History Behind Kites Tradition: नए साल का पहला पर्व मकर संक्रांति होता है, जिसे 14 जनवरी को मनाया जाता है. हालांकि, कई लोगों के बीच एक तरह का कंफ्यूजन है कि मकर संक्रांति 14 को या 15 जनवरी को मनाया जाएगा, हालांकि, हर साल 14 जनवरी को ही यह पर्व मनाया जाता है, तो ऐसी उम्मीद लगाई जा रही है कि 14 जनवरी को ही यह त्योहार मनाया जाएगा. यह दिन हिंदू धर्म में काफी खास माना जाता है, ऐसे में आपने गौर किया होगा कि इस दिन ज्यादातर लोग पतंग उड़ाते हैं, ऐसे में यह जानना जरूरी भी हो जाता है कि आखिर क्यों लोग इस दिन पतंग उड़ाते हैं?
पतंग उड़ाने की परंपरा का क्या है पूरा सच?
मकर संक्रांति को पंतगों और खिचड़ी का त्योहार भी कहा जाता है. खिचड़ी का दान करना जहां शुभ माना जाता है. वहीं, पतंग उड़ाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों ही मान्यताएं हैं, जिसके बारे में बेहद ही कम लोग जानते हैं. अगर आप भी इन्हीं लोगों में आते हैं, तो यह जानकारी आपको सच में हैरान कर देगी.
वैज्ञानिक फैक्ट
पतंग उड़ाने को लेकर विज्ञान का मनना है कि मकर संक्रांति के समय ठंड कम होने लगती है, यानी कि मौसम बदलने की शुरुआत होती है. इस दौरान धूप में बाहर रहना शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है. इसमें नैचुरली Vitamin D मिलता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाता है, साथ ही इम्यूनिटी बढ़ाता है और दांतों की कई समस्याओं से बचाने में मदद करता है. इसी के साथ दिमाग भी तेज रहता है और पूरा शरीर एक्टिव रहता है.
क्यों लोग उड़ाते हैं पतंग
मकर संक्रांति के मौके पर पंतग उड़ाने को लेकर इतिहारकार मानते हैं कि, मुगल (Mughals) काल में पतंग उड़ाना काफी लोकप्रिय शौक हुआ करता था, वक्त के साथ यह शौक भारतीय संस्कृति का हिस्सा बन गया. रिपोर्ट के अनुसार मौसम के बदलाव और बंसत के आगमन की खुशी को दर्शाने के लिए पतंग उड़ाई जाने लगी. वक्त के साथ परंपरा का रूप लेने वाला ये शौक लोगों के बीच इतना ज्यादा आम हो गया है कि देश के कई राज्यों में पतंगबाजी की प्रतियोगिता भी होती हैं, जिनमें हजारों लोग हिस्सा लेते हैं.










