कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उग्र आंदोलन के चलते धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा. राष्ट्रपति मुर्मू ने भी इस्तीफा मंजूर कर लिया है. देररात ही प्रधानमंत्री मोदी की सिफारिश पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया गया. प्रह्लाद जोशी भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रधानमंत्री मोदी के करीबी माने जाते हैं, फिर भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी को ही शिक्षा मंत्री क्यों बनाया गया, उन्हें ही पद के लिए क्यों चुना गया?
प्रधानमंत्री मोदी के संकटमोचकों में से एक
प्रह्लाद जोशी की गिनती प्रधानमंत्री मोदी के संकटमोचकों में होती है. धर्मेंद्र प्रधान को लेकर विवाद चलते प्रधानमंत्री मोदी किसी अनुभवी शख्स को संवेदनशील हो चुके शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपना चाहते थे. क्योंकि प्रह्लाद 30 साल से राजनीति में हैं और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल चुके हैं तो उन्हें केंद्रीय कामकाज का अनुभव भी है, इसलिए शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपने के लिए प्रह्लाद जोशी चुने गए.
संसदीय कार्य करने-संभालने का अनुभव
प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार सौंपने का फैसला रणनीतिक कदम माना जा रहा है. क्योंकि प्रह्लाद जोशी साल 2019 से 2024 तक केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री रह चुके हैं. इसलिए उनके पास संसदीय कार्यों का काफी अनुभव है. किसी मुद्दे पर सभी दलों को सहमत करना, संसद के कामकाज को सुचारू रूप से चलाना, गर्मागर्म बहस को संभालने का अनुभव उनके पास है. क्योंकि मानसून सत्र चल रहा है और विपक्ष पेपर लीक विवाद पर सरकार को घेरने को तैयार है, ऐसे में विपक्ष को जवाब देने के लिए अनुभवी नेता की जरूरत थी, जिसके पहले प्रह्लाद बेहतर हैं.
छात्रों-परीक्षार्थियों का विश्वास जीत सकेंगे
नीट पेपर लीक के कारण शिक्षा मंत्रालय और धर्मेंद्र प्रधान की आलोचनाएं हुईं. संकट का दौर झेल रहे मंत्रालय के नए मुखिया के तौर पर प्रह्लाद जोशी देशभर के लाखों छात्रों और परीक्षार्थियों के लिए नई उम्मीद और नया चेहरा होंगे. ऐसे में छात्रों और परीक्षार्थियों में उनके प्रति विश्वास कायम हो सकेगा. छात्रों के प्रति चिंता और संवेदनशीलता वे जाहिर सकेंगे, क्योंकि छात्र धर्मेंद्र प्रधान से बात करना और उनकी बात सुनना तो दूर, उन्हें देखना तक नहीं चाहते थे. देश में एजुकेशन सिस्टम को मजबूत करने तथा युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए प्रह्लाद जोशी जैसे मजबूत व्यक्तित्व की जरूरत थी.
दबाव में शांत रहने का प्रह्लाद का हुनर
प्रह्लाद जोशी भाजपा के अनुभवी और हाईकमान के भरोसेमंद नेताओं में से एक हैं. नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) को लागू करने, हायर एजुकेशन में एक्रेडिटेशन रिफॉर्म्स और स्किल इंटीग्रेशन प्रोग्राम के लिए केंद्रीय और राज्य संस्थाओं के बीच तालमेल बिठाना अनिवार्य है.प्रह्लाद जोशी दबाव के मौकों पर शांत रहना चाहते हैं. संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के तीखे हमलों के सहने और तर्कपूर्ण जवाब देकर उन्हें शांत करना जानते हैं. ऐसे में संकट में पड़े शिक्षा मंत्रालय को प्रह्लाद जोशी को सौंपने से अच्छा विकल्प कोई हो ही नहीं सकता था.
संबंधित खबरें
Divyangjan FASTag New Validity Rules 2026: अब हर साल FASTag रिन्यू कराने का झंझट खत्म, केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत
1 hr agoAaj Ki Taaza Khabar LIVE Updates: रूस में सेना का हेलीकॉप्टर क्रैश, हादसे में 3 लोगों की मौत
2 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, नहीं मिली अभी तक मंजूरी; 5000 जवान तैनात
2 hrs agoमुंबई में हिरासत और फिर रिहाई; अभिजीत दीपके ने शेयर किया अपडेट, प्रदर्शन से पहले दिखाया विक्ट्री साइन
10 hrs agoSIR विवाद के बीच ज्ञानेश कुमार की बढ़ीं मुश्किलें, फिर खुली 20 साल पुरानी विजिलेंस फाइल
10 hrs ago'लोकतंत्र को कर रहे हैं बर्बाद', ज्ञानेश कुमार को लेकर राहुल गांधी का बड़ा बयान, 15000 वोटर्स के नाम हटाने का आरोप
13 hrs agoअब कैसी है कैप्टन स्मित मच्छार की तबीयत? UAE की इंडियन एंबेसी ने दिया हेल्थ अपडेट
13 hrs agoस्मिथ मच्छार की बहादुरी ने दिलाई इंडियन नैनी की याद, 9/11 हमले में बचाई थी 2 साल के इजरायली बच्चे की जान
16 hrs agoCEC ज्ञानेश कुमार और SIR विवाद के बीच मुख्य चुनाव अधिकारी ने मांगी VRS, बोले-निजी फैसला
18 hrs agoपेंडिंग हैं चालान तो न बनेगा PUC और न रिन्यू होगा ड्राइविंग लाइसेंस, सुप्रीम कोर्ट का सख्त आदेश; ब्लैकलिस्ट होंगी गाड़ियां
20 hrs agoन्यूज 24 पर पढ़ें देश, राष्ट्रीय समाचार (National News), खेल, मनोरंजन, धर्म, लाइफ़स्टाइल, हेल्थ, शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।
First published on:
Know More: Editorial Guidelines