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Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat: आज है महाशिवरात्रि, जानें शिवलिंग के जलाभिषेक का मुहूर्त, नोट कर लें उपवास और पारण टाइमिंग

Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat:इस वर्ष महाशिवरात्रि पर 10 अत्यंत शुभ योगों का विशेष संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. रात्रि में परंपरा अनुसार चार प्रहर में पूजा की जाएगी. इसके अलावा शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए भी दिन भर में चार अलग-अलग शुभ मुहूर्त निर्धारित किए गए हैं. जानिए ये शुभ मुहूर्त, उपवास और पारण टाइमिंग क्या है?

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Mahashivratri 2026 Shubh Muhurat: आज 15 फरवरी को देशभर में कल महाशिवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाएगा. यह पर्व फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को आता है. मान्यता है कि इसी तिथि पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था. इसी कारण इस दिन विशेष पूजा, व्रत और रात्रि जागरण का महत्व बताया गया है. मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रहेगी. उज्जैन के महाकाल, देवघर के बैद्यनाथ मंदिर समेत कई बड़े मंदिरों में विशेष सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए बैरिकेडिंग और पेयजल की व्यवस्था रहेगी. इसके साथ ही, शिवालयों में जलाभिषेक और दूधाभिषेक की तैयारी पूरी हो चुकी है. कई स्थानों पर विशेष श्रृंगार और भजन संध्या का आयोजन भी होगा. आइए जानते हैं, शिवलिंग के जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त और उपवास और पारण टाइमिंग क्या हैं?

महाशिवरात्रि पर जलाभिषेक के शुभ मुहूर्त

ज्योतिषाचार्य हर्षवर्द्धन शांडिल्य बताते हैं कि इस वर्ष जलाभिषेक के लिए कई शुभ समय निर्धारित हैं. भक्त अपनी सुविधा के अनुसार इनमें से किसी भी मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं.

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पहला मुहूर्त: सुबह 08:24 बजे से 09:48 बजे तक
दूसरा मुहूर्त: सुबह 09:48 बजे से 11:11 बजे तक
तीसरा मुहूर्त: सुबह 11:11 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
चौथा मुहूर्त: सुबह 06:11 बजे से 07:47 बजे तक

इन समयों में शिवलिंग पर जल, दूध या पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना गया है.

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महाशिवरात्रि की चार प्रहर की पूजा का समय

महाशिवरात्रि की रात चार प्रहर में पूजा की जाती है. हर प्रहर का अलग महत्व है. इसके साथ, रात्रि जागरण का विशेष महत्व है. माना जाता है कि इस रात जागकर शिव नाम का जाप करने से विशेष पुण्य मिलता है.

पहला प्रहर: 15 फरवरी को शाम 06:11 से रात 09:23 बजे तक
दूसरा प्रहर: रात 09:23 बजे से 12:35 बजे तक
तीसरा प्रहर: 16 फरवरी को रात 12:35 बजे से सुबह 03:47 बजे तक
चौथा प्रहर: 16 फरवरी को सुबह 03:47 से 06:59 बजे तक

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Photo Credit: Gemini AI

तिथि और व्रत पारण

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे से शुरू होगी. यह तिथि 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे तक रहेगी. महाशिवरात्रि का व्रत 15 फरवरी को रखा जाएगा. व्रत का पारण 16 फरवरी को सुबह 06:59 बजे से दोपहर 3:24 बजे के बीच किया जा सकेगा. ध्यान रहे कि पारण समय में ही व्रत खोलना उचित माना गया है.

यह भी पढ़ें: Mahashivaratri 2026: धन, संतान और रोगमुक्ति के लिए कैसे करें भगवान शिव का अभिषेक, जानें शिवलिंग पूजा के रहस्य

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इस बार बन रहे 10 शुभ योग

इस बार महाशिवरात्रि पर कई शुभ योग बन रहे हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन योगों में पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन शिव योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, प्रीति योग, आयुष्मान योग, सौभाग्य योग, शोभन योग, साध्य योग, शुक्ल योग और ध्रुव योग बनेंगे. साथ ही व्यतिपात और वरियान योग भी रहेंगे. ज्योतिष के अनुसार इतने योग एक साथ कम ही बनते हैं.

