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Ganesh Puja: हर कार्य में प्रथम पूज्य क्यों हैं भगवान गणेश? जानें धार्मिक मान्यता और पौराणिक कथा

Ganesh Puja Mahatva: हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश जी की पूजा की जाती है. गणेश जी को प्रथम पूज्य माना जाता है. गणेश जी की पूजा के बिना कोई भी धार्मिक कार्य आरंभ नहीं किया जाता है.

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Ganesh Puja Mahatva: किसी भी धार्मिक कार्यक्रम, पूजा, अनुष्ठान, गृह प्रवेश, विवाह और व्यापार की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा अर्चना की जाती है. भगवान गणेश को हिंदू धर्म में सर्व प्रथम पूजनीय माना जाता है. ऐसी मान्यता है कि, गणेश जी की पूजा के बिना किसी कार्य की शुरुआत करने पर बाधा और परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. वहीं गणेश जी की पूजा के साथ कार्य शुरू करने पर कार्य में कोई विघ्न नहीं आता है.

गणेश जी प्रथम पूजा क्यों? जानें धार्मिक मान्यता

गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि, भगवान गणेश जी को विघ्नहर्ता माना जाता है. गणेश जी की पूजा करने से कोई भी काम बिना विघ्न के पूरा होता है. गणेश जी को बुद्धि, ज्ञान और विवेक का प्रतीक माना जाता है. उनकी पूजा से कार्य शुरू करने से हर कार्य बिना बाधाओं के संपन्न होता है.

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गणेश जी प्रथम पूजा क्यों? जानें पौराणिक कथा

गणेश जी की पूजा सबसे पहले क्यों की जाती है इसको लेकर एक पौराणिक मान्यता है. गणेश पुराण में इसके बारे में बताया गया है. एक बार सभी देवताओं में इसको लेकर विवाद हुआ कि, सबसे पहले किसकी पूजा होगी. भगवान शिव ने इसका फैसला करने के लिए प्रतियोगिता रखी. जो सबसे पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा करके आएगा, वही प्रथम पूज्य माना जाएगा. इसके बाद सभी देवता अपने-अपने वाहन पर निकल गए. गणेश जी ने माता पार्वती और भगवान शिव की परिक्रमा की और बताया कि, उनके लिए उनके माता-पिता ही ब्रह्मांड हैं. शिव जी ने गणेश जी की बुद्धि और भक्ति को देख उन्हें सर्व प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया.

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गणेश जी पूजा विधि

गणेश जी की पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर साफ वस्त्र पहनें. इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और चौकी लगाकर लाल कपड़ा बिछाएं. गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें. चंदन और सिंदूर से तिलक लगाएं. धूप, दीप, फल, फूल अर्पित करें. गणेश जी को मोदक और लड्डू को भोग लगाएं और मंत्रों का जाप कर आरती करें.

गणेश जी पूजा मंत्र

कार्य की शुरुआत के लिए मंत्र

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ॐ गं गणपतये नमः

कार्यों को निर्विघ्न पूरा करने के लिए मंत्र

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वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गणेश जी का गायत्री मंत्र

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“एकदन्ताय विहे वक्रतुण्डाय धीमहि। तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥”

समर्पण मंत्र (पूजा के अंत में)

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“अनेया पूजया सिद्धि-बुद्धि-सहितः श्रीमहागणपतिः साङ्गः परिवारः प्रीयताम्”

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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First published on: Dec 23, 2025 09:08 AM

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