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Religion

Surya Grahan 2026: महाशिवरात्रि के बाद सूर्य-ग्रहण शुभ या अशुभ, किस राशि पर होगा असर; जानें क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

Surya Grahan 2026: 17 फरवरी 2026 को इस साल का पहला सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है, जो एक विशेष खगोलीय घटना है. यह महाशिवरात्रि पर दो दिन बाद लग रहा है, जिसे आस्था, ज्योतिष और विज्ञान तीनों ही दृष्टि से खास माना जा रहा है. आइए जानते हैं, यह ग्रहण शुभ है या अशुभ और किन राशियों पर होगा सबसे अधिक असर?

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Written By: Shyamnandan Updated: Feb 9, 2026 15:31
Surya-Grahan-2026

Surya Grahan 2026: साल 2026 अपने शुरुआत से ही खगोलीय घटनाओं और धार्मिक गतिविधियों के कारण चर्चा में बनी हुई है. फरवरी माह में एक ओर जहां महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा, तो उसके ठीक दो दिन बाद सूर्य ग्रहण भी लगेगा. यह संयोग ज्योतिष और आस्था दोनों दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. आइए जानते हैं, महाशिवरात्रि के बाद लगने वाला यह सूर्य-ग्रहण कितना शुभ या अशुभ और इस बारे में ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?

कब लगेगा साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण?

द्रिक पंचांग के अनुसार, साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी 2026 को लगेगा, जो महाशिवरात्रि के दो दिन बाद आएगा. ज्योतिष मान्यताओं में त्योहार के तुरंत बाद होने वाला ग्रहण समय को संवेदनशील माना जाता है. इसका असर व्यक्ति के मन, निर्णय और वातावरण पर देखा जाता है.

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वलयाकार सूर्य ग्रहण की खास पहचान

यह सूर्य ग्रहण वलयाकार प्रकृति का होगा. इसे विज्ञान की भाषा में रिंग ऑफ फायर कहा जाता है. इस स्थिति में चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता. सूर्य का बाहरी किनारा चमकदार घेरा बनाकर दिखाई देता है. यह दृश्य खगोल प्रेमियों के लिए काफी रोचक होता है.

महाशिवरात्रि के बाद ग्रहण का संकेत

महाशिवरात्रि को शिव साधना और आत्मिक ऊर्जा का पर्व माना जाता है. इसके बाद सूर्य ग्रहण का होना बदलाव का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय आत्मचिंतन और शुद्धिकरण का अवसर देता है. यह काल पुराने विचारों को छोड़कर नई दिशा में आगे बढ़ने का संकेत देता है.

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क्या यह भारत में दिखाई देगा?

भारतीय समयानुसार यह ग्रहण दोपहर 03:26 बजे प्रारंभ होगा और शाम 07:57 बजे समाप्त होगा. विशेष बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसका दृश्य केवल दक्षिणी गोलार्ध के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा. इसी कारण कुछ ज्योतिष पंडितों के अनुसार सूतक काल यानी ग्रहण से पूर्व का धार्मिक अवधी, भारत में लागू नहीं मानी जाएगी. लेकिन, ज्योतिष शास्त्र में ग्रहण को आम तौर पर शुभ नहीं माना जाता है. ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि राहु-केतु के प्रभाव की वजह से मानवीय जीवन में मानसिक, भावनात्मक तीव्रता और उथल-पुथल की स्थितियां पैदा होंगी.

किन राशियों पर दिख सकता है असर

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य आत्मबल और नेतृत्व का कारक ग्रह माना जाता है. ग्रहण के कारण कुछ राशियों पर दबाव बढ़ सकता है, ये हैं:

– कुंभ राशि वालों को मानसिक थकान और स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानी हो सकती है.
– सिंह राशि के जातकों को कार्यक्षेत्र में सतर्क रहने की जरूरत होगी, क्योंकि प्रॉब्लम बढ़ सकती है.
वृश्चिक राशि के लिए यह धन से जुड़े फैसले सोच-समझकर लेने का समय होगा, नुकसान से तनाव बढ़ेगा.
मकर राशि वालों को पारिवारिक संवाद में संयम रखने की आवश्यकता होगी, क्लेश और कष्ट बढ़ सकता है.

ग्रहण में क्या करें, क्या नहीं?

ग्रहण काल में क्या करें – ग्रहण के दौरान मंत्र जाप और ध्यान को शुभ माना जाता है. ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का मानसिक जप किया जा सकता है. ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान का भी विशेष महत्व बताया जाता है.

किन बातों से दूरी रखें – धार्मिक परंपरा के अनुसार ग्रहण समय में भोजन पकाना या ग्रहण करना टाला जाता है. गर्भवती महिलाओं को इस समय अतिरिक्त सावधानी रखने की सलाह दी जाती है. नुकीली वस्तुओं जैसे कैंची, सुई आदि का प्रयोग इस असुरक्षित समय में नहीं करना चाहिए.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 09, 2026 03:22 PM

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