चार प्रमुख राजयोग का संयोग

इस वर्ष कुंभ राशि में चार प्रमुख राजयोग बन रहे हैं. बुध और सूर्य की युति से बुधादित्य राजयोग बनेगा, जबकि बुध और शुक्र मिलकर लक्ष्मी नारायण राजयोग बनाएंगे. वहीं, सूर्य और शुक्र से शुक्रादित्य योग बनेगा. शनि भी अपनी मूल त्रिकोण राशि कुंभ में रहकर शश महापुरुष राजयोग बनाएंगे.

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इसके अलावा सूर्य, बुध, शुक्र और राहु की एक साथ स्थिति से चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है. ज्योतिष मान्यता के अनुसार ऐसे संयोग आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ माने जाते हैं.

पूजन सामग्री में क्या लें?

महाशिवरात्रि की पूजा में विशेष सामग्री का उपयोग होता है. बेलपत्र, शमी पत्र, धतूरा, भांग, दीपक, आक का फूल, सफेद फूल, चंदन, रोली, सिक्का, अक्षत, सुपारी, कलश, लौंग, इलायची, जनेऊ, नारियल, मिठाई और फल का प्रयोग किया जाता है. कई भक्त पंचामृत भी तैयार करते हैं. इसमें दूध, दही, घी, शहद और मिश्री मिलाई जाती है.

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Photo Credit: Gemini AI

सरल पूजन विधि

सुबह जल्दी उठें. स्नान करें. व्रत का संकल्प लें.
एक साफ स्थान पर चौकी रखें. उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं. थोड़े चावल रखकर शिव प्रतिमा स्थापित करें.
मिट्टी या तांबे के कलश पर स्वास्तिक बनाएं. उसमें जल और थोड़ा गंगाजल मिलाएं. सुपारी, सिक्का और हल्दी की गांठ डालें.
शिवलिंग को सामने रखें. घी का दीपक जलाएं.
गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें. अभिषेक के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें.
इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र और फल अर्पित करें.
कपूर से आरती करें. मिठाई या खीर का भोग लगाएं. फिर प्रसाद बांट दें.

महाशिवरात्रि की पौराणिक कथा

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार इस दिन शिव और पार्वती का विवाह हुआ था. इसलिए विवाहित और अविवाहित दोनों के लिए यह व्रत महत्वपूर्ण माना गया है. पौराणिक कथा यह है कि देवी सती के आत्मदाह के बाद, उन्होंने हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया. नारद मुनि के उपदेश पर उन्होंने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की. भगवान शिव की परीक्षा: पार्वती की अटूट श्रद्धा देखकर शिवजी ने सप्तऋषियों को उनकी परीक्षा लेने भेजा, जिसमें वह सफल रहीं. अंततः शिवजी ने उनसे विवाह करना स्वीकार किया.

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एक अन्य कथा समुद्र मंथन से जुड़ी है. देवताओं और दानवों ने अमृत पाने के लिए मंथन किया. सबसे पहले भयंकर विष निकला. उसकी ज्वाला से तीनों लोक संकट में पड़ गए. तब सृष्टि की रक्षा के लिए शिव ने वह विष अपने कंठ में धारण किया. विष के प्रभाव से उनका कंठ नीला हो गया. तभी से उन्हें नीलकंठ कहा गया. इसके देवताओं ने पूरी रात जागकर ‘महादेव’ कहकर उनकी स्तुति की. कहा जाता है कि महाशिवरात्रि का रात्रि जागरण इसी घटना की स्मृति में किया जाता है.

यह भी पढ़ें: Budh Ki Chaal: महाशिवरात्रि पर बुध बदलेंगे चाल, जानें करियर, कारोबार, शेयर बाजार, एजुकेशन और लव लाइफ पर असर

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 14, 2026 11:50 PM

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About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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