Kuber Dev Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: कुबेर देव को धन का देवता माना जाता है. धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना से धन-धान्य में वृद्धि होती है और आर्थिक संकट दूर होता है. कुबेर देव की पूजा करने से दरिद्रता को दूर कर आप धन लाभ पा सकते हैं. कुबेर देव की पूजा करने के लिए सुबह स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें. कुबेर देव को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन, धूप, फूल, दीप, नैवेद्य और भोग लगाएं. इसके बाद कुबेर देव की आरती करें.
कुबेर देव की आरती (Kuber Dev Ji Aarti Lyrics)
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के, भंडार कुबेर भरे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनि मंगल गावैं, सब जय जयकार करैं॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kuber Dev Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi: कुबेर देव को धन का देवता माना जाता है. धन के देवता कुबेर की पूजा-अर्चना से धन-धान्य में वृद्धि होती है और आर्थिक संकट दूर होता है. कुबेर देव की पूजा करने से दरिद्रता को दूर कर आप धन लाभ पा सकते हैं. कुबेर देव की पूजा करने के लिए सुबह स्नान आदि कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा स्थल को साफ कर कुबेर देव की प्रतिमा स्थापित करें. कुबेर देव को पंचामृत से स्नान कराएं और चंदन, धूप, फूल, दीप, नैवेद्य और भोग लगाएं. इसके बाद कुबेर देव की आरती करें.
कुबेर देव की आरती (Kuber Dev Ji Aarti Lyrics)
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के, भंडार कुबेर भरे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से, कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे, सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनि मंगल गावैं, सब जय जयकार करैं॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
गदा त्रिशूल हाथ में, शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन, धनुष टंकार करे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं, साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे, स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी, मनवांछित फल पावे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे ॥
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
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