पिछले कई महीनों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा इंसानों की नौकरियां छीनने की चिंताओं ने वैश्विक चर्चाओं पर अपना दबदबा बनाया हुआ है. हालांकि, हाल ही में सैम ऑल्टमैन जैसे कई टेक दिग्गजों ने तर्क दिया है कि एआई का असर उतना विनाशकारी नहीं होगा जितना शुरू में डर था. लेकिन जहां एक तरफ रोजगार पर एआई के असर को लेकर बहस जारी है, वहीं दूसरी तरफ बैकग्राउंड में एक और तकनीक बेहद खामोशी और आक्रामक रफ्तार से आगे बढ़ रही है - और वो है रोबोटिक्स.
चीन के सबसे बड़े ई-कॉमर्स उद्यमियों में से एक और दिग्गज कंपनी JD.com के संस्थापक रिचर्ड लियू ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में डिलीवरी कूरियर की नौकरियों को रोबोट्स पूरी तरह खत्म कर देंगे.
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'बेरोजगार हो जाएंगे 7 लाख'
बीजिंग में आयोजित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग सीईओ फोरम में बोलते हुए रिचर्ड लियू ने साफ किया कि कूरियर और पार्सल पहुंचाने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लियू ने कहा, 'भविष्य में जब रोबोट पार्सल की डिलीवरी कर रहे होंगे, तो देर-सबेर एक ऐसा दिन आएगा जब कूरियर कर्मचारियों की मूल रूप से कोई जरूरत नहीं रह जाएगी. यह निश्चित रूप से रोबोट ही होंगे जो पार्सल बांटेंगे. लेकिन मैं वास्तव में नहीं चाहता कि हमारे 7,00,000 भाई बिना भोजन और बिना नौकरी के रहें.'
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JD.com चीन के सबसे बड़े ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं में से एक है, जो बाजार में अलीबाबा और मीटुआन जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देता है. लियू ने हालांकि यह साफ नहीं किया कि रोबोट डिलीवरी कब तक मैनस्ट्रीम बनेगी, लेकिन उनकी कंपनी ने इस रोबोटिक भविष्य के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. JD.com ने करीब 120 स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है, ताकि मौजूदा डिलीवरी कर्मचारियों को नई भूमिकाओं के लिए रिट्रेन किया जा सके.
लियू का मानना है कि भविष्य में 'रोबोट मेंटेनेंस' यानी मशीनों की मरम्मत और रखरखाव की नौकरियां सबसे अहम हो जाएंगी. चूंकि रोबोट भी आखिर मशीनें ही हैं, उनमें कभी न कभी खराबी जरूर आएगी; ऐसे में ऑटोमेशन से प्रभावित होने वाले श्रमिकों को इन प्रणालियों को ठीक करने करने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
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हर जगह रोबोट लगाने का चीन का मास्टरप्लान
रिचर्ड लियू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी इकॉनमी में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के लिए अरबों डॉलर का आक्रामक निवेश कर रहा है. चीन की हालिया पांच-वर्षीय योजना में रोबोटिक्स को देश की शीर्ष प्राथमिकताओं वाली तकनीकों में शामिल किया गया है. वहां के नीति निर्माता रोबोट को भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य इंजन मान रहे हैं.
पूरे चीन में इस समय कई बड़े पायलट प्रोजेक्ट्स का लाइव ट्रायल चल रहा है. इनमें एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को खाना परोसने वाले रोबोट से लेकर शहरों के कम्यूटर रेल नेटवर्क पर ट्रेनों में सफर कर कन्वेनिएंस स्टोर्स में सामान को दोबारा रीस्टॉक करने वाले रोबोट शामिल हैं.
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इस तकनीकी विकास ने चीन के विशाल 'गिग वर्कफोर्स' के बीच रोजगार का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. इस वर्कफोर्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा कूरियर बॉय, कैब ड्राइवर और फैक्ट्रियों के अस्थायी कर्मचारियों के रूप में काम करता है.
अमेरिका में आ चुका है ऑटोमेशन का दौर
नौकरियां बदलने का यह ट्रेंड केवल चीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन भी इसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है. जून 2026 में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अमेजन ने साल 2012 से लेकर अब तक अपने ग्लोबल ऑपरेशंस नेटवर्क में 10 लाख से अधिक रोबोट्स तैनात कर दिए हैं. ये रोबोट गोदामों में इन्वेंट्री सोर्टिंग और पैकेजिंग जैसे भारी कामों को संभाल रहे हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अक्टूबर 2025 में खुलासा किया था कि अमेजन आने वाले समय में अपने ऑपरेशंस से 5 लाख से अधिक नौकरियों को रोबोट्स से रिप्लेस करने का मन बना चुका है. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मौजूदा योजना फिलहाल अमेरिका के लिए है और भारत जैसे विकासशील देशों में यह रोबोटिक रिप्लेसमेंट कब तक शुरू होगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है.
पिछले कई महीनों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा इंसानों की नौकरियां छीनने की चिंताओं ने वैश्विक चर्चाओं पर अपना दबदबा बनाया हुआ है. हालांकि, हाल ही में सैम ऑल्टमैन जैसे कई टेक दिग्गजों ने तर्क दिया है कि एआई का असर उतना विनाशकारी नहीं होगा जितना शुरू में डर था. लेकिन जहां एक तरफ रोजगार पर एआई के असर को लेकर बहस जारी है, वहीं दूसरी तरफ बैकग्राउंड में एक और तकनीक बेहद खामोशी और आक्रामक रफ्तार से आगे बढ़ रही है – और वो है रोबोटिक्स.
