Kaalchakra: एकादशी पर चावल क्यों नहीं खाने चाहिए? पंडित सुरेश पांडेय से जानें व्रत के नियम
Kaalchakra Today: सनातन धर्म के लोगों के लिए एकादशी का व्रत काफी महत्वपूर्ण होता है, जिस दिन विशेषतौर पर जगत के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. हालांकि, इस दिन कई नियमों का पालन करना भी जरूरी होता है. चलिए प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं एकादशी व्रत के महत्व, नियम व सावधानियों के बारे में.
Written By: Nidhi Jain|Updated: Apr 13, 2026 10:47
Edited By : Nidhi Jain|Updated: Apr 13, 2026 10:47
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Credit- Meta AI & Social Media
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Kaalchakra Today 13 April 2026: पूरे साल में 24 एकादशी आती हैं, जिस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. गौरतलब है कि इंसानी शरीर में कुल 11 इन्द्रियां हैं और मन एकादश यानी ग्यारहवीं इंद्री है. एकादशी के दिन आकाश में चंद्रमा 11वें अक्ष पर होता है, जिसके कारण मन की दशा बहुत चंचल होती है. ऐसे में व्रत रखने से मन वश में रहता है और स्वभाव शांत होता है. इसके अलावा इसका प्रभाव अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों तक पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और तनाव दूर होता है. साथ ही एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और मन व शरीर स्वस्थ रहता है.
आज 13 अप्रैल 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको सभी 24 एकादशियों से जुड़े नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं.
एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते?
चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है क्योंकि इसकी पूरी खेती जल में ही होती है. इसके अलावा चावल में जल का प्रभाव अधिक होता है, जबकि जल पर चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा पड़ता है. इसलिए कहा जाता है कि चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है, जिससे मन विचलित और चंचल होता है. चंद्रमा मन को अधिक चलायमान न कर पाए, इसलिए एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजों को खाने से मना किया जाता है.
एकादशी के दिन चावल खाने से क्या होता है?
एकादशी का व्रत रखने वाला व्यक्ति यदि चावल खाता है तो चंद्रमा की किरणें उसके शरीर के संपूर्ण जलीय अंश को तरंगित करेंगी. ऐसे में मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा उत्पन्न हो सकती है. बता दें कि एकादशी व्रत में मन के सात्विक भाव का पालन करना जरूरी है.
यदि आप एकादशी व्रत से जुड़े अन्य नियमों व सावधानियों के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए वीडियो को देखें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kaalchakra Today 13 April 2026: पूरे साल में 24 एकादशी आती हैं, जिस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. गौरतलब है कि इंसानी शरीर में कुल 11 इन्द्रियां हैं और मन एकादश यानी ग्यारहवीं इंद्री है. एकादशी के दिन आकाश में चंद्रमा 11वें अक्ष पर होता है, जिसके कारण मन की दशा बहुत चंचल होती है. ऐसे में व्रत रखने से मन वश में रहता है और स्वभाव शांत होता है. इसके अलावा इसका प्रभाव अमावस्या और पूर्णिमा तिथियों तक पड़ता है, जिससे डिप्रेशन और तनाव दूर होता है. साथ ही एकाग्रता शक्ति बढ़ती है और मन व शरीर स्वस्थ रहता है.
आज 13 अप्रैल 2026 के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको सभी 24 एकादशियों से जुड़े नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं.
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एकादशी के दिन चावल क्यों नहीं खाते?
चावल में जल तत्व की मात्रा अधिक होती है क्योंकि इसकी पूरी खेती जल में ही होती है. इसके अलावा चावल में जल का प्रभाव अधिक होता है, जबकि जल पर चंद्रमा का प्रभाव ज्यादा पड़ता है. इसलिए कहा जाता है कि चावल खाने से शरीर में जल की मात्रा बढ़ती है, जिससे मन विचलित और चंचल होता है. चंद्रमा मन को अधिक चलायमान न कर पाए, इसलिए एकादशी के दिन चावल और चावल से बनी चीजों को खाने से मना किया जाता है.
एकादशी के दिन चावल खाने से क्या होता है?
एकादशी का व्रत रखने वाला व्यक्ति यदि चावल खाता है तो चंद्रमा की किरणें उसके शरीर के संपूर्ण जलीय अंश को तरंगित करेंगी. ऐसे में मन के चंचल होने से व्रत के नियमों का पालन करने में बाधा उत्पन्न हो सकती है. बता दें कि एकादशी व्रत में मन के सात्विक भाव का पालन करना जरूरी है.
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एकादशी व्रत के नियम
सुबह दातुन न करें.
पेड़-पौधों की फूल-पत्ती न तोड़ें.
जमीन पर ही सोएं.
मांस और नशीली चीजों का सेवन न करें.
झूठ न बोलें.
गुस्सा न करें.
यदि आप एकादशी व्रत से जुड़े अन्य नियमों व सावधानियों के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए वीडियो को देखें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.