Saraswati Puja 2026: वसंत पंचमी और सरस्वती पूजा का पर्व माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाते हैं. इस साल 23 जनवरी 2026, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. सरस्वती पूजा के दिन घर पर मां सरस्वती की प्रतिमा स्थापित करने से पहले आप पूजा और प्रतिमा स्थापित के जरूरी नियमों को जान लें. आप पूजा में कोई गलती करते हैं तो आपको पूजा का फल नहीं मिलेगा. चलिए सरस्वती पूजा के लिए प्रतिमा स्थापना के लिए सही दिशा, मुद्रा और नियमों के बारे में जानते हैं.
शुभ दिशा में स्थापित करें प्रतिमा
मां सरस्वती की प्रतिमा को घर में शुभ दिशा में स्थापित करें. आप देवी सरस्वती की प्रतिमा को पूर्व या उत्तर दिशा में स्थापित कर सकते हैं. यह दिशा शुभ मानी जाती हैं. प्रतिमा स्थापना के लिए ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व सबसे उत्तम मानी जाती है. स्थापना से पहले पूजा स्थान की अच्छे से सफाई करें और गंगा जल से शुद्ध कर लें. प्रतिमा को स्थापित करने से पहले चौकी पर सफेद रंग या पीले रंग के वस्त्र बिछाएं. मां सरस्वती को पीला और सफेद रंग अति प्रिय होता है.
कैसी होनी चाहिए प्रतिमा?
आपको मां सरस्वती की हमेशा कमल पर बैठकर वीणा बजाती हुए आशीर्वाद देती हुई मुद्रा की प्रतिमा लेकर आनी चाहिए. इस मुद्रा वाली प्रतिमा को आप स्थापित कर सकते हैं. यह शुभ मानी जाती है. आप ध्यान रखें कि, भूलकर भी टूटी हुई या खंडित मूर्ति स्थापित न करें, प्रतिमा की स्थापना से पहले प्रतिमा को अच्छे से देख लें. खंडित प्रतिमा को स्थापित करने से घर में नकारात्मकता आती है.
इन नियमों का रखें खास ध्यान
पूजा के समय काले कपड़े पहनने से बचें. वसंत पंचमी पर सरस्वती पूजा में सफेद और पीले कपड़े पहनना शुभ होता है. आपको भूलकर भी इस दिन कलम और किताबों का अपमान नहीं करना चाहिए. आपको वाणी पर संयम रखना चाहिए और किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए. सरस्वती पूजा के दिन मांस-मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन न करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.