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Kaalchakra: मांगलिक-पितृ समेत ये कष्टकारी दोष नहीं जाने देते दरिद्रता, पंडित सुरेश पांडेय से जानें उपाय
Kaalchakra Today: कई बार कुंडली में ग्रहों की खराब स्थिति व दोष के कारण व्यक्ति जीवनभर परेशान रहता है. वहीं, अगर सही समय पर इनके बारे में पता चल जाता है तो कुछ उपायों को करके बचा भी जा सकता है. आज पंडित सुरेश पांडेय आपको मांगलिक दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि के प्रभाव और उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे.
Kaalchakra Today 16 December 2025: आज के समय में ज्यादातर लोग किसी न किसी कारण से परेशान हैं. अगर आप भी किसी चीज से बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं तो क्या कभी आपने उसके पीछे की वजह जानने का प्रयास किया है? दरअसल, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई बार व्यक्ति को कुंडली में मौजूद ग्रहों की खराब स्थिति व दोष के कारण विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे कि मांगलिक दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि. इन सभी दोषों का अपना महत्व है और जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर प्रभाव पड़ता है. हालांकि, कुछ उपायों को नियमित करके इन दोषों से बचा जा सकता है.
आज के कालचक्र में पंडित सुरेश पांडेय आपको मांगलिक दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि के प्रभाव और उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे.
मांगलिक दोष
कुंडली में मंगल लग्न चौथे, 7वें, 8वें या 12वें भाव में हो तो मांगलिक दोष बनाता है.
उपाय-
रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें.
सोने में मंगल मूंगा धारण करें. इससे मंगल दोष का प्रभाव कम होगा.
घर में मंगल यंत्र की स्थापना करके रोजाना उसकी पूजा करें.
घर की दक्षिण दिशा में सोने का प्रयास करें.
मंगलवार को गुड़ और भुने हुए चने बंदर या गाय को खिलाएं.
भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करें.
मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने बैठकर मंगल चंडिका श्लोक का पाठ करें.
पक्षियों को दाना डालें और नवग्रह मंदिर जाएं.
शिवलिंग का भात पूजन करें.
सावधानी-
क्रोध पर काबू रखें.
चरित्रहीन न बनें.
मांस-मदिरा का सेवन न करें.
पितृ दोष
कुंडली में बृहस्पति और राहु छठे, आठवें और 12वें स्थान पर है तो पितृ दोष लगता है. सूर्य और चंद्रमा राहु-केतु के साथ हों तो भी यह दोष लगता है.
उपाय-
हनुमान चालीसा का रोजाना पाठ करें.
मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल का दान करें.
नियमित रूप से हनुमान जी, भगवान कार्तिकेय और नृसिंह की पूजा करें.
मछलियों को दाना डालें.
पितरों के नाम से मंदिर, धर्मशाला, तीर्थस्थल, धर्मस्थल, चिकित्सालय या निशुल्क सेवा की कोई व्यवस्था करें.
रोजाना सरसों के तेल के दीपक के साथ सर्प सूक्त या नव नगसूत्र का पाठ करें.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओंपर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
Kaalchakra Today 16 December 2025: आज के समय में ज्यादातर लोग किसी न किसी कारण से परेशान हैं. अगर आप भी किसी चीज से बहुत ज्यादा परेशान हो गए हैं तो क्या कभी आपने उसके पीछे की वजह जानने का प्रयास किया है? दरअसल, हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि कई बार व्यक्ति को कुंडली में मौजूद ग्रहों की खराब स्थिति व दोष के कारण विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ता है. जैसे कि मांगलिक दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि. इन सभी दोषों का अपना महत्व है और जीवन के अलग-अलग पहलुओं पर प्रभाव पड़ता है. हालांकि, कुछ उपायों को नियमित करके इन दोषों से बचा जा सकता है.
आज के कालचक्र में पंडित सुरेश पांडेय आपको मांगलिक दोष, पितृ दोष, गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि के प्रभाव और उपायों के बारे में विस्तार से बताएंगे.
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मांगलिक दोष
कुंडली में मंगल लग्न चौथे, 7वें, 8वें या 12वें भाव में हो तो मांगलिक दोष बनाता है.
उपाय-
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रोजाना हनुमान चालीसा का पाठ करें.
सोने में मंगल मूंगा धारण करें. इससे मंगल दोष का प्रभाव कम होगा.
घर में मंगल यंत्र की स्थापना करके रोजाना उसकी पूजा करें.
घर की दक्षिण दिशा में सोने का प्रयास करें.
मंगलवार को गुड़ और भुने हुए चने बंदर या गाय को खिलाएं.
भगवान गणेश की नियमित रूप से पूजा करें.
मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने बैठकर मंगल चंडिका श्लोक का पाठ करें.
पक्षियों को दाना डालें और नवग्रह मंदिर जाएं.
शिवलिंग का भात पूजन करें.
सावधानी-
क्रोध पर काबू रखें.
चरित्रहीन न बनें.
मांस-मदिरा का सेवन न करें.
पितृ दोष
कुंडली में बृहस्पति और राहु छठे, आठवें और 12वें स्थान पर है तो पितृ दोष लगता है. सूर्य और चंद्रमा राहु-केतु के साथ हों तो भी यह दोष लगता है.
उपाय-
हनुमान चालीसा का रोजाना पाठ करें.
मंगलवार के दिन लाल मसूर की दाल का दान करें.
नियमित रूप से हनुमान जी, भगवान कार्तिकेय और नृसिंह की पूजा करें.
मछलियों को दाना डालें.
पितरों के नाम से मंदिर, धर्मशाला, तीर्थस्थल, धर्मस्थल, चिकित्सालय या निशुल्क सेवा की कोई व्यवस्था करें.
रोजाना सरसों के तेल के दीपक के साथ सर्प सूक्त या नव नगसूत्र का पाठ करें.
गले में अष्टमुखी रुद्राक्ष को धारण करें.
यदि आप गुरु चांडाल दोष और विष दोष आदि कष्टकारी दोषों के बारे में जानना चाहते हैं तो उसके लिए ऊपर दिए गए वीडियो को देखें.