चीन के सबसे बड़े ई-कॉमर्स उद्यमियों में से एक और दिग्गज कंपनी JD.com के संस्थापक रिचर्ड लियू ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में डिलीवरी कूरियर की नौकरियों को रोबोट्स पूरी तरह खत्म कर देंगे.
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‘बेरोजगार हो जाएंगे 7 लाख’
बीजिंग में आयोजित एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग सीईओ फोरम में बोलते हुए रिचर्ड लियू ने साफ किया कि कूरियर और पार्सल पहुंचाने के लिए ऑटोमेटेड सिस्टम का इस्तेमाल कोई दूर का सपना नहीं, बल्कि एक कड़वी हकीकत है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, लियू ने कहा, ‘भविष्य में जब रोबोट पार्सल की डिलीवरी कर रहे होंगे, तो देर-सबेर एक ऐसा दिन आएगा जब कूरियर कर्मचारियों की मूल रूप से कोई जरूरत नहीं रह जाएगी. यह निश्चित रूप से रोबोट ही होंगे जो पार्सल बांटेंगे. लेकिन मैं वास्तव में नहीं चाहता कि हमारे 7,00,000 भाई बिना भोजन और बिना नौकरी के रहें.’
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JD.com चीन के सबसे बड़े ऑनलाइन खुदरा विक्रेताओं में से एक है, जो बाजार में अलीबाबा और मीटुआन जैसी दिग्गज कंपनियों को टक्कर देता है. लियू ने हालांकि यह साफ नहीं किया कि रोबोट डिलीवरी कब तक मैनस्ट्रीम बनेगी, लेकिन उनकी कंपनी ने इस रोबोटिक भविष्य के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी है. JD.com ने करीब 120 स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ हाथ मिलाया है, ताकि मौजूदा डिलीवरी कर्मचारियों को नई भूमिकाओं के लिए रिट्रेन किया जा सके.
लियू का मानना है कि भविष्य में ‘रोबोट मेंटेनेंस’ यानी मशीनों की मरम्मत और रखरखाव की नौकरियां सबसे अहम हो जाएंगी. चूंकि रोबोट भी आखिर मशीनें ही हैं, उनमें कभी न कभी खराबी जरूर आएगी; ऐसे में ऑटोमेशन से प्रभावित होने वाले श्रमिकों को इन प्रणालियों को ठीक करने करने की ट्रेनिंग दी जा रही है.
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हर जगह रोबोट लगाने का चीन का मास्टरप्लान
रिचर्ड लियू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब चीन अपनी इकॉनमी में रोबोटिक्स और ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के लिए अरबों डॉलर का आक्रामक निवेश कर रहा है. चीन की हालिया पांच-वर्षीय योजना में रोबोटिक्स को देश की शीर्ष प्राथमिकताओं वाली तकनीकों में शामिल किया गया है. वहां के नीति निर्माता रोबोट को भविष्य के आर्थिक विकास का मुख्य इंजन मान रहे हैं.
पूरे चीन में इस समय कई बड़े पायलट प्रोजेक्ट्स का लाइव ट्रायल चल रहा है. इनमें एयरपोर्ट्स पर यात्रियों को खाना परोसने वाले रोबोट से लेकर शहरों के कम्यूटर रेल नेटवर्क पर ट्रेनों में सफर कर कन्वेनिएंस स्टोर्स में सामान को दोबारा रीस्टॉक करने वाले रोबोट शामिल हैं.
यह भी पढ़ें : भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली अर्थव्यवस्था, फिर कम क्यों नहीं हो रहीं रोजमर्रा की चुनौतियां?
इस तकनीकी विकास ने चीन के विशाल ‘गिग वर्कफोर्स’ के बीच रोजगार का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. इस वर्कफोर्स का एक बहुत बड़ा हिस्सा कूरियर बॉय, कैब ड्राइवर और फैक्ट्रियों के अस्थायी कर्मचारियों के रूप में काम करता है.
अमेरिका में आ चुका है ऑटोमेशन का दौर
नौकरियां बदलने का यह ट्रेंड केवल चीन तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन भी इसी राह पर तेजी से आगे बढ़ रही है. जून 2026 में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अमेजन ने साल 2012 से लेकर अब तक अपने ग्लोबल ऑपरेशंस नेटवर्क में 10 लाख से अधिक रोबोट्स तैनात कर दिए हैं. ये रोबोट गोदामों में इन्वेंट्री सोर्टिंग और पैकेजिंग जैसे भारी कामों को संभाल रहे हैं.
न्यूयॉर्क टाइम्स ने अक्टूबर 2025 में खुलासा किया था कि अमेजन आने वाले समय में अपने ऑपरेशंस से 5 लाख से अधिक नौकरियों को रोबोट्स से रिप्लेस करने का मन बना चुका है. हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि यह मौजूदा योजना फिलहाल अमेरिका के लिए है और भारत जैसे विकासशील देशों में यह रोबोटिक रिप्लेसमेंट कब तक शुरू होगा, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है.