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Religion

Mahashivaratri 2026: धन, संतान और रोगमुक्ति के लिए कैसे करें भगवान शिव का अभिषेक, जानें शिवलिंग पूजा के रहस्य

Mahashivaratri 2026: महाशिवरात्रि के इस दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और विभिन्न पवित्र द्रव अर्पित करते हैं. शिव पुराण में बताया गया है कि जिस द्रव यानी जल और रस से अभिषेक किया जाता है, उसी के अनुसार फल की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं, धन, संतान और रोगमुक्ति के लिए कैसे करें भगवान शिव का अभिषेक?

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Written By: Shyamnandan Updated: Feb 14, 2026 21:00
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Mahashivaratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है. इस दिन भक्त शिवलिंग पर जल, दूध और विभिन्न पवित्र द्रव अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और सही विधि से किया गया अभिषेक मनोकामनाएं पूर्ण करता है. ग्रंथों, विशेषकर शिव पुराण में बताया गया है कि जिस द्रव यानी जल और रस से अभिषेक किया जाता है, उसी के अनुसार फल की प्राप्ति होती है. इसलिए हर सामग्री का अपना आध्यात्मिक महत्व है. आइए जानते हैं, धन, संतान और रोगमुक्ति के लिए कैसे करें भगवान शिव का अभिषेक?

विभिन्न द्रवों से अभिषेक और उनके फल

गन्ने का रस

गन्ने के रस से शिवलिंग का अभिषेक धन और सुख समृद्धि की कामना से किया जाता है. इसे आर्थिक उन्नति और व्यापार में वृद्धि से जोड़ा गया है. जीवन में स्थायी लक्ष्मी कृपा के लिए यह उपाय शुभ माना जाता है.

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शहद

शहद अर्पित करने से वाणी में मधुरता आती है. समाज में मान सम्मान बढ़ता है. इसे नकारात्मकता दूर करने और पाप क्षय के भाव से भी चढ़ाया जाता है.

गाय का घी

शुद्ध गाय के घी से अभिषेक वंश वृद्धि के लिए किया जाता है. यह संतान सुख और शारीरिक कमजोरी दूर करने की कामना से अर्पित किया जाता है. परिवार में शक्ति और स्थिरता का प्रतीक माना गया है.

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सरसों का तेल

सरसों के तेल से अभिषेक शत्रु बाधा दूर करने के लिए किया जाता है. ग्रह दोष, विशेषकर शनि संबंधी कष्टों को शांत करने की भावना से इसे अर्पित किया जाता है. साहस और सुरक्षा की कामना भी इससे जुड़ी है.

दूध

कच्चे दूध से अभिषेक मानसिक शांति और उत्तम स्वास्थ्य के लिए किया जाता है. यह लंबी आयु और पवित्रता का प्रतीक है. परिवार में सुख शांति की कामना से भी दूध चढ़ाया जाता है.

दही

दही से अभिषेक जीवन में स्थिरता लाने के लिए किया जाता है. गृह क्लेश शांति और संबंधों में संतुलन के लिए यह उपयोगी माना गया है. वाहन और भवन सुख की इच्छा रखने वाले भी दही अर्पित करते हैं.

अभिषेक करते समय रखें ध्यान

जल या दूध चढ़ाते समय धार पतली और निरंतर होनी चाहिए.
अभिषेक के दौरान ओम नमः शिवाय या महामृत्युंजय मंत्र का जप करें.
जल अर्पित करने के लिए तांबे का पात्र श्रेष्ठ माना गया है.
दूध को तांबे के पात्र में न चढ़ाएं.
दूध के लिए चांदी या पीतल का पात्र उपयोग करना उचित माना गया है.
श्रद्धा, स्वच्छता और सही विधि का पालन करना आवश्यक है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 14, 2026 09:00 PM

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