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Kalashtami 2026 Date: 10 या 11 जनवरी, कब है साल का पहला कालाष्टमी व्रत, जानें कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा-मुहूर्त

Kalashtami 2026 Date: कालाष्टमी भगवान कालभैरव को समर्पित महत्वपूर्ण व्रत है. 2026 की पहली कालाष्टमी 10 या 11 जनवरी, कब है, इसे लेकर कन्फ्यूजन है? आइए जानते हैं, किस दिन व्रत रखना फलदायी होगा और कालसर्प दोष, शनि और राहु से मुक्ति के लिए सही पूजा मुहूर्त क्या है?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 6, 2026 15:36
Kalashtami-2026-Date

Kalashtami 2026 Date: कालाष्टमी भगवान शिव के उग्र स्वरूप कालभैरव को समर्पित विशेष व्रत है. यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधि से पूजा करने पर भय, बाधा और नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं. आइए जानते हैं, वर्ष 2026 की पहली कालाष्टमी कब है और कालसर्प दोष सहित शनि और राहु के बुरे प्रभावों को कम करने के लिए पूजा का मुहूर्त क्या है?

2026 की पहली कालाष्टमी की सही तिथि

पंचांग के अनुसार माघ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ 10 जनवरी 2026, शनिवार को सुबह 08:23 बजे से होगा. यह तिथि 11 जनवरी, रविवार को सुबह 10:20 बजे समाप्त होगी. कालाष्टमी में उदयातिथि का नियम नहीं माना जाता है, क्योंकि यह पूजा रात में होती है. इसी कारण वर्ष 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी को ही रखी जाएगी.

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कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

कालाष्टमी पर कालभैरव की पूजा की जाती है. कालभैरव को समय और न्याय का प्रतीक माना जाता है. भक्तों की धारणा है कि उनकी आराधना से भय, शत्रु बाधा और नकारात्मक ऊर्जा से राहत मिलती है. यह व्रत मानसिक शांति और आत्मबल को मजबूत करने वाला माना जाता है.

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शनि, राहु और कालसर्प दोष में लाभ

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी का व्रत शनि और राहु के प्रभाव को संतुलित करने में सहायक होता है. जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, वे इस दिन विशेष पूजा करते हैं. नियमित रूप से कालाष्टमी का व्रत करने से जीवन में स्थिरता और संतुलन आता है.

पूजा का श्रेष्ठ मुहूर्त

कालाष्टमी की पूजा रात में करना श्रेष्ठ माना जाता है. इस समय को निशिता काल कहा जाता है. 10 जनवरी की रात निशिता काल 12:02 बजे से 12:56 बजे तक है (इसकी तारीख 11 जनवरी होगी). इसी अवधि में कालभैरव की आराधना करने से पूजा का फल अधिक प्रभावी माना जाता है.

सरल पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. घर के पूजा स्थान में दीपक जलाएं या मंदिर जाएं. कालभैरव का स्मरण करें. रुद्राक्ष माला से “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जाप करें. धूप, दीप, पुष्प और फल अर्पित करें. इस दिन उपवास रखा जाता है और रात्रि जागरण का भी महत्व बताया गया है. (स्मरण रहे कि घर में भगवान कालभैरव का चित्र या मूर्ति नहीं रखा जाता है.)

कुत्ते को भोजन कराना है शुभ

कालभैरव का वाहन कुत्ता माना जाता है. इसलिए इस दिन काले कुत्ते को भोजन कराना शुभ माना जाता है. कुछ परंपराओं में भगवान भैरव को विशेष भोग अर्पित करने की मान्यता भी मिलती है. आपको बता दें कि श्रद्धा और नियम के साथ की गई साधना से जीवन की नकारात्मकता कम होती है और आत्मविश्वास बढ़ता है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 06, 2026 03:36 PM

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