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फोन लेते ही रोने लगता है बच्चा… हो जाएं सावधान! एक्सपर्ट ने बताया यह आखिर क्यों नहीं है नॉर्मल
Bachche Phone Kyu Chalate Hai: आजकल बच्चे बहुत ही ज्यादा मोबाइल चलाने लगे हैं, जिसकी वजह से उन्हें कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, इससे गंभीर बीमारी होने का भी खतरा रहता है.
माता पिता को क्या करना चाहिए? Image Credit- Freepik
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Mobile Addiction Treatment: मोबाइल के बिना हमारी जिंदगी अधूरी है. ज्यादातर लोगों को सुबह उठते ही फोन चेक करने की आदत होती है और मोबाइल देखकर सोने की आदत होती है. अब मोबाइल फोन बच्चों के हाथों में खिलौने की तरह पहुंच चुका है. कई माता-पिता यह देखकर परेशान हो जाते हैं कि जैसे ही वे बच्चे से फोन लेते हैं, वह जोर-जोर से रोने लगता है, गुस्सा करता है या जमीन पर लोटने लगता है. अक्सर इसे जिद या आदत समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार हमेशा नॉर्मल नहीं होता. समय रहते इस संकेत को समझना बेहद जरूरी है, वरना यह आगे चलकर बच्चे की मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चे को 2 साल तक स्क्रीन से दूर रखना चाहिए. वहीं, 2 से 5 साल तक के बच्चों को सीमित मात्रा में फोन दें, क्योंकि इसी उम्र में बच्चों को लत लगती है. अगर बच्चा फोन छीनते ही अत्यधिक रोता है, जमीन पर लोटने लगता है या गुस्से में चीजें फेंकता है तो यह डिजिटल निर्भरता का संकेत हो सकता है. अगर आपका बच्चा लंबे वक्त तक ऐसा कर रहा है तो बच्चे में ये समस्याएं दिख सकती हैं.
नींद में कमी
आंखों में दर्द या कमजोरी
ध्यान लगाने में दिक्कत होना
पढ़ाई में रुचि कम होना
सामाजिक व्यवहार में बदलाव
क्यों रोने लगता है बच्चा?
डोपामिन का असर
डिजिटल एडिशन की शुरुआत
इमोशनल नियंत्रण की कमी
सामाजिक जुड़ाव में कमी
माता पिता को क्या करना चाहिए?
https://www.instagram.com/reel/DMr8kSBJvqu/?hl=hi
बच्चों से अचानक फोन लेने की गलती ना करें और धीरे-धीरे वक्त को कम करें. रोज 10 मिनट कम करने की कोशिश करें.
बच्चे को बाहर खेलने की आदत डालें. उन्हें बाहर खेलने, रंग भरने, कहानी सुनने या पजल खेलने के लिए कहें. जब उसे नया और मजेदार ऑप्शन मिलेगा तो फोन की याद कम आएगी.
अपने बच्चे को वक्त दें और उनके सामने फोन बिल्कुल ना चलाएं. ऐसा करने से आपका बच्चा भी फोन नहीं चलाना सीखेगा.
अगर बच्चा बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या व्यवहार में बड़ा बदलाव दिख रहा है तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.
Mobile Addiction Treatment: मोबाइल के बिना हमारी जिंदगी अधूरी है. ज्यादातर लोगों को सुबह उठते ही फोन चेक करने की आदत होती है और मोबाइल देखकर सोने की आदत होती है. अब मोबाइल फोन बच्चों के हाथों में खिलौने की तरह पहुंच चुका है. कई माता-पिता यह देखकर परेशान हो जाते हैं कि जैसे ही वे बच्चे से फोन लेते हैं, वह जोर-जोर से रोने लगता है, गुस्सा करता है या जमीन पर लोटने लगता है. अक्सर इसे जिद या आदत समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवहार हमेशा नॉर्मल नहीं होता. समय रहते इस संकेत को समझना बेहद जरूरी है, वरना यह आगे चलकर बच्चे की मानसिक सेहत पर असर डाल सकता है.
एक्सपर्ट के मुताबिक, बच्चे को 2 साल तक स्क्रीन से दूर रखना चाहिए. वहीं, 2 से 5 साल तक के बच्चों को सीमित मात्रा में फोन दें, क्योंकि इसी उम्र में बच्चों को लत लगती है. अगर बच्चा फोन छीनते ही अत्यधिक रोता है, जमीन पर लोटने लगता है या गुस्से में चीजें फेंकता है तो यह डिजिटल निर्भरता का संकेत हो सकता है. अगर आपका बच्चा लंबे वक्त तक ऐसा कर रहा है तो बच्चे में ये समस्याएं दिख सकती हैं.
बच्चों से अचानक फोन लेने की गलती ना करें और धीरे-धीरे वक्त को कम करें. रोज 10 मिनट कम करने की कोशिश करें.
बच्चे को बाहर खेलने की आदत डालें. उन्हें बाहर खेलने, रंग भरने, कहानी सुनने या पजल खेलने के लिए कहें. जब उसे नया और मजेदार ऑप्शन मिलेगा तो फोन की याद कम आएगी.
अपने बच्चे को वक्त दें और उनके सामने फोन बिल्कुल ना चलाएं. ऐसा करने से आपका बच्चा भी फोन नहीं चलाना सीखेगा.
अगर बच्चा बहुत ज्यादा आक्रामक हो रहा है या व्यवहार में बड़ा बदलाव दिख रहा है तो चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर है.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.