---विज्ञापन---

Religion

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया क्यों है ‘अबूझ मुहूर्त’, कार्यारंभ से पहले क्यों नहीं देखते हैं शुभ समय, जानें

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर का अत्यंत शुभ दिन है और इसे 'अबूझ मुहूर्त' कहा जाता है? इस दिन किए गए विवाह, व्यापार, गृह प्रवेश या निवेश बिना मुहूर्त देखे भी सफल माने जाते हैं. आइए जानते हैं, अक्षय तृतीया क्यों है 'अबूझ मुहूर्त', कार्यारंभ से पहले क्यों नहीं देखते हैं शुभ समय?

Author
Written By: Shyamnandan Updated: Apr 7, 2026 17:43
Akshaya-Tritiya

Akshaya Tritiya: अक्षय तृतीया हिन्दू कैलेंडर का सबसे शुभ दिन माना जाता है. इसे अबूझ मुहूर्त कहा जाता है क्योंकि इस दिन किए गए काम हमेशा सफल और फलदायी माने जाते हैं. शादी, गृह प्रवेश, व्यापार या निवेश जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियां इस दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त देखे भी पूरी तरह से लाभकारी होती हैं. लोग इस दिन नई शुरुआत करने के लिए विशेष रूप से उत्साहित रहते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अक्षय तृतीया 19 अप्रैल, 2026 को मनाई जाएगी. आइए जानते हैं, अक्षय तृतीया क्यों है ‘अबूझ मुहूर्त’, कार्यारंभ से पहले क्यों नहीं देखते हैं शुभ समय?

सूर्य-चंद्र की उच्च स्थिति

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन सूर्य मेष राशि में और चंद्रमा वृषभ राशि में होते हैं. यह उच्च ग्रह स्थिति पूरे दिन को दोषमुक्त बनाती है. इस कारण इस दिन कोई भी शुभ कार्य शुरू करना आसान और सुरक्षित माना जाता है.

---विज्ञापन---

दोष रहित शुभ समय

अक्षय तृतीया को साल के 3 सबसे शुभ दिनों में गिना जाता है. इस दिन किसी भी समय किए गए कार्यों पर दोष नहीं लगता. इसलिए विवाह, सगाई या व्यापार की नई शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण काम बिना किसी पंचांग या मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं. लोग इस दिन नई योजनाओं को लेकर आत्मविश्वास से भरे रहते हैं.

अक्षय फल की मान्यता

अक्षय तृतीया पर किए गए दान, पूजा और धार्मिक कार्यों का फल अक्षय यानी कभी नष्ट न होने वाला माना जाता है. इस दिन सोना खरीदना, संपत्ति में निवेश करना या धार्मिक कार्य करना दीर्घकालीन लाभ देता है. पारिवारिक और व्यवसायिक योजनाओं में इस दिन की शुरुआत विशेष रूप से फायदेमंद होती है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Akshaya Tritiya Facts: अक्षय तृतीया क्यों है सनातन धर्म का सबसे शुभ दिन, जानें यूनिक और रोचक फैक्ट्स

ऐतिहासिक-पौराणिक महत्व

इस दिन का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व भी बहुत बड़ा है. यह दिन परशुराम जयंती, भगवान विष्णु के नर-नारायण अवतार और महाभारत युद्ध की समाप्ति से जुड़ा हुआ है. यही वजह है कि यह दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय और खास माना जाता है.

विवाह और नए कार्यों के लिए अवसर

अक्षय तृतीया पर विवाह, सगाई और व्यापार की नई शुरुआत के लिए सभी लोग बिना संकोच निर्णय लेते हैं. जिन लोगों के ग्रह नक्षत्र सामान्य दिनों में मेल नहीं खाते, वे भी इस दिन शुभ कार्य कर सकते हैं. यह दिन नए रिश्तों और नई शुरुआत के लिए विशेष रूप से अनुकूल रहता है.

खरीदारी और निवेश

सांस्कृतिक रूप से इस दिन सोना और अन्य मूल्यवान और कीमती वस्तुओं की खरीद लाभदायक मानी जाती है. नयी संपत्ति में निवेश या व्यापारिक योजना भी इस दिन विशेष रूप से सफल रहती है.

धार्मिक और सामाजिक गतिविधियां

अक्षय तृतीया पर दान, सेवा और भंडारा जैसी सामाजिक गतिविधियों का महत्व बहुत अधिक है. लोग गरीबों को भोजन, वस्त्र और अन्य सामग्री दान करते हैं.

यह भी पढ़ें: Satuani Parv: सतुआनी क्या है, कब है और क्यों मनाते हैं? जानें सटीक डेट, महत्व और रोचक रीति-रिवाज

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Apr 07, 2026 05:43 PM

End of Article
संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.