Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 नजदीक है और शिव भक्त तैयारियों में जुट गए हैं. इस पावन दिन पर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. शास्त्रों में बताया गया है कि भोलेनाथ बहुत सरल हैं और सच्ची भावना से शीघ्र प्रसन्न होते हैं. लेकिन कुछ खास वस्तुएं ऐसी हैं जो उन्हें अत्यंत प्रिय हैं. अगर सही विधि से अर्पित की जाएं तो पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. आइए जानते हैं, भगवान शिव को प्रिय ये 7 वस्तुएं क्या हैं और उन्हें चढ़ाने का सही तरीका क्या है?
शिवजी को बेलपत्र है सबसे प्रिय
बेलपत्र को शिव पूजा का मुख्य अंग माना गया है. इसके तीन पत्ते त्रिदेव का प्रतीक हैं. पत्ता साफ हो. कटा या सूखा न हो. इसे उल्टा चढ़ाएं, यानी चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे. नए पत्ते न मिलें तो पहले चढ़े पत्ते को धोकर फिर अर्पित किया जा सकता है.
जल और पंचामृत से अभिषेक
भगवान शिव ने विष पान किया था. इसलिए जल चढ़ाकर शीतलता दी जाती है. तांबे के पात्र से जल अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाएं. दूध चढ़ाते समय तांबे की जगह पीतल या चांदी का पात्र लें. अभिषेक के बाद साफ जल जरूर चढ़ाएं.
भांग और धतूरा का महत्व
धतूरा और भांग को महादेव शिव के अघोर रूप से जोड़ा गया है. पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद इन औषधीय पदार्थों से विष का प्रभाव कम किया गया. धतूरा साबुत और ताजा हो. इसे श्रद्धा से शिवलिंग के पास रखें.
सफेद चंदन की शीतलता
कैलाशवासी शिव वैरागी हैं. उन्हें सादगी प्रिय है. सफेद चंदन का लेप शांति और संतुलन का प्रतीक है. शिवलिंग पर हल्का तिलक करें. अधिक मात्रा न लगाएं.
यह भी पढ़ें: Lucky Gemstone: गोमेद रत्न किन राशियों के लिए है शुभ, पहनने से पहले जरूर जानें ये 7 बड़े फायदे
अकवन और सफेद फूल
अकवन का फूल आशुतोष शिव को विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. इसके अलावा सफेद कनेर या अन्य सुगंधित सफेद फूल चढ़ाएं. लाल या अत्यधिक सुगंध वाले फूल से बचें. फूल ताजे हों.
अक्षत का अर्थ और नियम
अक्षत यानी बिना टूटे चावल. ये पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक हैं. चावल साफ और सूखे हों. चंदन मिले अक्षत भी अर्पित किए जा सकते हैं.
भस्म का आध्यात्मिक संकेत
भस्म महाकाल शिव का मुख्य श्रृंगार है. यह जीवन की नश्वरता का संदेश देती है. उज्जैन के महाकाल मंदिर की भस्म आरती इसका प्रमुख उदाहरण है. पूजा में थोड़ी भस्म अर्पित कर सकते हैं.
इस क्रम से करें पूजा
- सबसे पहले शुद्ध जल से अभिषेक करें. जल धीरे-धीरे और श्रद्धा से चढ़ाएं, जल्दबाजी न करें.
- फिर पंचामृत से स्नान कराएं. पंचामृत अर्पित करते समय मन में शिव मंत्र का जाप करते रहें.
- इसके बाद जल से शुद्धि करें. चंदन लगाएं. चंदन का तिलक हल्के हाथ से करें और शांति की भावना रखें.
- बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें. प्रत्येक वस्तु चढ़ाते समय अपनी मनोकामना स्पष्ट रूप से प्रार्थना में रखें.
- अंत में धूप, दीप और आरती करें. आरती के समय पूरा परिवार साथ हो तो पूजा का फल और बढ़ता है.
- जल चढ़ाते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें. दिशा का सही ध्यान रखने से पूजा अधिक शुभ मानी जाती है.
- साथ ही, जलाधारी की दिशा का ध्यान भी अवश्य रखें. जल इस तरह चढ़ाएं कि वह शिवलिंग के चारों ओर सम्मानपूर्वक प्रवाहित हो.
