थकान, चक्कर और धीमी दिल की धड़कन? कार्डियोलॉजिस्ट से समझिए ब्रैडीकार्डिया के शुरुआती लक्षण
Bradycardia Causes: पेसमेकर लगवाने के बाद भी लोग बिल्कुल आम लोगों की तरह जिंदगी जी रहे हैं. वे काम पर जा रहे हैं, घूम-फिर रहे हैं और हल्की कसरत भी कर सकते हैं. अगर जरूरत है तो बस अपनी बीमारी को समय पर पहचान करने की ताकि इसका इलाज आसानी से किया जा सके.

Low Heart Rate: अक्सर जब हम बहुत थका हुआ महसूस करते हैं तो हमें लगता है कि ऐसा काम, कम सोने या भागदौड़ की वजह से हो रहा है. कई बार लगातार रहने वाली यह थकान दिल की धड़कन धीमी होने की वजह भी बन जाता है. हालांकि, कसरत करने वाले या खिलाड़ियों की दिल की धड़कन का धीमा होना नॉर्मल बात है, लेकिन अगर आपके आराम करने के बाद भी थकान हो रही है तो आपका दिल शरीर के अंगों तक जरूरत के मुताबिक खून नहीं पहुंचा पा रहा है. इसको लेकर डॉक्टर सजन अहमद (जो तिरुवल्ला मेडिकल मिशन अस्पताल में सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और क्लिनिकल अफेयर्स एवं एकेडमी के निदेशक हैं) का कहना है कि अगर आपको थकान हो रही है तो ऐसे में डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी हो जाता है.
ब्रेडीकार्डिया किसे कहते हैं?
2 / 7हमारे दिल के अंदर एक छोटा सा प्राकृतिक हिस्सा होता है, जो दिल को धड़कने के लिए करंट भेजता है. एक सामान्य इंसान का दिल एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है और जब यह धड़कन 60 से कम हो जाती है तो इसे ब्रेडीकार्डिया कहते हैं. इस दौरान धड़कन धीमी होने लगती है और शरीर में खून का घूमना धीमा हो जाता है. इसे भी पढ़ें- क्या कम सुनाई देना दिमाग को उम्र से पहले बना रहा है बूढ़ा? डॉक्टर ने बताया पूरा सच
धड़कन धीमी होना
3 / 7खिलाड़ियों का दिल बहुत मजबूत होता है, इसलिए उनका दिल बिना किसी बीमारी के भी एक मिनट में 40 बार से कम धड़क सकता है. अगर आपकी धड़कन धीमी है और साथ में आपको बहुत ज्यादा थकान रहती है, थोड़ा सा चलने पर सांस फूलती है, चक्कर आते हैं या आप बेहोश हो जाते हैं तो इसे इग्नोर ना करें.
शरीर के इन इशारों को समझें
4 / 7जब दिल धीरे धड़कता है तो दिमाग और बाकी अंगों को पूरा खून नहीं मिलता. इससे ये परेशानियां हो सकती हैं जैसे- लगातार थकान रहना, चक्कर आना या सिर घूमना, सांस फूलना या बेहोश होना आदि.
दिल की धड़कन धीमी होने के कारण
5 / 7ऐसा बढ़ती उम्र, दिल की पुरानी बीमारी या दिल के करंट वाले रास्ते में खराबी आने से भी धड़कन धीमी हो सकती है. कुछ दवाएं और बीमारियां भी धड़कन को धीमा कर सकती हैं. इसलिए वक्त पर इसका सही कारण पहचानना जरूरी है.
इलाज कैसे होता है?
6 / 7डॉक्टर सबसे पहले ईसीजी होती है. कभी-कभी दिल पर नजर रखने के लिए होल्टर मॉनिटर को 1-2 दिन के लिए शरीर पर बांध दिया जाता है. अगर बीमारी मामूली है तो डॉक्टर सिर्फ दवाइयां बदलकर या लाइफस्टाइल में सुधार करके इसे ठीक कर देते हैं.
पेसमेकर क्या है?
7 / 7पेसमेकर एक बहुत छोटी सी मशीन होती है जो दिल को सही रफ्तार से धड़कने के लिए हल्के करंट के झटके भेजती है. जब मरीज का दिल खुद से सही रफ्तार में नहीं धड़क पाता, तब डॉक्टर इसे लगाते हैं. इसे भी पढ़ें-45 के बाद चेहरे पर कैसे लाएं नेचुरल ग्लो? डाइट में शामिल करें ये फूड्स, दिखेंगी जवां