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Sneezing Beliefs: छींकने के बाद क्यों कहते हैं ‘God Bless You’? जानिए धार्मिक मान्यताएं और दिलचस्प इतिहास

Sneezing Beliefs: छींक आने पर ‘God Bless You’ कहना एक पुरानी परंपरा है, जो धार्मिक मान्यताओं और इतिहास से जुड़ी है। आज भी इसे बुरी शक्तियों से बचाने के लिए कहा जाता है। आइए जानते हैं, छींकने के बाद क्यों कहते हैं 'God Bless You'?

Sneezing Beliefs: चाहे कोई कहीं भी हो, अक्सर छींक आते ही अनजाने में मुंह से निकलता है ‘गॉड ब्लेस यू (God Bless You)’। कई बार तो हम किसी अजनबी को छींकते देखकर भी हम यह बोल देते हैं। क्या यह सिर्फ एक आदत है या इसके पीछे कोई ठोस इतिहास छिपा है? असल में इस छोटे से वाक्य को बोलने की शुरुआत सैकड़ों साल पहले हुई थी, जब लोग छींक को मौत का संदेश मानते थे। आइए जानते हैं पूरी कहानी, मान्यताएं और दिलचस्प इतिहास।

जब छींक थी प्लेग की पहचान!

सबसे पुरानी और चौंकाने वाली वजह है 6वीं शताब्दी। उस समय इटली में ब्यूबोनिक प्लेग फैला था। यह इतना खतरनाक था कि छींक आना मतलब मरने का पहला लक्षण। पोप ग्रेगरी प्रथम ने सख्त आदेश दे दिया- कोई भी जब छींके, तो उसे तुरंत ‘God Bless You’ कहो। यह प्रार्थना थी, एक आखिरी उम्मीद। 14वीं सदी में जब ब्लैक डेथ ने यूरोप में पूरी तबाही मचाई तो यह रिवाज और मजबूत हो गया।

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आत्मा के बाहर निकलने का डर!

प्राचीन संस्कृतियों में यह विश्वास था कि छींकते समय इंसान की आत्मा शरीर से उछल सकती है। एक जोर की छींक और रूह बाहर। लोगों को लगता था कि आशीर्वाद बोलने से वह वापस अंदर आ जाती है। कुछ परंपराओं में यह भी कहा गया कि छींक के दौरान बुरी आत्माओं के भीतर घुसने का मौका मिल जाता है। ‘God Bless You’ उसी बुरी ताकत को भगाने के लिए था।

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दिल के रुकने का भ्रम!

एक पुरानी गलत धारणा थी कि छींकने से दिल की धड़कन कुछ पल के लिए रुक जाती है। यह बिल्कुल सही नहीं है, लेकिन उस समय के लोग इसे सच मानते थे। वे ‘God Bless You’ इसलिए कहते थे मानो छींकने वाले को ‘दोबारा जिंदा’ होने की बधाई दे रहे हों। यह विचार भले ही वैज्ञानिक न हो, लेकिन परंपरा को और पक्का कर गया।

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अलग-अलग देशों में अलग-अलग शब्द

जर्मनी में छींकने पर ‘गेजुंडहाइट’ (Gesundheit) बोलते हैं, मतलब ‘अच्छी सेहत’। स्पेन और लैटिन देशों में सैल्यूड (Salud) कहते हैं, जिसका मतलब भी ‘स्वास्थ्य’ ही है। संस्कृत के प्रभाव वाली भाषाओं में ‘आयुष्मान भव’ या ‘जीते रहो’ जैसी शुभकामनाएं दी जाती हैं। यानी हर जगह यह शिष्टाचार है, बस शब्द अलग-अलग हैं।

अब है ‘केयरिंग’ दिखाने तरीका

अब यह न तो प्लेग से बचाता है, न आत्मा बाहर निकलती है। फिर भी हम कहते हैं। क्योंकि यह हमारी ‘केयरिंग’ दिखाने का सबसे पुराना और सहज तरीका है। बस एक पल के लिए सामने वाले को लगता है कि उसकी परवाह है। यह मान्यताओं से निकला एक ऐसा वाक्य है जो अब दुनिया भर का शिष्टाचार बन चुका है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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First published on: Apr 24, 2026 04:02 PM

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Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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