कभी सोचा है कि पूरे नेशनल हाईवे पर लाइट क्यों नहीं लगती? NHAI का जवाब सुन रह जाएंगे हैरान

अगर आप रात में नेशनल हाईवे पर सफर करते हैं, तो आपने जरूर देखा होगा कि कुछ हिस्से पूरी तरह रोशन होते हैं, जबकि कई किलोमीटर तक सड़क अंधेरे में रहती है. ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल उठता है कि जब टोल टैक्स लिया जाता है, तो पूरे हाईवे पर स्ट्रीट लाइट क्यों नहीं लगाई जाती? इसी सवाल पर NHAI ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है.

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NHAI ने इस बड़े सवाल का जवाब दिया है और बताया है कि आखिर पूरे हाईवे पर लाइट लगाना क्यों जरूरी नहीं माना जाता. जानिए किन जगहों पर लाइट लगाना अनिवार्य है और कैसे बिना स्ट्रीट लाइट के भी हाईवे पर सफर सुरक्षित बनाया जाता है.

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NHAI ने दूर की बड़ी गलतफहमी

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देशभर में तेजी से नए एक्सप्रेसवे और नेशनल हाईवे बनाए जा रहे हैं. इसी बीच सोशल मीडिया पर लगातार यह चर्चा होती रहती है कि पूरे हाईवे पर रोशनी क्यों नहीं होती. NHAI का कहना है कि हर किलोमीटर हाईवे पर लाइट लगाना न तो अनिवार्य है और न ही व्यावहारिक. इसलिए केवल जरूरत वाले हिस्सों में ही लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है.

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हाईवे लाइटिंग को लेकर क्या कहते हैं नियम?

हाईवे लाइटिंग को लेकर क्या कहते हैं नियम?3 / 7

हाईवे पर लाइट लगाने का फैसला मनमाने तरीके से नहीं होता. इसके लिए भारतीय सड़क अवसंरचना मानकों को तय करने वाली संस्था इंडियन रोड्स कांग्रेस (IRC) की तकनीकी गाइडलाइंस का पालन किया जाता है. नियमों के अनुसार, सिर्फ उन स्थानों पर रोशनी दी जाती है जहां सुरक्षा के लिहाज से इसकी आवश्यकता होती है और दुर्घटनाओं का जोखिम अधिक रहता है. ये भी पढ़ें-  Redmi-Realme की बढ़ेगी टेंशन! OnePlus ला रहा है सबसे सस्ता फोन, इतनी होगी कीमत  

किन जगहों पर लगाना जरूरी होता है लाइट?

किन जगहों पर लगाना जरूरी होता है लाइट?4 / 7

NHAI के मुताबिक कुछ क्षेत्रों को हाई-रिस्क और हाई-एक्टिविटी जोन माना जाता है. इनमें टोल प्लाजा और उसके आसपास का क्षेत्र, इंटरचेंज, बड़े जंक्शन, चौराहे, फ्लाईओवर, अंडरपास, आबादी वाले इलाके, बस बे, ट्रक ले-बाय और दुर्घटना संभावित स्थान शामिल हैं. इन जगहों पर रोशनी उपलब्ध कराना जरूरी माना जाता है. ये भी पढ़ें-  सोने से पहले Wi-Fi Router बंद करना चाहिए या नहीं? जान लें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

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पूरे हाईवे पर लाइट न लगाने की बड़ी वजह

पूरे हाईवे पर लाइट न लगाने की बड़ी वजह5 / 7

हजारों किलोमीटर लंबे हाईवे नेटवर्क पर लगातार स्ट्रीट लाइट लगाना बेहद महंगा काम है. इससे बिजली की खपत और कार्बन उत्सर्जन दोनों बढ़ेंगे. इसके अलावा इतनी बड़ी संख्या में लाइटों का रखरखाव और मरम्मत भी काफी खर्चीला होता है. यही वजह है कि केवल जरूरी स्थानों पर ही लाइटिंग की व्यवस्था की जाती है.

बिना लाइट के भी कैसे सुरक्षित रहता है सफर?

बिना लाइट के भी कैसे सुरक्षित रहता है सफर?6 / 7

NHAI का कहना है कि आधुनिक हाईवे पर सुरक्षा के लिए कई अन्य तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. सड़क पर बनी रिफ्लेक्टिव मार्किंग्स, चमकदार साइन बोर्ड और अन्य सेफ्टी फीचर्स वाहन की हेडलाइट पड़ते ही स्पष्ट दिखाई देते हैं. इससे ड्राइवर को रास्ता समझने में आसानी होती है और रात का सफर सुरक्षित बना रहता है.

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रात में ड्राइविंग के लिए क्या है सबसे जरूरी?

रात में ड्राइविंग के लिए क्या है सबसे जरूरी?7 / 7

विशेषज्ञों के अनुसार, सुरक्षित नाइट ड्राइविंग के लिए हर जगह स्ट्रीट लाइट होना जरूरी नहीं है. अच्छी हेडलाइट, स्पष्ट रोड मार्किंग्स और रिफ्लेक्टर्स ड्राइवर को पर्याप्त दिशा और चेतावनी देते हैं. इसलिए हाईवे पर सीमित लाइटिंग के बावजूद आधुनिक सुरक्षा इंतजाम सफर को सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

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मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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