Rishabh Sharma
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भारतीय क्रिकेट में जब भी कोई नया सितारा उभरता है, तो खेल के साथ-साथ उसके स्वभाव का भी आकलन शुरू हो जाता है. आईपीएल में अपने बेखौफ अंदाज से सुर्खियां बटोरने वाले वैभव सूर्यवंशी को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है. इतनी कम उम्र में मिली लोकप्रियता और अपेक्षाएं एक बड़ी उपलब्धि हैं, लेकिन फिलहाल वैभव अपने बल्ले की वजह से नहीं, बल्कि श्रीलंका में हुए विवाद के कारण चर्चा में हैं. यह घटना उनके करियर के शुरुआती दौर का वह मोड़ है, जहां उन्हें अपने खेल के साथ-साथ अपने मिजाज को भी संभालने की जरूरत है.
वैभव अब केवल एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी नहीं हैं, उन्हें अगले बड़े सितारे के रूप में देखा जा रहा है और ऐसे में उनके लिए अनुशासन के मानदंड भी बदल जाते हैं. जब लाखों युवा आपको अपना आदर्श मानने लगें, तब मैदान पर दिखाया गया गुस्सा सामान्य खिलाड़ी की तुलना में कहीं ज्यादा ध्यान खींचता है. मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना इस बात का साफ संकेत है कि क्रिकेट प्रशासन इसे गंभीरता से देख रहा है. प्रतिभा आपको टीम तक पहुंचा सकती है, लेकिन वैभव को समझना होगा कि बड़े खिलाड़ी दबाव की विपरीत परिस्थितियों में अपने व्यवहार से ही महान बनते हैं.
Vaibhav Sooryavanshi in Tri-Series ( So far)
— CricInformer (@CricInformer) June 15, 2026
14(12) vs SL A
44(22) vs Afg A
21(14) vs SL A
Vaibhav Sooryavanshi performance is not up to the mark in tri-series till now 💔
📷: Sonyliv pic.twitter.com/nJgmnusIcr
वैभव सूर्यवंशी जल्द सीनियर भारतीय टीम में अपना डेब्यू करेंगे, आगामी इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के लिए उनका सीनियर टीम में चयन भी हुआ है. बताने की ज़रूरत नहीं कि सीनियर लेवल पर चुनौतियां कहीं ज्यादा कठिन होंगी. टीम के ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे दौरों पर विरोधी खिलाड़ी मानसिक संतुलन बिगाड़ने के लिए स्लेजिंग को व्यक्तिगत स्तर तक ले जाते हैं. इंटरनेशनल क्रिकेट में सफलता उन्हीं को मिलती है जो इस मनोवैज्ञानिक दबाव के बीच भी अपना फोकस नहीं खोते. वहां हर उकसावे का जवाब आक्रामकता से देना संभव नहीं होता, बल्कि मानसिक मजबूती ही आपको लंबे समय तक क्रीज पर टिकाए रखती है.
मौजूदा समय की बात करें तो इंडिया-ए की ट्राई सीरीज के दौरान दाम्बुला में श्रीलंका के खिलाड़ी विशेन हलाम्बेगे और वैभव के बीच हुई धक्का-मुक्की ने खेल जगत को हैरान किया है. मैदान पर स्लेजिंग नई बात नहीं है, लेकिन जब मामला शारीरिक टकराव और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो तक पहुंच जाए, तो वह केवल खेल नहीं रह जाता. इस घटना ने मैदान के बाहर एक बड़ी बहस छेड़ दी है कि क्या वैभव लगातार हो रहे उकसावे का शिकार हुए या फिर यह उनकी भावनाओं पर नियंत्रण की कमी थी?
🚨 SRI LANKA A, BE READY! 🚨
— CricInformer (@CricInformer) June 19, 2026
🔥 Vaibhav Sooryavanshi has been grinding relentlessly before the Tri-Series Final.
🎯 Working tirelessly on his grounded shots.
💪 Fine-tuning his game.
😤 Determined to answer his critics on the biggest stage
pic.twitter.com/Y5vc6oeXFW
विरोधी टीम का मकसद सिर्फ विकेट लेना नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन बिगाड़ना भी होता है और वैभव प्रतिक्रिया देकर अनजाने में उनकी इसी रणनीति का शिकार हो गए. इस घटना पर पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने सख्त टिप्पणी करते हुए खिलाड़ी को कुछ समय के लिए बाहर बैठाने तक की बात कह दी. पहली नजर में यह राय कठोर लग सकती है, लेकिन इसके पीछे की चिंता को समझना जरूरी है क्योंकि आज के दौर में तकनीकी सुधार से ज्यादा जरूरी आत्मनियंत्रण को माना जाता है.
Physical fight between Vaibhav Sooryavanshi and Sri Lankan players 😬 pic.twitter.com/fLJ0dKCbSd
— RB. (@KailashVashi) June 15, 2026
चिंता की बड़ी वजह यह भी है कि जूनियर स्तर पर भी वैभव के कुछ ऐसे मामले सामने आ चुके हैं. अंडर-19 एशिया में भी वैभव ने बीच मैदान पाकिस्तानी क्रिकेटर द्वारा उन्हें उकसाए जाने पर अपना जूता दिखाया था. हालांकि अपने बच्चे सभी को अच्छे लगते हैं और वैभव के अग्रेशन को भी चाहने वालों की कमी नहीं होगी. लेकिन एक बार की गलती को नजरअंदाज किया जा सकता है, लेकिन जब अतीत और वर्तमान की घटनाएं आपस में मिलने लगें, तो वह एक खतरनाक पैटर्न का संकेत देती हैं. क्रिकेट का इतिहास गवाह है कि विराट कोहली, रिकी पोंटिंग और सर विवियन रिचर्ड्स जैसे महान खिलाड़ियों का स्वभाव भी बेहद आक्रामक था. लेकिन उनकी सबसे बड़ी ताकत यह थी कि उन्होंने अपने गुस्से को रनों में बदलना सीखा. विरोधी खिलाड़ियों को जवाब देने के लिए उन्होंने हाथों या शब्दों का नहीं, हमेशा अपने बल्ले का इस्तेमाल किया.
श्रीलंका में हुई यह घटना वैभव सूर्यवंशी के करियर पर कोई स्थायी दाग नहीं है. मैं तो कहूंगा कि ये एक समय पर मिली जरूरी चेतावनी है.वैभव सूर्यवंशी के पास वह असाधारण एक्स-फैक्टर है जो बहुत कम खिलाड़ियों में होता है, लेकिन महानता सिर्फ टैलेंट से नहीं, बल्कि अनुशासन, धैर्य और आत्मनियंत्रण से हासिल होती है. उम्मीद है कि कोचिंग स्टाफ और सीनियरों के मार्गदर्शन में वैभव इस सबक को समझेंगे. आखिरकार, क्रिकेट में सबसे ज्यादा सम्मान उसी खिलाड़ी को मिलता है जो उकसावे का जवाब पलटकर नहीं, बल्कि अपने बेहतरीन प्रदर्शन से देता है.
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