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Vaishakh Purnima 2025: वैशाख पूर्णिमा पर करें ये 5 उपाय, प्रसन्न होंगे पितर; घर-परिवार की बरकत होगी तेज

वैशाख पूर्णिमा एक अत्यंत शुभ दिन है, जिसे थोड़े से प्रयासों और श्रद्धा से बेहद फलदायी बनाया जा सकता है। यहां 5 ऐसे उपाय बताए गए हैं, जिसे पूरी आस्था और निष्ठा से करने से न केवल पितरों की कृपा मिलती है बल्कि घर-परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और स्वास्थ्य भी बना रहता है। आइए जानते हैं, ये उपाय क्या हैं?

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सनातन धर्म में पूर्णिमा तिथि को बहुत ही शुभ और पवित्र माना गया है। इस दिन चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं के साथ पूर्ण रूप में उदित होता है, जो मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है क्योंकि यह पितरों को प्रसन्न करने और उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति लाने का एक सुनहरा अवसर है। इस वर्ष वैशाख पूर्णिमा 12 मई 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं वे 5 आसान उपाय जिन्हें अपनाकर आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन में खुशहाली ला सकते हैं।

चंद्र देव को अर्घ्य अर्पित करें

वैशाख पूर्णिमा की रात चंद्र देव को दूध या जल में सफेद फूल मिलाकर अर्घ्य देना अत्यंत लाभकारी माना गया है। इससे मानसिक तनाव कम होता है और मन को गहरी शांति प्राप्त होती है। यह उपाय चंद्रमा की कृपा पाने के साथ-साथ पितरों की आत्मा को भी शांति देता है।

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इस दिशा में दीपक जलाएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दक्षिण दिशा पितरों की दिशा होती है। इस दिन घर की दक्षिण दिशा में सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ फल देता है। इससे पितृ दोष का निवारण होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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पितरों की तस्वीर के सामने धूप-दीप जलाएं

यदि आपके पास अपने पूर्वजों और पितरों की तस्वीरें हैं, तो उन्हें साफ-सुथरी जगह पर दक्षिण दिशा में रखें और उनके सामने धूप, दीपक और अगरबत्ती जलाएं। उनके लिए मौन प्रार्थना करें। यह साधारण-सा उपाय पितरों को स्मरण करने का एक माध्यम है, जिससे उनकी कृपा बनी रहती है।

पीपल वृक्ष की पूजा करें

पीपल के वृक्ष में देवताओं और पितरों दोनों का वास माना जाता है। इस दिन दोपहर में पीपल के पेड़ पर जल चढ़ाएं, 7 परिक्रमाएं करें और दीपक में सरसों का तेल और काले तिल डालकर जलाएं। यह उपाय न केवल पितरों को प्रसन्न करता है बल्कि आपके मन और कर्मों का भी शुद्धिकरण करता है।

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छाया दान करें

छाया दान एक विशेष धार्मिक क्रिया है, जिसमें काले कपड़े में सरसों का तेल, लोहे की कटोरी आदि रखकर किसी जरूरतमंद को दान किया जाता है। इसे करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में आर्थिक और मानसिक समृद्धि आती है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: May 10, 2025 07:43 PM

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Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। वे इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं और स्वयं एक प्रगतिशील ज्योतिषविद हैं, जो साल 2015 से धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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