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Religion

Baisakhi 2026: 13 या 14 अप्रैल, कब मनाया जाएगा बैसाखी पर्व? एक क्लिक में दूर करें कन्फ्यूज, जानिए महत्व

Baisakhi 2026: बैसाखी का पर्व पंजाबी नववर्ष के तौर पर मनाया जाता है. बैसाखी नई फसल के आगमन का प्रतीक माना जाता है. इस दिन का बेहद खास महत्व है. गुरु गोबिंद सिंह जी ने बैसाखी के दिन ही खालसा पंथ की स्थापना की थी.

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Edited By : Aman Maheshwari Updated: Apr 7, 2026 07:41
Baisakhi 2026
Photo Credit- News24GFX

Baisakhi 2026: बैसाखी का पर्व सिख समुदाय का खास त्योहार है. इस दिन सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी. बैसाखी पर्व सिख समुदाय के नववर्ष के रूप में मनाया जाता है. हर साल बैसाखी 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है. बैसाखी का पर्व खासकर पंजाब और हरियाणा में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है. इस बार बैसाखी की तारीख को लेकर लोगों के बीच कन्फ्यूजन बना हुआ है. बैसाखी पर्व की सटीक तारीख के बारे में जानते हैं.

कब है बैसाखी? (Baisakhi Kab Hai)

पंचांग के अनुसार, बैसाखी का पर्व सूर्य देव मीन राशि से मेष राशि में प्रवेश करते हैं उस समय मनाया जाता है. यह पर्व हमेशा 13 या 14 अप्रैल में से किसी दिन मनाया जाता है. इस दिन को मेष संक्रांति के नाम से भी जानते हैं. इस दिन नए सौर वर्ष की शुरुआत होती है. द्रिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 14 अप्रैल 2026, दिन मंगलवार की सुबह 9 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में करेंगे. इसी दिन यानी 14 अप्रैल को बैसाखी का पर्व मनाया जाएगा.

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ये भी पढ़ें – Kalashtami 2026: 9 या 10 अप्रैल, कब है वैशाख कालाष्टमी व्रत? जानिए सटीक तारीख और उपाय

बैसाखी पर्व का महत्व (Baisakhi Ka Mahatva)

बैसाखी का संबंध सिख समुदाय के इतिहास से है. 13 अप्रैल 1699 को सिखों के 10वें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने इस दिन खालसा पंथ की नींव रखी थी. तभी से इस पर्व को सिख समुदाय के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं. इस दिन का खास महत्व है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, बैसाखी के दिन सूर्य देव बारह राशियों की यात्रा पूर्ण कर मेष राशि प्रवेश करते हैं. यह पर्व पंजाब-हरियाणा के किसानों के लिए बेहद खास है. यह पर्व फसल से संबंधित माना जाता है. नई फसल के उत्सव के तौर पर मनाया जाता है.

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कैसे मनाएं बैसाखी पर्व? (How to Celebrate Baisakhi)

बैसाखी के दिन गुरुद्वारों को सजाया जाता है. इस दिन भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. सिख समुदाय के लोग गुरुद्वारे में माथा टेकते हैं और अरदास लगाते हैं. इस दिन कीर्तन और लंगर का आयोजन किया जाता है. लोग नए रंग-बिरंगे कपड़े पहनत हैं और ढोल की थाप पर खूब थिरकते हैं. पुरुष भांगड़ा डांस करते हैं और महिलाएं पारंपरिक गिद्दा नृत्य करते हैं. गुरुद्वारों में विशाल लंगर का आयोजन किया जाता है. इस तरह से आप बैसाखी का पर्व मना सकते हैं.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 07, 2026 07:41 AM

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