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Religion

Surya Grahan 2026: क्यों अशुभ माना जाता है ग्रहण का समय? ज्योतिषीय नजरिए से जानिए इसका सच

Surya Grahan 2026: ग्रहण लगना एक सामान्य खगोलीय घटना है लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसे अशुभ माना जाता है. सूर्य ग्रहण लगने पर बड़े-बुजुर्ग और विद्वान पंडित इसे अशुभ बताते हैं, ऐसा क्यों है चलिए ज्योतिषीय नजरिए से जानते हैं.

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Edited By : Aman Maheshwari Updated: Feb 17, 2026 08:26
Surya Grahan 2026
Photo Credit- News24GFX

Surya Grahan 2026: साल का पहला सूर्य ग्रहण आज 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन लग रहा है. यह ग्रहण भारतीय समय के अनुसार, दोपहर को 3 बजकर 26 मिनट से शाम को 7 बजकर 52 मिनट के बीच लगेगा. सूर्य ग्रहण खगोलीय दृष्टि से एक सामान्य घटना है. इसका ज्योतिष से खास संबंध होता है. ग्रहण को आस्था और ज्योतिष के नजरिए से खास माना जाता है. ग्रहण को लोग अशुभ मानते हैं. अगर किसी के जीवन में बुरा चल रहा हो तो उसे कह दिया जाता है कि, ‘इसकी जिंदगी में ग्रहण लगा हुआ है’ लेकिन ऐसा क्यों? चलिए जानते हैं ग्रहण को अशुभ क्यों मानते हैं?

क्यों अशुभ होता है सूर्य ग्रहण?

सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आ जाता है जिस कारण कुछ देर के लिए पृथ्वी पर सूर्य का प्रकाश रुक जाता है. सूर्य के कुछ पलों को ओढल होने के लोग अशुभ मानते हैं. अक्सर बड़े-बुजुर्ग और विद्वान पंडित ग्रहण से सावधान रहने के लिए कहते हैं. दरअसल, ग्रहण के दौरान पृथ्वी पर सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रुक जाता है. ऐसी मान्यता है कि, चंद्रमा द्वारा सूर्य की रोशनी को रोक लेने से प्रकृति में सकारात्मक ऊर्जा का बहाव धीमा हो जाता है. इससे आध्यात्मिक ऊर्जा की कमी होती है. इस कारण से इसे अशुभ माना जाता है.

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ये भी पढ़ें – Surya Grahan 2026: बेहद खास होगा सूर्य ग्रहण, आसमान में दिखेगा अनोखा नजारा, भारत में नजर आएगा या नहीं? जानिए

राहु-केतु से जुड़ी पौराणिक कथा

ग्रहण को लेकर एक पौराणिक कथा राहु और केतु से जुड़ी है. एक बार स्वरभानु नाम के असुर ने धोखे से अमृत पी लिया था. सूर्यदेव और चंद्रमा ने इसकी पहचान की और भगवान विष्णु को बताया. विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र से स्वरभानु का सिर काट दिया. स्वरभानु अमृत पीने से अमर हो चुका था. ऐसे में उसके सिर वाला हिस्सा राहु और धड़ वाला हिस्सा केतु बना. इसी दुश्मनी के कारण राहु और केतु समय-समय पर सूर्य को ग्रहण लगाते हैं जिसे देवताओं पर आए संकट के तौर पर देखा जाता है.

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तन-मन पर होता है असर

सूर्य ग्रहण का तन-मन पर असर होता है. सूर्यदेव पाचन शक्ति के स्वामी माने जाते हैं. ग्रहण के दौरान सूर्य की किरणें कमजोर होने से भोजन और पानी की शुद्धता प्रभावित होती है. इसी कारण ग्रहण के समय खाने की मनाही होती है. इस समय मन भी अस्थिर हो सकता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 17, 2026 08:26 AM

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