Kaalchakra: पितरों को खुश करने के लिए सर्वपितृ अमावस्या पर राशि अनुसार करें ये उपाय, जानें पंडित सुरेश पांडेय से

Kaalchakra Today: साल 2025 में 21 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन हो जाएगा. चलिए प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय से जानते हैं सर्वपितृ अमावस्या पर किन मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है. साथ ही आपको इस अमावस्या के महत्व और उपायों के बारे में पता चलेगा.

Kaalchakra Today 20 September 2025

Credit- News24 Graphics

Kaalchakra Today 20 September 2025: पितृपक्ष चल रहा है, जिसका समापन 21 सितंबर 2025 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा. धार्मिक और ज्योतिष दोनों के लिहाज से ये दिन खास है क्योंकि इस दिन पितृपक्ष खत्म हो रहा है, साथ ही सूर्य ग्रहण लग रहा है. सर्वपितृ अमावस्या पर परिवार के उन मृतक सदस्यों का श्राद्ध किया जाता है, जिनकी मृत्यु अमावस्या तिथि, पूर्णिमा तिथि या चतुर्दशी तिथि पर हुई हो. यदि किसी व्यक्ति ने पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध नहीं किया है तो वो इस दिन श्राद्ध कर सकता है. वहीं, जिन्हें पूर्वजों की पुण्यतिथि पता नहीं है, वो भी इस तिथि पर श्राद्ध कर सकते हैं. अमावस्या तिथि पर किया गया श्राद्ध, कुल के सभी पूर्वजों की आत्माओं को प्रसन्न करने के लिए पर्याप्त है। श्राद्ध के अलावा इस दिन कुछ उपायों को करके भी पितरों को खुश किया जा सकता है.

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आज के कालचक्र में प्रश्न कुंडली विशेषज्ञ पंडित सुरेश पांडेय आपको सर्वपितृ अमावस्या पर पितरों को खुश व पितृ दोष से मुक्ति पाने के मेष से लेकर मीन राशिवालों द्वारा करने वाले सिद्ध उपायों के बारे में बताने जा रहे हैं.

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सर्वपितृ अमावस्या की तिथि और श्राद्ध मुहूर्त

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार 21 सितंबर 2025 की सुबह 12 बजकर 16 मिनट से लेकर 22 सितंबर की सुबह 1 बजकर 23 मिनट तक सर्वपितृ की अमावस्या तिथि रहेगी. ऐसे में 21 सितंबर 2025, वार रविवार को सर्वपितृ अमावस्या मनाई जाएगी. इस दिन दोपहर 12 बजकर 8 मिनट से लेकर दोपहर 4 बजकर 11 मिनट तक श्राद्ध पूजा का शुभ मुहूर्त है.

सर्वपितृ अमावस्या के सिद्ध उपाय

  • मेष राशि

पितरों की कृपा पाने के लिए पीपल के पेड़ की 108 बार परिक्रमा करें. नंगे पैर शिव मंदिर जाएं. पितरों के नाम पर दूध की खीर का दान करें. साथ ही किताबें और दवाइयां जरूरतमंद लोगों को दें. इस उपाय से आपको लाभ जरूर होगा.

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  • वृषभ राशि

अमावस्या के दिन नंगे पैर शिव मंदिर जाएं. वहां जतक शिवलिंग पर आक के 21 फूल, कच्ची लस्सी और बेल पत्र चढ़ाएं. इसके बाद पीपल के पेड़ पर जनेई चढ़ाएं. साथ ही पीपल की जड़ में पानी, गंगाजल, काले तिल, चीनी और चावल मिलाकर डालें. फिर पिंड दान और ब्राह्मणों को भोजन कराएं. गाय व कौवे के लिए खाने की व्यवस्था करें, फिर घर आकर भोजन करें. इस उपाय से आपको जरूर लाभ होगा.

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यदि आप अन्य 10 राशियों द्वारा सर्वपितृ अमावस्या पर राशि अनुसार करने वाले उपायों के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देख सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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