Shri Laxmi Narayan Stotram Lyrics: हर एकादशी पर पढ़ें श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम्, दिमाग रहेगा शांत और मिलेगी कुछ बड़ा करने की शक्ति

Sri Lakshmi Narayana Stotram Lyrics: श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् एक अत्यंत शक्तिशाली स्तोत्र है, जो कि भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी को समर्पित है. वैसे तो कभी भी श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् का पाठ कर सकते हैं, लेकिन एकादशी तिथि पर इसके पाठ से अधिक लाभ होता है. आइए अब जानें श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् के लिरिक्स और महत्व आदि के बारे में.

Shri Laxmi Narayan Stotram Lyrics

Credit- Social Media

Shri Laxmi Narayan Stotram Lyrics: एक साल में करीब 24 बार एकादशी का व्रत रखा जाता है, जिस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और धन की देवी मां लक्ष्मी की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही लक्ष्मी-विष्णु जी को समर्पित मंत्र, स्तोत्र, पाठ, आरती और कवच आदि का पाठ किया जाता है. खासकर, श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् के पाठ से महालाभ होता है और लक्ष्मी-नारायण जी प्रसन्न होते हैं.

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चलिए विस्तार से श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् (Shri Laxmi Narayan Stotram) के महत्व, लिरिक्स और लाभ आदि के बारे में जानें.

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श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् का महत्व

श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् भगवान विष्णु और उनकी अर्धांगिनी देवी लक्ष्मी को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व प्रभावशाली स्तोत्र है. इसमें देवी-देवताओं से जन्म-मृत्यु के चक्र व सांसारिक संकटों से रक्षा करने की प्रार्थना की जाती है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति सच्चे मन से श्री लक्ष्मी नारायण स्तोत्रम् का पाठ करता है, उसे सुख, समृद्धि, धन, ऐश्वर्या और अच्छी सेहत आदि का आशीर्वाद मिलता है.

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विष्णु लक्ष्मी स्तोत्रम् के लिरिक्स

श्रीनिवास जगन्नाथ श्रीहरे भक्तवत्सल।
लक्ष्मीपते नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्॥१॥
राधारमण गोविंद भक्तकामप्रपूरक।
नारायण नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्॥२॥
दामोदर महोदार सर्वापत्तीनिवारण।
ऋषिकेश नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्॥३॥
गरुडध्वज वैकुंठनिवासिन्केशवाच्युत।
जनार्दन नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्॥४॥
शंखचक्रगदापद्मधर श्रीवत्सलांच्छन।
मेघश्याम नमस्तुभ्यं त्राहि मां भवसागरात्॥५॥
त्वं माता त्वं पिता बंधु: सद्गुरूस्त्वं दयानिधी:।
त्वत्तोs न्यो न परो देवस्त्राही मां भवसागरात्॥६॥
न जाने दानधर्मादि योगं यागं तपो जपम।
त्वं केवलं कुरु दयां त्राहि मां भवसागरात्॥७॥
न मत्समो यद्यपि पापकर्ता न त्वत्समोsथापि हि पापहर्ता।
विज्ञापितं त्वेतद्शेषसाक्षीन मामुध्दरार्तं पतितं तवाग्रे॥८॥

।।इति श्री. प. प. श्रीवासुदेवानन्दसरस्वतीविरचितं श्रीलक्ष्मीनारायणस्तोत्रम् संपूर्णम्।।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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