Pope Selection Process: कैथोलिक कम्युनिटी के 1.4 अरब लोगों के धर्मगुरु पोप फ्रांसिस का 21 अप्रैल सोमवार 88 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके निधन के बाद से ही ‘पैपल कॉन्क्लेव’ की चर्चा होने लगी है। क्या आप जानते हैं कि ‘पैपल कॉन्क्लेव’ किसे कहते हैं? अगर नहीं तो आइए जानते हैं कि क्या है ‘पैपल कॉन्क्लेव’?
पोप का चुनाव कार्डिनल्स करते हैं। Cardinals यानी ‘कार्डिनल्स’ कैथोलिक चर्च के बहुत ही सीनियर और हाई-रैंकिंग लीडर्स होते हैं। इनका काम पोप की मदद करना, चर्च को गाइड करना, और नई पॉलिसी में सलाह देना होता है। कार्डिनल्स को खुद पोप अपॉइंट करते हैं। ये आमतौर पर बिशप्स या आर्चबिशप्स में से चुने जाते हैं, जिनका चर्च में लंबा अनुभव होता है। कार्डिनल्स रेड कलर के गाउन और कैप (स्कुलेट्टा) पहनते हैं। आमतौर पर दुनिया में 200 के करीब कार्डिनल्स होते हैं। लेकिन Pope Election यानी Conclave में 80 साल से कम उम्र वाले कार्डिनल्स ही वोट कर सकते हैं।
क्या होता है ‘पैपल कॉन्क्लेव’?
जब किसी पोप का डेथ हो जाता है या वो खुद रिजाइन कर देते हैं, तब पोप की सीट सेडे वैकांटे यानी खाली मानी जाती है। इसके बाद सारे कार्डिनल्स को वेटिकन बुलाया जाता है। नए पोप को सिलेक्ट करने की प्रोसेस को Papal Conclave (पैपल कॉन्क्लेव) कहा जाता है। यह लैटिन वर्ड ‘cum clave’ से आया है। इसका मतलब ‘चाबी से लॉक’ होता है। यानी एक ऐसा मीटिंग जो पूरी तरह से प्राइवेट और सीक्रेट होती है।
यह कॉन्क्लेव वेटिकन की फेमस सिस्टीन चैपल में होता है, जहां माइकलएंजेलो की आइकॉनिक पेंटिंग्स भी हैं। कार्डिनल्स यहां पूरी तरह आइसोलेशन में रहते हैं और तब तक बाहर नहीं आते जब तक नया पोप सिलेक्ट न हो जाए।
कौन करता है पोप का सिलेक्शन?
पोप को चुनने का हक 80 साल से कम उम्र के सभी कार्डिनल्स को होता है। ये कार्डिनल्स दुनिया के डिफरेंट कंट्रीज से होते हैं। इनकी टोटल काउंट आमतौर पर 100 से 120 के बीच होती है।
ऐसे होती है वोटिंग
कार्डिनल्स हर दिन टू टाइम्स एक बार मॉर्निंग और एक बार इवनिंग में वोटिंग करते हैं। वे बैलेट पेपर पर जिस पर्सन को पोप बनाना चाहते हैं, उसका नाम लिखते हैं। पोप बनने के लिए कम से कम 2/3 वोट मिलना अनिवार्य माना जाता है। अगर किसी को जरूरी वोट्स नहीं मिलते, तो नेक्स्ट राउंड की वोटिंग होती है।
क्या होता है ब्लैक एक व्हाइट स्मोक सिग्नल?
