Hariyali Amavasya 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, अमावस्या का दिन गंगा स्नान-दान, पितृ-तर्पण और पूजा-अर्चना के लिए बेहद खास होती है. अमावस्या तिथि का खास धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है. इस समय सावन का महीना चल रहा है. अब सावन महीने की अमावस्या आने वाली है. सावन अमावस्या को हरियाली अमावस्या के नाम से जानते हैं. आइये हरियाली अमावस्या की तारीख, शुभ मुहूर्त और महत्व के बारे में जानते हैं.
कब है हरियाली अमावस्या? (Hariyali Amavasya Kab Hai)
सावन माह की अमावस्या तिथि का आरंभ 11 और 12 अगस्त की मध्यरात्रि को 1 बजकर 52 मिनट पर होगा. इसका समापन 12 अगस्त की रात को 11 बजकर 6 मिनट पर होगा. ऐसे में उदयातिथि को महत्व देते हुए द्रिक पंचांग के अनुसार, हरियाली अमावस्या का पर्व 12 अगस्त को मनाया जाएगा. इस दिन हरियाली अमावस्या का व्रत रख सकते हैं.
हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त (Hariyali Amavasya Shubh Muhurat)
ब्रह्म मुहूर्त- 04:23 ए एम से 05:06 ए एम
प्रातः सन्ध्या- 04:44 ए एम से 05:49 ए एम
विजय मुहूर्त- 02:38 पी एम से 03:31 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 07:03 पी एम से 07:25 पी एम
सायाह्न सन्ध्या- 07:03 पी एम से 08:08 पी एम
अमृत काल- 04:38 ए एम से 06:06 ए एम, 13 अगस्त
निशिता मुहूर्त- 12:05 ए एम से 12:48 ए एम, 13 अगस्त
हरियाली अमावस्या का महत्व (Hariyali Amavasya Significance)
हरियाली अमावस्या सावन महीने में आती है. ऐसे में यह भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए खास होती है. सावन महीने में बारिश की वजह से चारों तरफ हरियाली होती है. मानसून की वजह से चारों तरफ नए पौधे और घास उग जाने से वातावरण हरा-भरा हो जाता है. इसी कारण इसे हरियाली अमावस्या कहते हैं. हरियाली अमावस्या का दिन पितृ तर्पण, पिंडदान, गंगा नदी में स्नान करने और दान-धर्म के काम करने के लिए खास होता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.