Krishna Janmashtami 2026: भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है. इस साल 4 सितंबर को जन्माष्टमी मनाई जा रही है. इस दिन भक्त व्रत रखते हैं और कृष्ण जी की पूजा-अर्चना करते हैं. कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व कृष्ण जी के जन्म से जुड़ा उत्सव है. इस दिन मंदिरों में कृष्ण लीलाओं का मंचन किया जाता है. आपको कृष्ण जी के जन्म से जुड़ी कथा के बारे में बताते हैं.
मथुरा के कारागार में हुआ था जन्म
मथुरा के कारागार में वासुदेव की पत्नी देवकी के गर्भ से भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. भगवान श्रीकृष्ण के माता-पिता को उनके मामा कंस ने कारागार में डाल दिया था. दरअसल, द्वापर युग में मथुरा में भोजवंशी राजा उग्रसेन का राज था. उनके पुत्र कंस ने पिता को गंदी से उतार दिया और खुद मथुरा का राजा बन गया. कंस की बहन देवकी थी. वह बहन की शादी के बाद उसे ससुराल पहुंचाने के लिए जा रहा था. उस समय आकाशवाणी हुई.
आकाशवाणी से आवाज आई कि, हे कंस, जिस देवकी को तू प्रेम से ले जा रहा है, उसी में तेरा काल बसा है. इसी के गर्भ से पैदा आठवां बालक तेरा वध करेगा. इस आकाशवाणी के बाद कंस डर गया. उसने देवकी और वासुदेव को कारागार में बंदी बना लिया. कंस ने वासुदेव और देवकी की सभी सात संतानों को मार दिया. इसके बाद आठवीं संतान श्रीकृष्ण हुए.
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श्रीकृष्ण ऐसे पहुंचे नंदगांव
भगवान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी के गर्भ से हुआ, उसी समय नंदगांव में नंद की पत्नी यशोदा के घर बेटी का जन्म हुआ. श्रीकृष्ण के जन्म के समय अचानक प्रकाश हुआ और उनके समक्ष भगवान प्रकट हुए. उन्होंने कहा कि, अपने पुत्र को वृंदावन में नंद जी के यहां भेज आओ. वहां से पुत्री को लाकर कंस के हवाले कर दो. इसके बाद ऐसा चमत्कार हुआ कि, सभी ताले खुल गए और पहरेदार सो गए. वासुदेव जी श्रीकृष्ण को सूप में रखकर कारागार से निकले और यमुना पार कर नंदजी के घर पहुंचे. उन्हेंने श्रीकृष्ण को वहां छोड़ दिया और जन्मी कन्या को अपने साथ मथुरा ले आए.
जब कंस ने करना चाहा नवजात कन्या का वध
श्रीकृष्ण के नंदगांव पहुंचने और कन्या के मथुरा कारागार में आने के बाद कंस को देवकी के आठवीं संतान होने के बारे में पता लगा. इसके बाद जब कंस ने कन्या का वध करना चाहा, तो वह कन्या हाथ से छूटकर आकाश में उड़ गई. यशोदा जी की पुत्री यह कन्या योगमाया का अवतार थी. उन्होंने प्रकट होकर कहा मूर्ख, मुझे मारने से क्या होगा? तुझे मारने वाला वृंदावन जा पहुंचा है. इस प्रकार से श्रीकृष्ण मथुरा के कारागार में जन्म लेने के बाद वृंदावन में नंदगांव पहुंचे थे.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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