धरती पर 120000000 प्रकाश वर्ष दूर से आ रही है 'भयानक चीख'! अंतरिक्ष से हर 20 दिन में वैज्ञानिकों को कौन दे रहा है आवाज

Science News in Hindi: ब्रह्मांड की गहराइयों से आ रहे एक रहस्यमयी सिग्नल ने वैज्ञानिकों को हैरत में डाल दिया है. 12 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एक ब्लैक होल से आने वाली यह ‘धड़कन’ खगोलीय रहस्यों की नई परतें खोल रही है.

black hole heartbeat signal

Science News in Hindi: अंतरिक्ष के रहस्यों ने एक बार फिर वैज्ञानिकों को गहरे सोच में डाल दिया है. धरती से लगभग 12 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर एक ऐसी खगोलीय घटना सामने आई है जिसे सुनकर रूह कांप जाए. एक विशालकाय ब्लैक होल के मलबे से हर 20 दिन में एक ‘धड़कन’ जैसी आवाज सुनाई दे रही है जो बिल्कुल किसी मरते हुए तारे की आखिरी चीख की तरह महसूस होती है. वैज्ञानिकों ने इसे महज एक संयोग नहीं माना है बल्कि यह एक ऐसी रहस्यमयी हलचल है जो विज्ञान की दुनिया में तहलका मचाने वाली है. AT2020afhd नामक इस घटना ने यह साफ कर दिया है कि ब्लैक होल की भूख और उसके मलबे का व्यवहार जितना डरावना है उतना ही अनोखा भी.

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आइंस्टीन की 100 साल पुरानी थ्योरी हुई सच

यह खोज महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा 100 साल पहले दी गई जनरल थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी को साबित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. आइंस्टीन ने कहा था कि जब कोई ब्लैक होल जैसी भारी वस्तु तेजी से घूमती है तो वह अपने साथ अंतरिक्ष के ताने-बाने को भी खींचती है जिसे ‘फ्रेम ड्रैगिंग’ कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे शहद के कटोरे में चम्मच घुमाने पर शहद भी साथ घूमने लगती है. ब्लैक होल से निकलने वाली रोशनी और रेडियो तरंगों का हर 20 दिन में कम-ज्यादा होना इसी थ्योरी पर मुहर लगाता है जिसे लेंस-थिरिंग प्रीसेशन भी कहा जाता है.

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शक्तिशाली टेलिस्कोपों ने की इस हलचल की पुष्टि

इस रहस्यमयी सिग्नल की पुष्टि के लिए वैज्ञानिकों ने नासा की नील गेह्रल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी और वेरी लार्ज एरे जैसे ताकतवर टेलिस्कोपों का सहारा लिया है. रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि ब्लैक होल से निकलने वाली एक्स-रे और रेडियो तरंगें एक ही लय में बदल रही हैं. कार्डिफ यूनिवर्सिटी के डॉ. कोसिमो इनसेरा के अनुसार यह इस बात का पक्का सबूत है कि ब्लैक होल का मलबा और उससे निकलने वाली ऊर्जा आपस में पूरी तरह जुड़े हुए हैं और एक साथ थिरक रहे हैं. आधुनिक मशीनों के जरिए ब्रह्मांड के सुदूर कोनों में आइंस्टीन की बातों का सच होना विज्ञान के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है.

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क्यों डरे हुए हैं वैज्ञानिक और क्या है इसका महत्व?

यह खोज इसलिए भी खास है क्योंकि इसकी मदद से अब वैज्ञानिक यह सटीक रूप से माप सकेंगे कि कोई ब्लैक होल कितनी तेजी से घूम रहा है. इसके साथ ही यह समझने में भी बड़ी मदद मिलेगी कि ब्लैक होल अपने आसपास के वातावरण को कैसे प्रभावित करते हैं और खतरनाक प्लाज्मा जेट्स कैसे छोड़ते हैं. मरते हुए तारे का वह मलबा जो अब ब्लैक होल की डिस्क बन चुका है वह भविष्य की कई गुत्थियों को सुलझाने वाला है. फिलहाल हर 20 दिन में आने वाली यह ‘धड़कन’ अंतरिक्ष प्रेमियों और वैज्ञानिकों के बीच कौतूहल और डर दोनों पैदा कर रही है.

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लेखक के बारे में

Raja Alam

Raja Alam

राजा आलम वर्तमान में News 24 हिंदी (B.A.G. Network) में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. हिंदी पत्रकारिता में चार वर्षों के अनुभव के साथ नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर बारीकी से लेखन कर रहे हैं. पत्रकारिता की नींव देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU), अलीगढ़ से रखी, जहां से राजा आलम ने पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद, हिंदी लेखन में गहराई को और विस्तार दिया जब राजा ने जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली से हिंदी साहित्य में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की. हर रोज़ कुछ नया सीखना और पाठकों तक सही, निष्पक्ष और भरोसेमंद खबर पहुंचाना उनका मुख्य उद्देश्य रहा है. राजा के लेखन में आपको पत्रकारिता की गंभीरता के साथ-साथ पाठकों से जुड़ने वाली सरल भाषा और कंटेंट की विविधता दोनों मिलेंगे.
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