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Religion

बद्रीनाथ यात्रा से पहले ‘राक्षस’ को लगता है 40 किलो चावल और गुड़ का महाभोग, जानिए इस मान्यता का सच

Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री का यात्रा 19 अप्रैल को अक्षय तृतीया के दिन से हो चुकी है. अब केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट खोले जाएंगे. बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले वीर तिमुंडिया मेले में राक्षस को महाभोग लगाया जाता है. चलिए इस मान्यता के बारे में जानते हैं.

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Edited By : Aman Maheshwari Updated: Apr 20, 2026 09:14
Chardham Yatra
Photo Credit- Social Media

Chardham Yatra 2026: चारधाम यात्रा के लिए गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट 19 अप्रैल को खोल दिये गए हैं. अब 22 अप्रैल को केदारनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे. इसके बाद 23 अप्रैल को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद चारधाम यात्रा पुरी तरह आरंभ हो जाएगी. बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने से पहले जोशीमठ के प्रसिद्ध नृसिंह मंदिर में वीर तिमुंडिया मेला लगता है. इस बार इस मेले का आयोजन किया गया. इस मेले में हजारों की संख्या में लोग पहुंचे. इस मेले में पंरपरा के अनुसार, वीर तिमुंडिया के अवतारी पुरुषों को महाभोग लगाया जाता है.

40 किलो कच्चा चावल, 10 किलो गुड़, मांस का भोग

यह भोग तिमुंडिया (तीन सिर वाले) शक्तिशाली राक्षस को लगाया जाता है. इस भोग को वीर तिमुंडिया के अवतारी पुरुषों को लगाया गया. इन्हें 40 किलो कच्चा चावल, 10 किलो गुड़, मांस का भोग लगाया गया. इन्हेंने जनता के बीच इस भोग को ग्रहण किया. बद्रीनाथ धाम की यात्रा शुरू होने से पहले इस परंपरा को निभाया जाता है. इसको लेकर क्या मान्यता है चलिए इसके बारे में जानते हैं.

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क्यों लगता है राक्षस को महाभोग

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक तिमुंडिया नाम का तीन सिर वाला राक्षस बद्रीनाथ यात्रा के लिए जाने वाले यात्रियों को परेशान करता था. यात्रा को सुगम करने और राक्षस से रक्षा के लिए मां दुर्गा ने संकल्प लिया. तिमुंडिया राक्षस ने मां दु्र्गा की शरण ले ली और क्षमा मांगी. मां ने उसे जीवनदान दिया और राक्षस को यात्रा का रक्षक और द्वारपाल बनाया. तब से वीर तिमुंडिया को बद्रीनाथ धाम का रक्षक और द्वारपाल माना जाता है.

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हर साल यात्रा शुरू होने से पहले राक्षस को भोग लगाया जाता है. ऐसी मान्यता है कि, भोग नहीं लगाया जाए तो बद्रीनाथ की यात्रा सुरक्षित नहीं मानी जाती है. पंरपराओं के अनुसार, वीर तिमुंडिया को 40 किलो चावल, 10 किलो गुड़ और पशु की बलि देकर मांस का भोग लगाया जाता है. इसके बाद कई घड़े का पानी का भोग लगाते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 20, 2026 09:14 AM

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