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ब्रेडीकार्डिया किसे कहते हैं? Image Credit- News24
Low Heart Rate: अक्सर जब हम बहुत थका हुआ महसूस करते हैं तो हमें लगता है कि ऐसा काम, कम सोने या भागदौड़ की वजह से हो रहा है. कई बार लगातार रहने वाली यह थकान दिल की धड़कन धीमी होने की वजह भी बन जाता है. हालांकि, कसरत करने वाले या खिलाड़ियों की दिल की धड़कन का धीमा होना नॉर्मल बात है, लेकिन अगर आपके आराम करने के बाद भी थकान हो रही है तो आपका दिल शरीर के अंगों तक जरूरत के मुताबिक खून नहीं पहुंचा पा रहा है. इसको लेकर डॉक्टर सजन अहमद (जो तिरुवल्ला मेडिकल मिशन अस्पताल में सीनियर इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट और क्लिनिकल अफेयर्स एवं एकेडमी के निदेशक हैं) का कहना है कि अगर आपको थकान हो रही है तो ऐसे में डॉक्टर को दिखाना बहुत जरूरी हो जाता है.
ब्रेडीकार्डिया किसे कहते हैं?

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हमारे दिल के अंदर एक छोटा सा प्राकृतिक हिस्सा होता है, जो दिल को धड़कने के लिए करंट भेजता है. एक सामान्य इंसान का दिल एक मिनट में 60 से 100 बार धड़कता है और जब यह धड़कन 60 से कम हो जाती है तो इसे ब्रेडीकार्डिया कहते हैं. इस दौरान धड़कन धीमी होने लगती है और शरीर में खून का घूमना धीमा हो जाता है.
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धड़कन धीमी होना

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खिलाड़ियों का दिल बहुत मजबूत होता है, इसलिए उनका दिल बिना किसी बीमारी के भी एक मिनट में 40 बार से कम धड़क सकता है. अगर आपकी धड़कन धीमी है और साथ में आपको बहुत ज्यादा थकान रहती है, थोड़ा सा चलने पर सांस फूलती है, चक्कर आते हैं या आप बेहोश हो जाते हैं तो इसे इग्नोर ना करें.
शरीर के इन इशारों को समझें

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जब दिल धीरे धड़कता है तो दिमाग और बाकी अंगों को पूरा खून नहीं मिलता. इससे ये परेशानियां हो सकती हैं जैसे- लगातार थकान रहना, चक्कर आना या सिर घूमना, सांस फूलना या बेहोश होना आदि.
दिल की धड़कन धीमी होने के कारण

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ऐसा बढ़ती उम्र, दिल की पुरानी बीमारी या दिल के करंट वाले रास्ते में खराबी आने से भी धड़कन धीमी हो सकती है. कुछ दवाएं और बीमारियां भी धड़कन को धीमा कर सकती हैं. इसलिए वक्त पर इसका सही कारण पहचानना जरूरी है.
इलाज कैसे होता है?

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डॉक्टर सबसे पहले ईसीजी होती है. कभी-कभी दिल पर नजर रखने के लिए होल्टर मॉनिटर को 1-2 दिन के लिए शरीर पर बांध दिया जाता है. अगर बीमारी मामूली है तो डॉक्टर सिर्फ दवाइयां बदलकर या लाइफस्टाइल में सुधार करके इसे ठीक कर देते हैं.
पेसमेकर क्या है?

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पेसमेकर एक बहुत छोटी सी मशीन होती है जो दिल को सही रफ्तार से धड़कने के लिए हल्के करंट के झटके भेजती है. जब मरीज का दिल खुद से सही रफ्तार में नहीं धड़क पाता, तब डॉक्टर इसे लगाते हैं.
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