Rishabh Sharma
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ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स शुरू होने से पहले जब मैंने लिखा था कि खेल शुरू होने से पहले ही भारत के करीब 30 मेडल्स की उम्मीदों पर ब्रेक लग गया है, तब मन में एक अजीब सी टीस और खामोशी थी. ऑस्ट्रेलियाई शहर विक्टोरिया के पीछे हटने और ग्लासगो के ‘लीन गेम्स’ की बजट कटौतियों ने ऐसा माहौल बना दिया था मानो हमारी उम्मीदें बिना लड़े ही आधी रह गई हों. लेकिन खेल का असली मज़ा यही है कि यह कागज़ी गणित पर नहीं बल्कि खिलाड़ियों के जिद्दी हौसले पर खेला जाता है.
ग्लासगो के सीमित मैदान में जब हमारे 125 खिलाड़ियों का दल उतरा तो उन्होंने निराशा की हर थ्योरी को खारिज कर दिया. 13 गोल्ड, 17 सिल्वर और 9 ब्रॉन्ज़ के साथ कुल 39 मेडल जीतकर मेडल टैली में चौथे नंबर पर रहना कोई छोटी बात नहीं है. पहली पोज़ीशन पर रहने वाले ऑस्ट्रेलिया के पास इस बार 171, इंग्लैंड के पास 110 और कनाडा के पास 62 मेडल रहे. देखा जाए तो भारत का यह प्रदर्शन इस बात का जीता-जागता सबूत है कि हमारी खेल संस्कृति अब सिर्फ दो-चार खेलों की मोहताज नहीं रही.
ग्लासगो में झंडे गाड़ने के बाद अब भारत की नज़रें पूरी तरह से अहमदाबाद 2030 पर टिक चुकी हैं. यह कॉमनवेल्थ गेम्स का 100वां साल यानी शताब्दी संस्करण होगा. ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बनने जा रहा है जो दूसरी बार इन ऐतिहासिक खेलों की मेजबानी करेगा. सबसे राहत की बात यह है कि अहमदाबाद का प्रोग्राम ग्लासगो की तरह बजट की मजबूरियों या पाबंदियों से बंधा नहीं होगा.
अगर रिपोर्ट्स को सही माना जाए तो 2030 गेम्स के लिए 8 खेल पहले ही तय हो चुके हैं. इसके अलावा 15 अन्य खेलों पर विचार चल रहा है. पूरी उम्मीद है कि रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेलों को कॉमनवेल्थ गेम्स फेडरेशन से जल्द ही औपचारिक मंजूरी मिल जाएगी. इसका सीधा मतलब ये भी है कि जो अवसर ग्लासगो में छूट गए थे वे 2030 में दोगुनी ताकत के साथ वापस आ रहे हैं.
13 🥇 17 🥈 9 🥉
— Team India (@WeAreTeamIndia) August 2, 2026
4th on the Medal Tally with 39 Medals. A @glasgow_2026 to remember for #TeamIndia. Congratulations to every single athlete who gave it their all on the field. We’re proud of each and everyone of our contingent.
Thank you for the incredible memories and joy!… pic.twitter.com/ux1do3ggty
2030 के गेम्स का सबसे बड़ा और रोमांचक आकर्षण हमारे अपने पारंपरिक भारतीय खेल बनने वाले हैं. ‘होस्ट्स चॉइस’ कोटे के तहत कबड्डी, खो-खो, मल्लखंब और कॉम्पिटिटिव योग में से किन्हीं दो खेलों को शामिल किए जाने की पूरी संभावना है. जरा सोचिए जब अपनी माटी के ये खेल इंटरनेशनल स्टेज पर खेले जाएंगे तो देश के हर घर में कैसा उत्साह होगा. अपने घरेलू दर्शकों के सामने और अपने होम ग्राउंड पर खेलने का सीधा फायदा भारतीय खिलाड़ियों को मेडल टैली में मिलेगा. मुझे पूरा विश्वास है कि यह कदम भारत की मेडल्स संख्या को नई ऊंचाई पर ले जाएगा. वहीं इससे हमारी समृद्ध खेल संस्कृति को पूरी दुनिया में एक नई पहचान भी मिलेगी.
As an unforgettable chapter closes in Glasgow, a new journey begins.
— Team India (@WeAreTeamIndia) August 2, 2026
With memories made, history written, and hearts full of pride, we now turn our eyes to the future.
As the Commonwealth Sport Flag is handed over to our delegation—athlete representative and two-time Olympic… pic.twitter.com/EhBGchn21q
अब अगर थोड़ा पीछे मुड़कर ग्लासगो के प्रदर्शन का हिसाब देखें तो भारत के कम मेडल आने की वजह कोई नाकामी नहीं थी. असल बात यह थी कि इस बार कई ऐसे खेल इस टूर्नामेंट में शामिल ही नहीं थे जहां भारत हमेशा से मजबूत रहा है. रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, हॉकी और क्रिकेट के न होने से हम कई इवेंट्स में उतर ही नहीं पाए. ये वो खेल थे जहां भारतीय फैंस को मेडल्स की पक्की उम्मीद थी. बर्मिंघम 2022 में भारत ने 61 मेडल जीते थे और लगभग आधे मेडल इन्हीं खेलों से आए थे. बिना मैदान में उतरे ही 28 मेडल का यह सीधा नुकसान किसी भी देश की मेडल टैली को झकझोरने के लिए काफी था. यानी 2026 में हमारे एथलीट्स ने बाकी बचे मौकों को भुनाकर बाजी पलट दी.
No Wrestling.
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 2, 2026
No Badminton.
No Table Tennis.
No Hockey.
