Yog Guru Baba Ramdev On Vande Mataram: बाबा रामदेव मीडिया के सामने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी जिस में वंदे मातरम् भी अहम रहा. योग गुरु का मानना है कि राष्ट्रीय गीत को लेकर राजनीति नहीं होनी चाहिए. पहले इसके अर्थ और भाव को समझना जरूरी है. उनके लिए देश ही मंदिर, पूजा और सबकुछ है. ये कोई उपासना पद्धति नहीं है.
‘देश ही मेरा मंदिर’
बाबा रामदेव ने वंदे मातरम् का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, ‘कुछ लोग संस्कृत पढ़े नहीं है, और कहते हैं कि इसमें देवी दुर्गा या मठ की पूजा कर रहा है. हम भारत माता को ही कह रहे हैं, वही दुर्गा है , वही लक्ष्मी है, वही हमारे लिए धर्म है, वही विद्या है, वही हमारा मंदिर है, वही हमारी 10 प्रहारों को धारण करने वाली है, वही हमारे लिए अप्रतिम है, वही हमारी इष्ट है, अभिष्ट है.’
विरोध करने वालों पर निशाना
उन्होंने आगे कहा, ‘…तो जो लोग इस वंदे मातरम् में देवी, देवता, मठ, मंदिर, इसको देख रहे हैं, मुझे लगता है वो संस्कृत से और संस्कृति से अनभिग्य है उनको थोड़ी संस्कृत पढ़ लेनी चाहिए और थोड़ा उनको बोध होना चाहिए हमने भारत माता को सारी उपमाएं दी हैं. मेरा मठ, मेरा मंदिर, मेरी पूजा, मेरा कर्तव्य है, मेरा गंतव्य है, मेरा धर्म, मेरा सर्वस्व मेरी भारत माता है, ये वंदे मातरम का अर्थ है. अब उसको लोग न समझ रहे हैं. भारत मेरी विद्या, तुम ही विद्या, तुम ही धर्म, तुम ही हिदी, तुम ही मर्म, तुम ही मंदिर, तो सब कुछ जब हमारी वाणी, विद्या दायिनी मां तुम ही हो, तो हमने वहां कोई सरस्वती की उपासना नहीं किया है.’
वंदे मातरम् से जुड़ा ताजा विवाद क्या है?
बीजेपी और कांग्रेस के बीच ताजा ‘वंदे मातरम्’ विवाद कांग्रेस के इस फैसले पर है कि उसके पार्टी कार्यक्रमों में गीत के सिर्फ पहले 2 छंद गाए जाएंगे. कांग्रेस ने 1937 के अपने प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि यही परंपरा रही है. बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत के सम्मान को कम करने वाला कदम बताते हुए विरोध किया और 22 अगस्त 2026 को प्रस्ताव पारित कर पूरे वंदे मातरम् की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. बीजेपी ने कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप भी लगाए हैं.