यह भी पढ़ें: Mahabharata Facts: पांचजन्य से मणिपुष्पक तक, जानें महाभारत के दिव्य शंख और उनकी अद्भुत शक्तियां
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि 2026 नजदीक है और शिव भक्त तैयारियों में जुट गए हैं. इस पावन दिन पर भगवान शिव की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है. शास्त्रों में बताया गया है कि भोलेनाथ बहुत सरल हैं और सच्ची भावना से शीघ्र प्रसन्न होते हैं. लेकिन कुछ खास वस्तुएं ऐसी हैं जो उन्हें अत्यंत प्रिय हैं. अगर सही विधि से अर्पित की जाएं तो पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. आइए जानते हैं, भगवान शिव को प्रिय ये 7 वस्तुएं क्या हैं और उन्हें चढ़ाने का सही तरीका क्या है?
शिवजी को बेलपत्र है सबसे प्रिय
बेलपत्र को शिव पूजा का मुख्य अंग माना गया है. इसके तीन पत्ते त्रिदेव का प्रतीक हैं. पत्ता साफ हो. कटा या सूखा न हो. इसे उल्टा चढ़ाएं, यानी चिकना भाग शिवलिंग की ओर रहे. नए पत्ते न मिलें तो पहले चढ़े पत्ते को धोकर फिर अर्पित किया जा सकता है.
जल और पंचामृत से अभिषेक
भगवान शिव ने विष पान किया था. इसलिए जल चढ़ाकर शीतलता दी जाती है. तांबे के पात्र से जल अर्पित करना श्रेष्ठ माना गया है. पंचामृत में दूध, दही, घी, शहद और शक्कर मिलाएं. दूध चढ़ाते समय तांबे की जगह पीतल या चांदी का पात्र लें. अभिषेक के बाद साफ जल जरूर चढ़ाएं.
भांग और धतूरा का महत्व
धतूरा और भांग को महादेव शिव के अघोर रूप से जोड़ा गया है. पौराणिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के बाद इन औषधीय पदार्थों से विष का प्रभाव कम किया गया. धतूरा साबुत और ताजा हो. इसे श्रद्धा से शिवलिंग के पास रखें.
सफेद चंदन की शीतलता
कैलाशवासी शिव वैरागी हैं. उन्हें सादगी प्रिय है. सफेद चंदन का लेप शांति और संतुलन का प्रतीक है. शिवलिंग पर हल्का तिलक करें. अधिक मात्रा न लगाएं.
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अकवन और सफेद फूल
अकवन का फूल आशुतोष शिव को विशेष रूप से अर्पित किया जाता है. इसके अलावा सफेद कनेर या अन्य सुगंधित सफेद फूल चढ़ाएं. लाल या अत्यधिक सुगंध वाले फूल से बचें. फूल ताजे हों.
अक्षत का अर्थ और नियम
अक्षत यानी बिना टूटे चावल. ये पूर्णता और समृद्धि का प्रतीक हैं. चावल साफ और सूखे हों. चंदन मिले अक्षत भी अर्पित किए जा सकते हैं.
भस्म का आध्यात्मिक संकेत
भस्म महाकाल शिव का मुख्य श्रृंगार है. यह जीवन की नश्वरता का संदेश देती है. उज्जैन के महाकाल मंदिर की भस्म आरती इसका प्रमुख उदाहरण है. पूजा में थोड़ी भस्म अर्पित कर सकते हैं.
इस क्रम से करें पूजा
- सबसे पहले शुद्ध जल से अभिषेक करें. जल धीरे-धीरे और श्रद्धा से चढ़ाएं, जल्दबाजी न करें.
- फिर पंचामृत से स्नान कराएं. पंचामृत अर्पित करते समय मन में शिव मंत्र का जाप करते रहें.
- इसके बाद जल से शुद्धि करें. चंदन लगाएं. चंदन का तिलक हल्के हाथ से करें और शांति की भावना रखें.
- बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें. प्रत्येक वस्तु चढ़ाते समय अपनी मनोकामना स्पष्ट रूप से प्रार्थना में रखें.
- अंत में धूप, दीप और आरती करें. आरती के समय पूरा परिवार साथ हो तो पूजा का फल और बढ़ता है.
- जल चढ़ाते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें. दिशा का सही ध्यान रखने से पूजा अधिक शुभ मानी जाती है.
- साथ ही, जलाधारी की दिशा का ध्यान भी अवश्य रखें. जल इस तरह चढ़ाएं कि वह शिवलिंग के चारों ओर सम्मानपूर्वक प्रवाहित हो.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.