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Religion

Premanand Maharaj Updesh: प्रेमानंद महाराज ने बताया तुरंत छोड़ दें ये 10 काम, वरना सब हो जाएगा तबाह

Premanand Maharaj Updesh: वृंदावन के संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज ने चेताया है कि जीवन की छोटी गलतियां ही बड़ी तबाही का कारण बनती हैं। उनके अनुसार 10 ऐसी आदतें हैं जो सुख और शांति छीन लेती हैं। जानिए, आखिर कौन-सी हैं ये आदतें, जिन्हें तुरंत छोड़ना जरूरी है?

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Written By: Shyamnandan Updated: Mar 21, 2026 19:06
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Premanand Maharaj Updesh: वृंदावन के संत श्री हित प्रेमानंद जी महाराज अपने सरल और सीधे उपदेशों के लिए जाने जाते हैं। उनके सत्संग में देश-विदेश से लोग जीवन की उलझनों का हल खोजने पहुंचते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने एक उपदेश में जीवन को बिगाड़ने वाली 10 आदतों पर खास चेतावनी दी। उनका कहना है कि बड़ी समस्याएं नहीं, बल्कि छोटी गलतियां ही इंसान का सुख और संतुलन छीन लेती हैं। आइए जानते हैं, प्रेमानंद जी ने किन 10 कामों को जीवन तबाह करने वाला बताया है?

स्वयं की प्रशंसा से दूरी

महाराज बताते हैं कि खुद की तारीफ करना अहंकार को जन्म देता है। इससे बुद्धि भ्रमित होती है और व्यक्ति सही-गलत का फर्क खो देता है। इसलिए स्वयं की प्रशंसा से दूरी बनाएं।

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लालच सबसे बड़ा जाल

उनके अनुसार लालच इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन है। यह धीरे-धीरे सुख, शांति और संतोष सब छीन लेता है।

क्रोध और द्वेष का खतरा

छोटी बात पर भड़क जाना विनाश का संकेत है। मन में द्वेष रखना रिश्तों को कमजोर करता है और मानसिक अशांति बढ़ाता है।

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शरण में आए की रक्षा

महाराज कहते हैं कि जो व्यक्ति किसी की शरण में आए, उसकी रक्षा करना धर्म है। ऐसा न करने से पुण्य क्षीण होते हैं।

उत्साह में पाप से बचें

कई लोग जोश में गलत काम कर बैठते हैं। वे चेतावनी देते हैं कि ऐसे कर्मों का फल कठोर होता है और ईश्वर भी क्षमा नहीं करते हैं।

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गलत विचारों पर नियंत्रण

मन में अनुचित इच्छाएं रखना भी पाप की ओर ले जाता है। साफ और संयमित सोच जरूरी है।

खुद को श्रेष्ठ मानना

दूसरों को नीचा दिखाना आध्यात्मिक पतन का कारण है। समानता का भाव ही सच्ची भक्ति का मार्ग खोलता है।

दान में सच्चाई जरूरी

दान का वचन देकर मुकर जाना या देने के बाद पछताना, दोनों ही गलत हैं। दान हमेशा श्रद्धा से होना चाहिए।

धन का सही उपयोग

महाराज समझाते हैं कि धन का उद्देश्य केवल संग्रह नहीं है। परिवार और जरूरतमंदों की सहायता में खर्च किया गया धन ही सार्थक है।

किसी को नुकसान न पहुंचाएं

बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और असहाय लोगों को कष्ट देना सबसे बड़ा अधर्म है। ऐसे कर्म जीवन को अंधकार की ओर ले जाते हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Mar 21, 2026 07:06 PM

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