Salt Intake during Vrat: व्रत और उपवास में नमक से क्यों रखी जाती है दूरी? जानिए इसके पीछे की धार्मिक मान्यता

Salt Intake during Vrat: सनातन धर्म के व्रतों में समुद्री नमक का त्याग महज़ एक परंपरा नहीं, बल्कि तन-मन को संयमित रखने का प्राचीन रहस्य है. शास्त्रों के अनुसार, साधारण नमक के सेवन से व्रत की पवित्रता और एकाग्रता भंग होती है. यही कारण है कि उपवास में अशुद्ध समुद्री नमक पूरी तरह वर्जित है। आइए जानते हैं, धर्म ग्रंथों में क्या कहा गया है?

Salt-Intake-during-Vrat

व्रत में समुद्री नमक का त्याग क्यों करते हैं, जानिए धर्म ग्रंथों में क्या कहा गया है? (Photo Credit: AI/News24)

Salt Intake during Vrat: सदियों से हिन्दू धर्म में व्रत और उपवास के दौरान नमक का उपयोग वर्जित है. क्या आप जानते हैं, व्रत के समय नमक से इस प्रकार दूरी रखना केवल एक रिवाज या परंपरा नहीं है, बल्कि यह आत्मा, मन और तन को शुद्ध और संयमित रखने का प्राचीन रहस्य है. यूं तो बहुत से लोग सेंधा नमक खाते हैं, लेकिन समुद्री नमक को पूरी तरह वर्जित कर देते हैं. आइए हिन्दू धर्म के ग्रंथों से जानते हैं कि नमक की इस वर्जना के पीछे की वजह क्या है?

विज्ञापन

नमक में राजस-तमस गुण

श्रीमदभगवद्गीता के 17वें अध्याय के 9वें श्लोक में कहा गया है कि बहुत कड़वे, खट्टे, लवणयुक्त यानी नमकीन, अत्यधिक गर्म, तीखे, रूखे और जलन पैदा करने वाले आहार राजसी पुरुष को प्रिय होते हैं. यह भोजन दुख, शोक और रोग उत्पन्न करता है. चूंकि साधारण नमक उत्तेजना यानी राजस गुण और नमक का अधिक सेवन आलस्य यानी तमस गुण बढ़ाता है, इसलिए व्रत में मन शांत-एकाग्र रखने के लिए साधारण नमक का त्याग किया जाता है.

विज्ञापन

पद्म पुराण का साक्ष्य

प्रसिद्ध पद्म पुराण में उल्लेख मिलता है कि उपवास के दिनों में कुछ विशिष्ट चीजों का त्याग अनिवार्य है. समुद्री या कृत्रिम नमक प्रोसेस्ड भोजन की कैटेगरी में आता है. इस पुराण के अनुसार, व्रत में केवल वहीं वस्तुएं ग्रहण की जा सकती हैं, जो पूर्णतः प्राकृतिक रूप में भूमि से उत्पन्न हो. समुद्री नमक मानवीय ढंग से बनाया जाता है, इसलिए इसका त्याग किया जाता है.

विज्ञापन

व्रत खंडित होने की मान्यता

वराह पुराण और स्कन्द पुराण में उल्लेख मिलता है कि व्रत के दौरान रस यानी स्वाद की लालसा का त्याग करना चाहिए. साधारण नामक जीभ को सबसे अधिक सुख और भोग देता है. इसलिए व्रत के दौरान इसके वशीभूत नहीं होना चाहिए. अन्यथा इसके सेवन से व्रत का पुण्य नष्ट हो जाता है.

विज्ञापन

जया पार्वती व्रत की कथा

धार्मिक व्रत कथाओं में भी नमक सेवन न करने के प्रसंग मिलते हैं. भविष्य पुराण में वर्णित जया पार्वती व्रत की कथा के अनुसार, माता पार्वती ने एक बार आमंत्रित देवताओं को बिना नमक का भोजन परोस दिया था. देवताओं ने भी उसे बिना आपत्ति के स्वीकार कर लिया. लेकिन जब माता पार्वती को भूल का एहसास हुआ, वे देवताओं पर बहुत प्रसन्न हुई. उन्होंने कहा, ‘बिना नमक का भोजन व्रत के समान पवित्र होता है.’ कहते हैं तभी से कई विशेष व्रतों में साधारण नमक पूर्ण वर्जित होने की परंपरा चली आ है.

विज्ञापन

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Shyamnandan

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