क्या कम सुनाई देना दिमाग को उम्र से पहले बना रहा है बूढ़ा? डॉक्टर ने बताया पूरा सच

Causes Of Dementia: जब किसी इंसान की सोचने की क्षमता कम होने लगती है तो दिमाग को आवाज और शब्दों को समझने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है.इसलिए दिमाग पर असर ज्यादा पड़ने लगता है. इसलिए इंसान को भूलने की बीमारी हो जाती है.

Causes Of Dementia
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सोचने-समझने की क्षमता पर असर. Image Credit- News24

Hearing Loss: हियरिंग लॉस यानी सुनने की क्षमता में कमी को अक्सर लोग उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. कई लोग तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते, जब तक समस्या काफी गंभीर न हो जाए. हालांकि, इसको लेकर हुए एक शोध में बताया गया है कि कम सुनाई देने का असर कानों के साथ-साथ दिमाग और याददाश्त पर भी पड़ता है.  लेकर डॉक्टर राजेश भारद्वाज (जो मेड फर्स्ट ईएनटी सेंटर में ईएनटी विशेषज्ञ एवं सलाहकार हैं) का कहना है कि जब किसी इंसान की सोचने की क्षमता कम होने लगती है तो दिमाग को आवाज और शब्दों को समझने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है.इसलिए दिमाग पर असर ज्यादा पड़ने लगता है.

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सोचने-समझने की क्षमता पर असर

सोचने-समझने की क्षमता पर असर2 / 6

ऐसे लोगों को बातचीत के दौरान बातों को समझने में दिमाग की काफी एनर्जी खर्च होती है, जिसकी वजह से दिमाग दूसरे काम जैसे याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता पर ध्यान नहीं दे पाता और दिमाग पर असर पड़ने लगाता है. इसे भी पढ़ें- खाली पेट मौसमी का जूस पीने से क्या होता है? जानिए किन लोगों को करना चाहिए परहेज

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हियरिंग लॉस की समस्या

हियरिंग लॉस की समस्या3 / 6

हियरिंग लॉस से पीड़ित लोग अक्सर लोगों से दूरी बनाने लगते हैं क्योंकि उन्हें बातचीत समझने में परेशानी होती है. धीरे-धीरे वे परिवार, दोस्तों और सामाजिक कार्यक्रमों में कम भाग लेने लगते हैं.

सामाजिक अलगाव महसूस करना

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इस बीमारी में लोगों को सामाजिक अलगाव महसूस होने लगता है, क्योंकि इंसान बातों को कम समझता है. साथ ही,यह मानसिक उत्तेजना को कम कर सकता है, जो याददाश्त को हेल्दी बनाने का काम करते हैं.

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डिमेंशिया से क्या है संबंध?

डिमेंशिया से क्या है संबंध?5 / 6

कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि हियरिंग लॉस वाले लोगों में डिमेंशिया जैसी बीमारी का खतरा कम हो सकता है. हालांकि, हियरिंग लॉस सीधे डिमेंशिया का कारण हो यह बिल्कुल भी जरूरत नहीं है.

वक्त पर कराएं इलाज

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अगर वक्त पर इस बीमारी का पता लगाकर इलाज कराया जाए तो काफी हद तक परेशानी हल की जा सकती है. अगर किसी इंसान को बातचीत सुनने में परेशानी हो रही है, टीवी की आवाज बार-बार बढ़ानी पड़ती है तो टेस्ट जरूर करवाएं. इसे भी पढ़ें- 45 के बाद चेहरे पर कैसे लाएं नेचुरल ग्लो? डाइट में शामिल करें ये फूड्स, दिखेंगी जवां अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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