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Badrinath Temple Opening: 23 अप्रैल से खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, नृसिंह मंदिर से देव डोलियां रवाना

Badrinath Temple Opening: 23 अप्रैल को सुबह 6:15 बजे खुलेंगे बदरीनाथ धाम के कपाट, इस बीच नृसिंह मंदिर से देव डोलियां रवाना हो चुकी हैं. आइए जानते हैं, बद्रीनाथ धाम की 3 चाबियों और घी लेपन का रहस्य क्या है?

Badrinath Temple Opening: गर्मियों की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड के प्रमुख धामों में हलचल तेज हो गई है. श्री बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को प्रातः 6:15 बजे खुलेंगे. इससे पहले जोशीमठ स्थित नृसिंह मंदिर से देव डोलियों का विधिवत प्रस्थान हो चुका है. वैदिक मंत्रों और विशेष पूजा-अनुष्ठान के बीच यात्रा का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक रंग में रंग गया है.

तीन चाबियों से खुलता है बदरीधाम

बदरीनाथ मंदिर की सबसे खास परंपरा इसकी तीन चाबियां हैं. कपाट एक चाबी से नहीं खुलते हैं. एक चाबी टिहरी राज परिवार के कुल पुरोहित के पास रहती है. बाकी दो चाबियां मेहता और भंडारी हक-हकूकधारियों के पास होती हैं. तीनों चाबियों को एक साथ लगाने के बाद ही मंदिर के द्वार खोले जाते हैं.

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क्यों होता है बदरीनाथ का घी लेपन?

कपाट बंद करते समय भगवान बदरीनाथ की मूर्ति पर घी का लेप किया जाता है, ताकि उन्हें ठंड न लगे. खुलने के दिन सबसे पहले इसी लेप को देखा जाता है. मान्यता है कि यदि मूर्ति पूरी तरह घी से ढकी मिले तो वर्ष सुखद रहता है. कम लेप को सामान्य या चुनौतीपूर्ण मौसम का संकेत माना जाता है.

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नृसिंह मंदिर से डोलियां हुई रवाना

मंगलवार को नृसिंह मठांगन में महालक्ष्मी पूजन हुआ. इसके बाद गरुड़ की डोली और आदि शंकराचार्य की गद्दी को दर्शनार्थ रखा गया. बदरीविशाल के जयघोष के बीच उत्सव मूर्ति और गद्दी को बदरीनाथ के लिए रवाना किया गया. भक्तों ने गाडू घड़े के भी दर्शन किए. ठीक 11 बजे ‘जय बदरीविशाल’ के नारों के बीच सभी डोलियां बदरीनाथ के लिए रवाना हो गईं.

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यात्रा के पड़ाव और प्रमुख रस्में

ये देव डोलियां बुधवार को पांडुकेश्वर में रात्रि विश्राम करेंगी. इसके बाद शंकराचार्य गद्दी, गाडू घड़ा, कुबेर और उद्धव के साथ धाम पहुंचेंगी. इन सभी प्रतीकों को यात्रा का आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है.

भक्ति का उत्साह

नृसिंह मठांगन से पेट्रोल पंप तक करीब एक किलोमीटर के रास्ते में स्थानीय लोगों और स्कूली बच्चों ने डोलियों पर पुष्प वर्षा की. बीकेटीसी के उपाध्यक्ष ऋषि प्रसाद सती ने बताया कि इस बार नृसिंह मंदिर को खास तौर पर फूलों से सजाया गया था. रावल अमरनाथ नंबूदरी ने विष्णुप्रयाग में पूजा कर यात्रा की मंगल कामना की.

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First published on: Apr 22, 2026 03:10 PM

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Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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