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Buddha Purnima 2025: भगवान बुद्ध की 10 अनमोल शिक्षाएं, इसे अपनाने से बदल जाती है जिंदगी

भगवान बुद्ध का जन्म लगभग 563 ईसा पूर्व वैशाख पूर्णिमा के दिन वर्तमान नेपाल के लुम्बिनी में हुआ था। उनके बचपन का नाम सिद्धार्थ गौतम था। वे बाद में बुद्ध के रूप में जाने गए, जिसका अर्थ है 'जागृत और बुद्धिमान मनुष्य'। भगवान बुध का जन्म दिवस इस वर्ष 12 मई, 2025 को पड़ रहा है। आइए इस मौके पर जानते हैं, उनकी10 अनमोल शिक्षाएं, जिसे अपनाने से जिंदगी बदल जाती है।

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भगवान बुद्ध का वास्तविक नाम सिद्धार्थ गौतम है। वे एक महान आध्यात्मिक और धार्मिक गुरु थे, जिन्होंने बौद्ध धर्म की स्थापना की। उन्होंने हमें दुख के कारण, दुख से मुक्ति पाने का रास्ता और दया-करुणा का महत्व समझाया। बुद्ध की शिक्षाएं बहुत ही सुंदर, प्रभावशाली और जीवन को बदल देने वाली हैं। यही कारण है कि इन शिक्षाओं ने हर युग में लोगों को शांति, समझदारी और सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी है।

भगवान बुद्ध का जन्म वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। यह इस साल 12 मई, 2025 को पड़ रही है। आइए इस पावन अवसर पर जानते हैं, भगवान बुद्ध की कुछ अनमोल शिक्षाएं, जिनके बारे कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति इसे अपनाते हैं, उनकी सोच और जिंदगी बदल जाती है।

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भगवान बुद्ध की शिक्षाएं

1. तीन चीजें ज्यादा समय तक छुपी नहीं रह सकतीं हैं- सूरज, चांद और सत्य।

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2. हजार लड़ाइयां जीतने से बेहतर है कि आप खुद पर विजय प्राप्त करें। क्योंकि यह जीत आपकी अपनी होती है, इसे न तो कोई देवदूत, न राक्षस, न स्वर्ग और न नरक आपसे छीन सकते हैं।

3. स्वास्थ्य सबसे बड़ा उपहार है, संतोष सबसे बड़ी संपत्ति है, एक भरोसेमंद मित्र सबसे अच्छा संबंधी है और निर्वाण यानी आत्मिक शांति सबसे बड़ा आनंद है।

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4. आपके पास जो लोग और जो कुछ पहले से है, यदि आप उसकी कद्र नहीं करते, आपको कभी सच्चा सुख नहीं मिल सकता है।

5. नफरत कभी भी नफरत से खत्म नहीं हो सकती है। नफरत केवल प्रेम से समाप्त होने की चीज है, यह एक अटल नियम है।

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6. आसमान में न कहीं कोई पूर्व होता है और न पश्चिम। ये अंतर और समझ हम लोग अपने मन से बनाते हैं और फिर उन्हें ही सच मान लेते हैं।

7. आपको अपने क्रोध के लिए सजा नहीं मिलेगी, बल्कि आप अपने क्रोध से ही खुद पीड़ित होंगे, वही आपकी सजा है।

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8. प्रत्येक सुबह हम दोबारा जन्म लेते हैं। इसलिए आज हम क्या करते हैं, वही सबसे ज़्यादा मायने रखता है।

9. जब कोई विचार केवल विचार के रूप में रहने की बजाय, उसे कार्यरूप में लाया जाता है, तो वह कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, नहीं तो वह केवल एक आम विचार ही है।

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10. अंत में सबसे ज़रूरी बात यह है कि आपने कितना प्रेम किया? आपने कितनी पूर्णता से जीवन जिया? आपने कितनी गहराई से छोड़ना यानी त्याग करना सीखा है?

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: May 10, 2025 04:35 PM

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About the Author

Shyamnandan

श्यामनंदन पिछले 20 से अधिक वर्षों से पत्रकारिता और कंटेंट क्रिएशन की दुनिया में सक्रिय हैं। वर्तमान में वे News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जहां उनकी कोशिश रहती है कि पाठकों को सटीक, सरल और उपयोगी जानकारी मिल सके। उन्होंने बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से पत्रकारिता की पढ़ाई की है और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से ज्योतिष का सांगोपांग अध्ययन किया है। साल 2015 से वे धर्म और ज्योतिष विषय पर लगातार लिख रहे हैं और इस क्षेत्र में गहरी विशेषज्ञता रखते हैं। धार्मिक परंपराओं, वैदिक ज्योतिष, ग्रह-गोचर, राशिफल, अंक ज्योतिष, वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र, व्रत-त्योहार, पूजा-पद्धति और आध्यात्मिक विषयों को आसान और भरोसेमंद भाषा में पाठकों तक पहुंचाना उनकी पहचान है। डिजिटल मीडिया, SEO और कंटेंट रणनीति की उन्हें गहरी और अच्छी समझ है।

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