बंगाली लाल और सफेद साड़ी क्यों पहनते हैं? 99% महिलाओं को नहीं पता होंगे इससे जुड़े ये रोचक तथ्य

Significance of Red and White Sarees: साड़ी ज्यादातर महिलाओं का पसंदीदा परिधान है, लेकिन बंगाल में लाल और सफेद साड़ियां खास तौर पर पहनी जाती हैं. इसकी वजह सिर्फ फैशन नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और सांस्कृतिक मान्यताएं हैं.

why bengali women wear red and white saree

बंगाली लाल और सफेद साड़ी क्यों पहनते हैं?

White and Red Saree Bengali: महिलाओं का सबसे पसंदीदा परिधान साड़ी है. हर तरह के फंक्शन में ज्यादातर महिलाएं साड़ी ही पहनना पसंद करती हैं, लेकिन जब बात बंगाल की आती है तो आंखों के सामने लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी ही आती है. ऐसा इसलिए क्योंकि वहां पर लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी ही पहनी हुई दिखाई देती हैं, खासतौर से बंगाली फेस्टिवल में. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर बंगाली महिलाएं लाल और सफेद साड़ी ही क्यों पहनती हैं? इसके पीछे कई धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक कारण छिपे हैं, जिन्हें बहुत कम लोग जानते हैं. अगर आप भी इस लिस्ट में शामिल हैं तो आपके लिए यह लेख मददगार साबित हो सकता है.

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बंगाली लाल और सफेद साड़ी क्यों पहनते हैं?

बंगाल में लाल और सफेद रंग को शुभ माना जाता है. लोगों का कहना है कि ये दोनों रंग शांति और पवित्रता का प्रतीक है और रंगों का असर इंसान की जिंदगी पर भी पड़ता है. इसलिए वहां पर ज्यादातर लोग लाल और सफेद रंग की साड़ी ही पहनना पसंद करते हैं.

दुर्गा पूजा से है संबंध

लाल और सफेद रंग की साड़ी का संबंध दुर्गा पूजा से है. मान्यता है कि मां दुर्गा को लाल-सफेद रंग बहुत ही पसंद हैं. इसलिए दुर्गा पूजा में महिलाएं लाल और सफेद रंग की साड़ी पहनती हैं. इस रंग की साड़ी पहनकर महिलाएं मां दुर्गा के स्वरूप को सम्मान देती हैं और अपने जीवन में शांति की कामना करती हैं.

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सिंदूर खेला रस्म का पसंदीदा परिधान

दुर्गा पूजा के आखिरी दिन सिंदूर खेला की जाती है. यह रस्म बंगाली सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास है. इस दिन वे लाल बॉर्डर वाली सफेद साड़ी पहनती हैं और सिंदूर की रस्म अदा करती हैं. माना जाता है कि ऐसे करने से वैवाहिक सुख, प्रेम और शांति का एहसास होता है.

सूती कपड़ा आसानी से उपलब्ध होना

पहले बंगाल में सूती कपड़ा बहुत आसानी से मिल जाता था. इसलिए लोगों ने इससे साड़ी बनाना बेहतर समझा. वहीं, साड़ी पर लाल बॉर्डर बनाना उस वक्त बहुत ही आसान था. आसानी से किफायती दामों पर साड़ी तैयार हो जाती थी.

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

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शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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