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इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनना है तो आज से ही करें ये 3 काम, लाइफ कोच आचार्य अनीता ने बताया कैसे भावनात्मक रूप से मजबूत हो सकेंगे आप

Emotional Intelligence: अगर आप भी चाहते हैं कि अपने नए साल की शुरुआत पॉजीटिव नोट पर करें और इस साल अपना बेस्ट वर्जन बनकर दिखाएं तो यहां जानिए लाइफ कोच का इस बारे में क्या कहना है. लाइफ कोच आचार्य अनीता बता रही हैं किस तरह इमोशनली स्ट्रॉन्ग बन सकते हैं आप.

Author Written By: Seema Thakur Updated: Jan 16, 2026 18:36
Emotionally Strong
इस तरह भावनात्मक सशक्तिकरण की तरफ बढ़ सकते हैं आप.
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Emotionally Strong: साल 2025 अधिकांश लोगों के लिए कठिनाइयों से भरा रहा. एक अदृश्य मानसिक बोझ लगातार महसूस होता रहा जिसने भावनात्मक संतुलन को भी डगमगा दिया. लेकिन, साल 2026 की दस्तक के साथ ही जीवन में नई ऊर्जा लौट आई है. आध्यात्मिक मेंटोर और लाइफ कोच आचार्य अनीता बताती हैं कि यह भारीपन धीरे-धीरे कम होने वाला है और नया वर्ष आशा, सकारात्मक साझेदारियों तथा कठिन लेकिन निर्णायक फैसलों से जन्म लेने वाले नवाचार का संकेत देता है. 2026 को उम्मीद और संभावनाओं का वर्ष कहा जा सकता है. इसका पूरा लाभ लेने के लिए जरूरी है कि हम सकारात्मक सोच अपनाएं और तीन आर (R)—रीसेट, रिचार्ज और रिअलाइन पर ध्यान केंद्रित करें. जानिए आचार्य अनीता ने तीन R के बारे में क्या बताया है.

इमोशनली स्ट्रॉन्ग बनाएंगे ये 3 काम

रीसेट : आंतरिक स्थिरता के लिए आदतें और आहार

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परिवर्तन जीवन का शाश्वत सत्य है और नया वर्ष हमारी दैनिक दिनचर्या को नए सिरे से व्यवस्थित करने का अवसर लेकर आता है. इस संक्रमणकालीन ऊर्जा के अनुरूप स्वयं को ढालने के लिए उन आदतों को छोड़ना आवश्यक है जो प्रगति के मार्ग में बाधा बनती हैं. स्वस्थ और संतुलित आहार न केवल मनोदशा को बेहतर बनाता है बल्कि मानसिक स्पष्टता बढ़ाता है, ऊर्जा स्तर को सुदृढ़ करता है और शरीर को वह पोषण देता है, जिससे जीवन की चुनौतियों का सामना सहज हो पाता है.

इसके साथ ही भावनात्मक कारणों से होने वाले अनियंत्रित भोजन पर भी सजगता से नियंत्रण रखना जरूरी है, क्योंकि यह लाभ से अधिक नुकसान पहुंचाता है.

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नींद भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. लगभग सात घंटे की गहरी नींद शरीर और मन दोनों को पुन: स्फूर्त करती है. अत्यधिक स्क्रीन टाइम कम करना भी आवश्यक है ताकि ध्यान केंद्रित रहे और जीवन के लक्ष्यों पर स्पष्ट फोकस बना रहे. इसके अलावा, उन गतिविधियों के लिए समय निकालें जो आपको खुशी देती हैं. ऐसी चीजें भावनाओं को संतुलित करती हैं और भीतर की शांति को पुन: स्थापित करने में मदद करती हैं.

रिचार्ज : मानसिक और शारीरिक ऊर्जा का नवसंचार

जब तनाव हमारी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा बनता जा रहा है, तब स्वयं के लिए ठहरने, गहरी सांस लेने, मन को शांत करने और भीतर के सुकून को महसूस करने का समय निकालना अत्यंत आवश्यक हो जाता है. बीता हुआ वर्ष कई लोगों के लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है, इसलिए अब संतुलन को दोबारा स्थापित करने की सचेत कोशिश जरूरी है.

ध्यान अभ्यास, जीवन की रफ्तार को कुछ धीमा करना और सही दिशा में जागरूक कदम बढ़ाना मन को नई ऊर्जा से भर देता है. जैसे ही मन तनाव से मुक्त होता है, वैसे ही उसकी एकाग्रता, स्पष्टता और सकारात्मक सोच फिर से सशक्त होने लगती है. योग, नियमित व्यायाम और दैनिक सैर न केवल शरीर को सक्रिय रखते हैं, बल्कि भावनात्मक तनाव को भी बाहर निकालने में मदद करते हैं. साथ ही, भावनात्मक सीमाएं तय करना और स्वयं की जरूरतों पर ध्यान देना आत्म-पुनर्स्थापन की इस प्रक्रिया में आपको आगे बढ़ने की शक्ति देता है.

रिअलाइन: भावनाएं और विचार

अपने भीतर के स्व से जुड़ाव जीवन का सबसे अहम आधार है, जिसे समय-समय पर दोबारा सुदृढ़ करना आवश्यक होता है. भावनात्मक उलझनें, भय, आत्म-संशय और नकारात्मक सोच इस संबंध में दरार डाल सकती हैं, जिससे मन पर अनावश्यक बोझ बढ़ जाता है. भावनाओं और विचारों को सही दिशा में पुन: समायोजित करने से ही जीवन में संतुलन और सामंजस्य लौटता है. इस प्रक्रिया की शुरुआत उस अंत:स्वर को सुनने और स्वीकार करने से होती है, जो हमें आत्म-उपचार और कल्याण की राह दिखाता है. जब व्यक्ति अपने आंतरिक अस्तित्व के प्रति सजग होता है, तभी वह करुणा और आत्म-विश्वास के सहारे अपने विकास को मजबूती दे पाता है. आत्मचिंतन और सकारात्मक दृढ़ संकल्पों के माध्यम से कोई आध्यात्मिक मार्गदर्शक इस पुनर्संतुलन और आत्म-पुनर्संयोजन की यात्रा को और अधिक सार्थक बना सकता है.

लाइफ कोच का कहना है कि 2026 की शुरुआत भावनात्मक रंग लिए हुए है, क्योंकि पिछले वर्ष का मानसिक बोझ अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है. फिर भी, यदि हम अपने भावनात्मक स्वास्थ्य को सशक्त बनाएं, तो असाधारण उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं. इस दिशा में पुरानी आदतों को नए सिरे से ढालना, भीतर की ऊर्जा को पुनर्जीवित करना और भावनाओं को संतुलित करना हमारे लिए मार्गदर्शक भूमिका निभाएगा.

यह भी पढ़ें – प्यार में रोना क्यों पड़ता है? ये 5 तरह के लोग रिलेशनशिप में बहुत रुलाते हैं | Relationship Tips

First published on: Jan 16, 2026 06:21 PM

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