सड़क पर दौड़ती लगभग हर कार और बाइक में काले रंग के टायर दिखाई देते हैं. ज्यादातर लोगों को लगता है कि यह सिर्फ स्टाइल या डिजाइन के लिए होता है, लेकिन इसके पीछे मजबूत वैज्ञानिक वजह छिपी हुई है. टायर का काला रंग सीधे उसकी मजबूती और सुरक्षा से जुड़ा है.
पहले सफेद रंग के होते थे टायर

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जब शुरुआती दौर में टायर बनाए जाते थे, तब उनमें नेचुरल रबर का इस्तेमाल होता था. उस समय टायरों का रंग सफेद या हल्का भूरा दिखाई देता था. हालांकि, ये टायर ज्यादा मजबूत नहीं होते थे और जल्दी घिस जाते थे. पुराने जमाने के रबर टायर सड़क की तेज गर्मी और भारी वजन को लंबे समय तक सहन नहीं कर पाते थे. ज्यादा इस्तेमाल के बाद उनमें जल्दी दरारें आने लगती थीं और उनकी लाइफ भी कम होती थी.
कार्बन ब्लैक देता है टायर को काला रंग

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समय के साथ टायर बनाने की तकनीक में कई बदलाव किए गए. इसी दौरान रबर में एक खास मटेरियल मिलाना शुरू किया गया, जिसने टायरों की मजबूती और टिकाऊपन को काफी बढ़ा दिया. टायर बनाने के दौरान रबर में कार्बन ब्लैक नाम का खास पाउडर मिलाया जाता है. यही मटेरियल टायर को काला रंग देता है. लेकिन इसका काम सिर्फ रंग बदलना नहीं, बल्कि टायर को ज्यादा मजबूत बनाना भी है.
जल्दी घिसने से बचाता है कार्बन ब्लैक

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कार्बन ब्लैक टायर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने में मदद करता है. इससे टायर जल्दी घिसते नहीं हैं और सड़क पर उनकी परफॉर्मेंस बेहतर बनी रहती है. यही वजह है कि आज लगभग हर टायर में इसका इस्तेमाल किया जाता है.
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तेज गर्मी में भी रहता है सुरक्षित

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गर्म सड़क और तेज धूप का असर टायरों पर सबसे ज्यादा पड़ता है. कार्बन ब्लैक टायर को ज्यादा गर्म होने से बचाता है. अगर यह मटेरियल इस्तेमाल न किया जाए, तो रबर जल्दी कमजोर होकर फट सकता है.
तेज रफ्तार में भी कम होता है फटने का खतरा

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कार्बन ब्लैक की वजह से टायर ज्यादा गर्म नहीं होते, जिससे हाई स्पीड पर टायर फटने की संभावना कम हो जाती है. यही कारण है कि छोटी कारों से लेकर रेसिंग कारों तक में काले टायर ही इस्तेमाल किए जाते हैं.
रंगीन टायर क्यों नहीं हो पाए सफल?

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कुछ कंपनियों ने अलग-अलग रंगों के टायर बनाने की कोशिश की थी, लेकिन वे मजबूती और टिकाऊपन के मामले में सफल नहीं रहे. यही वजह है कि आज भी काले टायर सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित माने जाते हैं. (Image Credit- AI and Freepik)