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क्या वकील के बिना केस लड़ा जा सकता है? क्या कहता है भारतीय संविधान, जानें कोर्ट के नियम

अगर कहा जाए कि आप बिना वकील के खुद अपना केस लड़ सकते हैं, तो शायद आप यकीन नहीं करेंगे लेकिन यह सच है। किसी भी कोर्ट में आप खुद अपना केस लड़ सकते हैं। विस्तार से जानिए पूरे नियम।

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Written By: Raghav Tiwari Updated: Feb 4, 2026 13:35

जब भी आप कानूनी कार्यवाही में फंसे होंगे तो आपको किसी एडवोकेट की मदद लेनी ही पड़ी होगी। एडवोकेट की मदद लेते लेते कभी न कभी आपके दिमाग ये ख्याल आया होगा कि क्या मैं खुद अपना केस लड़ सकते हूं। कभी सोचते होंगे कि अगर मैं खुद अपना केस लड़ता को वकील साहब से बेहतर दलीलें दे पाता। 4 फरवरी को पश्चिम में वोटर लिस्ट रिवीजन के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। मामला तब रोचक हो गया जब टीएमसी ने पोस्ट कर बताया कि केस में ममता बनर्जी खुद दलील पेश करेंगी यानी सीएम ममता बनर्जी एक वकील के रूप में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल होंगी। इसके बाद से यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या कोई बिना कानून की डिग्री को कोर्ट में वकालत कर सकता है।

भारतीय संविधान में इसकी व्यवस्था की गई है। अधिवक्ता अधिनियम, 1961 की धारा 32 के तहत किसी भी कोर्ट के जज को यह अधिकार है कि वह किसी व्यक्ति को स्वयं का पक्ष रखने की अनुमति दे सकता है। यह पूरी तरह कोर्ट के विवेक पर निर्भर करता है। भारत में बिना कानून की डिग्री (LLB) के कोई भी व्यक्ति अदालत में केस खुद लड़ सकता है। दलीलें दे सकता है। इस प्रक्रिया को पार्टी-इन-पर्सन कहा जाता है।

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इन शर्तों का रखना होता है पालन

कोर्ट में बिना वकील के केस लड़ने में कुछ प्रमुख शर्तें होती हैं। सबसे पहली खुद का केस हो। आप केवल अपने ही मामले में दलील दे सकते हैं किसी और की ओर से नहीं। दूसरा परमिशन, कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होने या बहस करने के लिए पहले कोर्ट से अनुमति लेनी पड़ती है। बता दें कि अधिवक्ता अधिनियम 1961 आमतौर पर वकीलों को प्रैक्टिस करने का अधिकार देता है, लेकिन धारा 32 के अंतर्गत यह अपवाद है।

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प्रक्रिया और ज्ञान, वकालत का सीधा नियम है कि यदि कोई व्यक्ति अपने कानूनी तथ्यों और नियमों को जानता है, तो कोर्ट उसे अपना केस लड़ने की अनुमति दे सकता है। हालांकि जटिल कानूनी मामलों में यह छूट खत्म हो सकती है। माना जाता है कि गैर-वकील को कानूनी प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी नहीं होती। खुद केस लड़ने का विकल्प किसी वकील का खर्च वहन करने में असमर्थ होने पर या जब कोई वकील मामला लेने को तैयार न हो तब अपनाया जा सकता है।

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First published on: Feb 04, 2026 01:27 PM

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