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Holashtak 2026: आज 24 फरवरी से हुई अशुभ होलाष्टक की शुरुआत, होलिका दहन तक न करें ये काम

Holashtak 2026 Niyam: आज 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन होगा. यहां पर आप जान सकते हैं कि होलाष्टक के 8 दिनों को क्यों अशुभ माना जाता है और इस दौरान कौन-कौन से कामों को करने से बचना चाहिए.

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Written By: Nidhi Jain Updated: Feb 24, 2026 08:33
Holashtak 2026 Niyam
Credit- Social Media

Holashtak 2026 Niyam: होलाष्टक के 8 दिनों को अशुभ माना जाता है, जिसकी शुरुआत फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से होती है. वहीं, समापन होलिका दहन के दिन होता है. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार आज 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक की शुरुआत हो गई है, जिसका समापन 3 मार्च 2026 को होलिका दहन के दिन होगा. इन 8 दिनों को मानसिक संयम और साधना का समय माना जाता है, जिस दौरान पूजा, जाप और दान करने से महालाभ होता है.

हालांकि, होलाष्टक में कुछ कामों को करने की मनाही भी होती है, अन्यथा व्यक्ति को महापाप लग सकता है. चलिए जानते हैं होलाष्टक में कौन-से कामों को करने से बचना चाहिए.

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होलाष्टक में क्या नहीं करना चाहिए? (holashtak me kya nahi karna chahiye)

  • शादी, सगाई, मुंडन, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्यक्रम नहीं करने चाहिए.
  • नया घर, वाहन या कीमती चीज की खरीदारी न करें.
  • नए काम की शुरुआत न करें.
  • नई जगह पर जॉब ज्वाइन न करें.
  • नाखून, दाढ़ी, बाल और मूंछ काटने से बचें.
  • ब्रह्मचर्य के नियम को न तोड़ें.
  • तामसिक भोजन खाने से बचें.
  • गलत संगत से दूर रहें.
  • धन का बड़ा निवेश न करें.
  • लंबी दूरी की यात्रा न करें.
  • बाल धोने से बचें.
  • लड़ाई-झगड़े से दूर रहें.
  • नकारात्मक चीजों को अपने ऊपर हावी न होने दें.

ये भी पढ़ें- Holika Dahan 2026 Niyam: होलिका दहन का प्रसाद क्या है? जानें घर लाएं या नहीं

होलाष्टक को क्यों माना जाता है अशुभ? (holashtak kyu ashubh hota hai)

होलाष्टक को अशुभ मानने के पीछे 2 कथाएं प्रचलित हैं.

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पहली कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार, राजा हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद विष्णु जी का परम भक्त था, जबकि उनके पिता विष्णु जी के विरोधी थे. हिरण्यकश्यप ने कई बार प्रह्लाद को समझाया कि वो विष्णु जी की पूजा न करें, लेकिन दिन-प्रतिदिन प्रह्लाद के मन में विष्णु जी का स्थान बढ़ता जा रहा था. वो हर समय विष्णु जी की भक्ति में लीन रहता था.

ये देख राजा हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका के साथ मिलकर प्रह्लाद को कष्ट देने की योजना बनाई. दोनों ने मिलकर प्रह्लाद को 8 दिन तक कड़ी यातनाएं दीं. यातनाओं के बाद भी जब प्रह्लाद का विष्णु जी के प्रति विश्वास कम नहीं हुआ तो होलिका प्रह्लाद को लेकर जलती हुई आग में बैठ गई. इस दौरान प्रह्लाद निरंतर विष्णु जी का स्मरण करते हुए जाप कर रहा था, जबकि होलिका अग्नि में जलकर मर गई. इसी वजह से इन 8 दिनों को अशुभ माना जाता है.

दूसरी कथा-

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक समय था, जब भगवान शिव कड़ी तपस्या कर रहे थे. इस बीच देवताओं के आग्रह पर कामदेव ने उनकी तपस्या को भंग कर दिया, जिससे क्रोधित होकर शिव ने उन्हें भस्म कर दिया. इसके बाद कामदेव की पत्नी रति ने शिव जी की पूजा की और उनसे अपने पति के लिए पुनर्जीवन का वरदान प्राप्त किया. इसी वजह से इस समय को तप, संयम और पूजा-पाठ करने का प्रतीक माना जाता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 24, 2026 08:05 AM

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