हर वोटिंग के बाद बैलेट्स को बर्न किया जाता है। जब ब्लैक स्मोक निकलता है तो इसका मतलब होता है कि अभी कोई पोप नहीं चुना गया है। वहीं, व्हाइट स्मोक का अर्थ नए पोप का सेलेक्ट होना होता है।
मिलता है नया नाम
जिस किसी को भी टू-थर्ड वोट्स मिलते हैं, उस कार्डिनल से पूछा जाता है कि क्या आप पोप बनना एक्सेप्ट करते हैं? अगर वो हां कहता है, तो वो अपना नया नाम चुनता है। जैसे ‘Pope Francis’, ‘Pope John Paul’ आदि नाम ऑप्शन में दिए जाते हैं। उसे स्पेशल रोब पहनाई जाती है और वो पहली बार सबके सामने अपीयर होता है।
बालकनी से होता है अनाउंस
वेटिकन की में बालकनी से एक कार्डिनल ‘Habemus Papam’ अनाउंस करता है। Habemus Papam का मतलब है कि अब हमारे पास पोप है। इसके बाद नए पोप पहली बार पब्लिकली आकर सभी को ब्लेस करते हैं और ऑफिशियली पोप बन जाते हैं।
कौन होते हैं पोप?
कैथोलिक मान्यता के अनुसार, पोप सिर्फ चर्च के लीडर नहीं होते है, वो धरती पर जीसस क्राइस्ट के रिप्रेजेंटेटिव माने जाते हैं। उन्हें ‘Vicar of Christ’ (विकार ऑफ क्राइस्ट) कहा जाता है। इसका मतलब है कि जब तक जीसस फिजिकली वापस नहीं आते हैं, तब तक पोप उनके रिप्रेजेंटेटिव का रोल निभा रहे हैं।
सेंट पीटर की कुर्सी के होते हैं उत्तराधिकारी
कैथोलिक चर्च मानता है कि पहले पोप जीसस के सबसे करीबी शिष्य Saint Peter थे। वेटिकन का मानना है कि आज का पोप भी उसी लाइन में आते हैं, यानी हर पोप ‘St. Peter की सीट’ (Chair of Peter) का उत्तराधिकारी होता है। इसलिए, पोप को ‘Supreme Pontiff’ (सर्वोच्च धार्मिक नेता) भी कहा जाता है। कैथोलिक सिस्टम में पोप की बात आखिरी मानी जाती है, खासकर जब वो ‘Ex Cathedra’ यानी ऑफिशियल डिक्लेरेशन करते हैं। अगर उन्होंने किसी धार्मिक सच्चाई को डिक्लेयर कर दिया, तो उसे चर्च में कोई चैलेंज नहीं कर सकता है।
पूरे वर्ल्ड की कैथोलिक चर्चेस के हेड
पोप सिर्फ वेटिकन के नहीं, बल्कि पूरे वर्ल्ड में मौजूद लगभग 1.3 बिलियन कैथोलिक लोगों के स्पिरिचुअल लीडर होते हैं। उनके अंडर में हजारों बिशप्स, कार्डिनल्स और चर्च ऑर्गनाइजेशन आते हैं। हर बड़ी धार्मिक पॉलिसी या निर्णय पोप के अप्रूवल से ही पास होता है।
पोप का रोल होता है स्पिरिचुअल
पोप का इन्फ्लुएंस वर्ल्ड लेवल पर होता है, लेकिन उनका काम पॉलिटिक्स से ऊपर होता है। वो पीस, जस्टिस, ह्यूमन राइट्स जैसे मुद्दों पर वर्ल्ड लीडर्स से बात करते हैं, लेकिन खुद किसी देश की पॉलिटिक्स में दखल नहीं देते हैं। उनकी पावर पूरी तरह से धार्मिक और नैतिक (मॉरल) होती है।
पॉजिटिव एनर्जी देती पोप की ब्लेसिंग
हर संडे को पोप वेटिकन की सेंट पीटर स्क्वायर की बालकनी से पब्लिक को ब्लेस करते हैं। इस ब्लेसिंग को Urbi et Orbi यानी City and the World कहा जाता है। लोग मानते हैं कि पोप की ब्लेसिंग से पॉजिटिव एनर्जी, माफी और डिवाइन गाइडेंस मिलती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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