हिंदू नववर्ष के साथ ही आज यानी 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो गया है। चैत्र नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा को समर्पित हैं, जिस दौरान देवी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है, जो देवी शैलपुत्री को समर्पित है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने के बाद मां दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर में हुआ था। इसलिए उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता का वाहन बैल है। माता दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से साधकों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली में मौजूद तमाम तरह के दोष से छुटकारा मिलता है।
नवरात्रि में सुबह और दोपहर दोनों समय मां शैलपुत्री की पूजा करना शुभ माना जाता है। यदि किसी कारण आप सुबह मां शैलपुत्री की पूजा नहीं कर पाए हैं, तो अब आप उनकी उपासना कर सकते हैं। चलिए जानते हैं आज दोपहर में मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। साथ ही आपको मां शैलपुत्री की पूजा विधि के बारे में भी पता चलेगा।
मां शैलपुत्री की पूजा के मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:01 मिनट से लेकर 12:50 मिनट तक
- अमृत काल- दोपहर में 02:28 मिनट से लेकर 03:52 मिनट तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर में 02:30 मिनट से लेकर 03:19 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम में 06:37 मिनट से लेकर 07:00 मिनट तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम में 06:38 मिनट से लेकर 07:47 मिनट तक
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मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- मां शैलपुत्री की पूजा करने से पहले स्नान आदि कार्य करने के बाद पीले या सफेद रंग के कपड़े धारण करें।
- घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मां शैलपुत्री को कुमकुम, फल, फूल, अक्षत, पान, सुपारी, लौंग, धूप, दीप और नारियल आदि चीजें चढ़ाएं।
- इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- मां की आरती करें।
- अंत में माता रानी से अपनी गलतियों की माफी मांगे।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
हिंदू नववर्ष के साथ ही आज यानी 30 मार्च 2025 से चैत्र नवरात्रि का आरंभ हो गया है। चैत्र नवरात्रि के 9 दिन मां दुर्गा को समर्पित हैं, जिस दौरान देवी के 9 स्वरूपों की पूजा की जाती है। आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है, जो देवी शैलपुत्री को समर्पित है। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना करने के बाद मां दुर्गा के पहले स्वरूप माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री का जन्म पर्वतराज हिमालय के घर में हुआ था। इसलिए उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है। माता का वाहन बैल है। माता दुर्गा के इस स्वरूप की पूजा करने से साधकों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। साथ ही कुंडली में मौजूद तमाम तरह के दोष से छुटकारा मिलता है।
नवरात्रि में सुबह और दोपहर दोनों समय मां शैलपुत्री की पूजा करना शुभ माना जाता है। यदि किसी कारण आप सुबह मां शैलपुत्री की पूजा नहीं कर पाए हैं, तो अब आप उनकी उपासना कर सकते हैं। चलिए जानते हैं आज दोपहर में मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। साथ ही आपको मां शैलपुत्री की पूजा विधि के बारे में भी पता चलेगा।
मां शैलपुत्री की पूजा के मुहूर्त
- अभिजित मुहूर्त- दोपहर में 12:01 मिनट से लेकर 12:50 मिनट तक
- अमृत काल- दोपहर में 02:28 मिनट से लेकर 03:52 मिनट तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर में 02:30 मिनट से लेकर 03:19 मिनट तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम में 06:37 मिनट से लेकर 07:00 मिनट तक
- सायाह्न सन्ध्या: शाम में 06:38 मिनट से लेकर 07:47 मिनट तक
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मां शैलपुत्री की पूजा विधि
- मां शैलपुत्री की पूजा करने से पहले स्नान आदि कार्य करने के बाद पीले या सफेद रंग के कपड़े धारण करें।
- घर के मंदिर को गंगाजल से शुद्ध करें।
- मां शैलपुत्री को कुमकुम, फल, फूल, अक्षत, पान, सुपारी, लौंग, धूप, दीप और नारियल आदि चीजें चढ़ाएं।
- इस दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।
- मां की आरती करें।
- अंत में माता रानी से अपनी गलतियों की माफी मांगे।
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।