Yet, India managed to finish 4th at the Commonwealth Games 2026. 🇮🇳
THANK YOU, TEAM INDIA! 🙏 pic.twitter.com/cY2THFEkVv
अब जब 2026 गेम्स से भारत के पसंदीदा खेल बाहर हुए तो बाकी खेलों के खिलाड़ियों ने देश की उम्मीदों का बोझ अपने कंधों पर उठा लिया. रिंग में हमारी बॉक्सिंग टीम का प्रदर्शन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया. भारतीय बॉक्सर्स ने 7 गोल्ड और 3 सिल्वर के साथ कुल 10 मेडल जीते. जो कॉमनवेल्थ गेम्स के इतिहास में भारत का सबसे सफल बॉक्सिंग अभियान बन गया. जैस्मिन लम्बोरिया, साक्षी चौधरी, प्रिया घनघस, अरुंधति, सचिन सिवाच और अंकुश जैसे यंग स्टार्स ने अपने सटीक पंच से दुनिया को हैरान कर दिया. दूसरी तरफ वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू ने 48 किलो कैटेगरी में कुल 190 किलो वजन उठाकर लगातार तीसरी बार गोल्ड मेडल जीता. मीराबाई ने ये साबित किया कि उनका आत्मविश्वास आज भी अटूट है.
Loved this edit by @SonySportsNetwk 🫶
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 3, 2026
India’s Incredible Campaign at CWG 2026! pic.twitter.com/UvKHoEugvS
बॉक्सिंग के अलावा एथलेटिक्स के ट्रैक पर गुलवीर सिंह ने जो किया उसे भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. उन्होंने 10,000 मीटर में सिल्वर और 5,000 मीटर में ब्रॉन्ज़ मेडल जीतकर बड़ा धमाका किया. वे एक ही कॉमनवेल्थ गेम्स में एथलेटिक्स के दो मेडल जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी बन गए. इसके साथ ही मणिपुर के युवा वेटलिफ्टर ऋषिकांत सिंह ने 60 किलो कैटेगरी में 264 किलो वजन उठाकर सिल्वर मेडल अपने नाम किया. हमारे पैरा-एथलीट्स को भी सलाम करना होगा, जिन्होंने 3 गोल्ड, 2 सिल्वर और 2 ब्रॉन्ज़ समेत कुल 7 मेडल जीतकर अपने अब तक के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन की बराबरी की. यह आंकड़े बताते हैं कि मुश्किल घड़ी में हमारे एथलीट्स कैसे रास्ते निकालना जानते हैं.
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ग्लासगो गेम्स एरीना में जब 2026 कॉमनवेल्थ गेम्स का समापन हुआ तो एक नई और भावुक शुरुआत देखने को मिली. कॉमनवेल्थ गेम्स का आधिकारिक फ्लैग गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी, IOA अध्यक्ष पीटी उषा और ओलंपिक गोल्ड मेडेलिस्ट नीरज चोपड़ा की मौजूदगी में भारत को सौंपा गया. इसके साथ ही अहमदाबाद 2030 का काउंटडाउन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया. वैसे अहमदाबाद को 2030 गेम्स की मेजबानी मिलना जितना गर्व का विषय है उतना ही यह पूरे देश के लिए एक बड़ा और गंभीर इम्तिहान भी है.
𝐈𝐍𝐃𝐈𝐀’𝐒 𝐌𝐎𝐌𝐄𝐍𝐓 𝐇𝐀𝐒 𝐀𝐑𝐑𝐈𝐕𝐄𝐃! 🇮🇳✨
— The Khel India (@TheKhelIndia) August 3, 2026
IOA President PT Usha, Gujarat Deputy CM Harsh Sanghavi, and Neeraj Chopra received the Commonwealth Games Flag.
India officially takes over as host of the 2030 Commonwealth Games! 🏟️ pic.twitter.com/rXiT3wyKjt
दरअसल यह चुनौती सिर्फ मैदान में उतरने वाले खिलाड़ियों की नहीं होगी बल्कि सरकार, खेल संघों, कोचिंग स्टाफ, परिवारों और उन करोड़ों फैंस की साझा जिम्मेदारी होगी जो स्टेडियम में बैठकर तिरंगा लहराएंगे. बताने की ज़रूरत नहीं कि जब आप अपने घर में खेलते हैं तो घरेलू दर्शकों की उम्मीदों का एक अलग दबाव होता है. तब सही प्लानिंग, अनुशासन और मजबूत सपोर्ट सिस्टम की जरूरत होती है. अगले चार साल यह तय करेंगे कि हम सिर्फ एक अच्छे मेजबान बनते हैं या मेडल टैली के शिखर पर राज करते हैं.
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साल 2010 में जब दिल्ली में कॉमनवेल्थ गेम्स हुए थे, तब भारत ने 101 मेडल जीतकर एक नया इतिहास रचा था. अब 2030 में 20 साल बाद हमारे पास उस ऐतिहासिक आंकड़े को पार करने का सबसे बेहतरीन मौका है. ग्लासगो के 39 मेडल हमें यह सिखाते हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी कैसे सीना तानकर लड़ा जाता है. अब जब मैदान अपना होगा… दर्शक हमारे होंगे और खेल भी हमारी पसंद के होंगे तो कामयाबी का दायरा कहीं ज्यादा बड़ा होगा.
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ग्लासगो का सफर अब एक सुखद अनुभव बनकर खत्म हो चुका है और अहमदाबाद 2030 की नई सुबह की शुरुआत हो चुकी है. उम्मीदें नई हैं, हौसले बुलंद हैं और भारत एक बार फिर दुनिया को अपनी खेल ताकत दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार है. इंतज़ार है. ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ भारत में होने वाले खेलों का अगले सबसे बड़े उत्सव के आयोजन का.
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