीकरणों को डिकोड करेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा.