Dwapar Yug: आज के दिन शुरू हुआ था द्वापर युग, 8 लाख 64 हजार साल तक चला ये काल, जानें चौंकाने वाली सच्चाई

Dwapar Yug: द्वापर युग, हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान का तीसरा युग है, हो कलियुग से पहले शुरू हुआ. यह युग 8,64,000 वर्षों तक चला था. आइए जानते हैं, महाभारत युद्ध और भगवान श्रीकृष्ण के अवतार का साक्षी रहे इस युग की विशेषताएं.

Dwapar-Yug

Dwapar Yug: हिंदू ब्रह्मांड विज्ञान के अनुसार द्वापर युग चार युगों का तीसरा युग है. यह सतयुग और त्रेतायुग के बाद और कलियुग से पहले आता है. शास्त्रों के अनुसार इसकी अवधि 8,64,000 वर्ष मानी गई है यानी लगभग ढाई हजार दिव्य वर्ष. कहते हैं, इस युग में धर्म और अधर्म का संतुलन लगभग 50-50 यानी आधा-आधा था. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार द्वापर युग फाल्गुन कृष्ण अमावस्या तिथि को शुरू हुआ माना जाता है. इस साल यह तिथि आज मंगलवार 17 फरवरी, 2026 को पद रही है. इस युग का अंत महाभारत युद्ध के बाद भगवान श्रीकृष्ण मृत्यु के साथ हुआ. इसके बाद ही कलियुग प्रारंभ हुआ.

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इतनी थी मनुष्य की उम्र

ग्रंथों में द्वापर युग में मनुष्य की औसत आयु लगभग 1000 वर्ष मानी गई. कद भी अत्यधिक बड़ा था- लगभग 11 फीट यानी 7 हाथ. कुछ ग्रंथों में इसे 14 फीट तक भी दर्शाया गया है. यह विवरण पौराणिक और चौंकाने वाला है, लेकिन इसे उस समय की जीवन शैली और समाज की शक्ति का प्रतीक माना जाता है.

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मूर्ति पूजा का चलन बढ़ा

इस युग में लोग वेदों और शास्त्रों के ज्ञाता थे. पर धर्म के चार स्तंभों में से केवल सत्य और दया शेष रहे. यज्ञ किए जाते थे, पर अधिकतर भौतिक लाभ और यश के लिए. इसी दौर में देव प्रतिमा की पूजा का चलन बढ़ा. त्रेतायुग के बड़े यज्ञों की जगह प्रतिमाओं और मंदिरों में पूजा प्रमुख हो गई.

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गाय और धार्मिक प्रतीक

पुराणों के अनुसार धर्म को गाय के रूप में देखा जाता है. द्वापर युग में गायों की स्थिति अच्छी थी, पर सतयुग और त्रेतायुग की तुलना में उनकी सुरक्षा और महत्व थोड़ी कम हुआ. कथाओं के अनुसार पृथ्वी ने अधर्मी राजाओं के विनाश की प्रार्थना करने के लिए गाय का रूप धारण किया.

इस युग के प्रमुख अवतार

द्वापर युग में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण और बलराम के रूप में अवतार लिया. इसी काल में महर्षि वेदव्यास ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया. युग के अंत में महाभारत का युद्ध हुआ, जिसका केंद्र कुरुक्षेत्र रहा. इसके साथ ही, कुरुक्षेत्र द्वापर में प्रमुख तीर्थ भी था.

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द्वापर युगादि दिवस का महत्व

हिंदू धर्म में द्वापर युगादि दिवस विशेष माना जाता है. इस दिन जप, तप, स्नान और दान करने से अक्षय फल प्राप्त होता है. यह दिन हमें उस समय की याद दिलाता है, जब ज्ञान और शक्ति के बीच संतुलन था, और संघर्ष भी उतना ही वास्तविक था.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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