Durva Vinayak Chaturthi 2026: दूर्वा गणेश चतुर्थी का पर्व आज 16 अगस्त को है. चतुर्थी तिथि 15 अगस्त की शाम को 5 बजकर 28 मिनट से लेकर 16 अगस्त की शाम को 4 बजकर 42 मिनट तक रहेगी. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए. यह पर्व 16 अगस्त को है. इस दिन गणेश जी की पूजा से जीवन में चल रहे सभी संकटों का अंत होगा. आइये दूर्वा गणेश चतुर्थी के शुभ मुहूर्त और पूजा विधि के बारे में जानते हैं.
दूर्वा गणेश चतुर्थी शुभ मुहूर्त (Durva Vinayak Chaturthi Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त – 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
प्रातः सन्ध्या – 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
अभिजित मुहूर्त – 11:59 ए एम से 12:51 पी एम
विजय मुहूर्त – 02:37 पी एम से 03:29 पी एम
गोधूलि मुहूर्त – 07:00 पी एम से 07:21 पी एम
सायाह्न सन्ध्या – 07:00 पी एम से 08:05 पी एम
अमृत काल – 09:44 पी एम से 11:22 पी एम
निशिता मुहूर्त – 12:04 ए एम से 12:47 ए एम, 17 अगस्त
सर्वार्थ सिद्धि योग – 05:51 ए एम से 03:50 ए एम, 17 अगस्त
अमृत सिद्धि योग – 05:51 ए एम से 03:50 ए एम, अगस्त 17
रवि योग – 03:50 ए एम से 05:51 ए एम, 17 अगस्त
आज के सभी शुभ मुहूर्त और शुभ योग आप यहां देख सकते हैं. इसके अनुसार, आप पूजा कर सकते हैं. आइये अब दूर्वा गणेश चतुर्थी की पूजा विधि के बारे में जानते हैं.
दूर्वा गणेश चतुर्थी पूजा विधि (Durva Vinayak Chaturthi Puja Vidhi)
आप सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. एक लकड़ी की चौकी लगाकर उसके ऊपर लाल कपड़ा बिछाएं. भगवान गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. गणेश जी की प्रतिमा के समक्ष धूप और दीप जलाएं. गणेश जी को फूल, फूल माला, तिलक आदि अर्पित करें. इसके बाद गणपति बप्पा को दूर्वा, शुद्ध घी, मोदक और लड्डू जरूर चढ़ाएं. गणेश जी की पूजा करें और आरती करें.
गणेश जी पूजा मंत्र (Ganesh Ji Puja Mantra)
ॐ गं गणपतये नमः
ॐ वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।
ॐ शुक्लाम्बरधरं देवं शशिवर्णं चतुर्भुजम्।
प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि।
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.