राज्यसभा में विधायी कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और पार्टी अनुशासन को बनाए रखने के लिए कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान से राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपते हुए 'व्हिप' नियुक्त किया है. पार्टी हाईकमान और शीर्ष नेतृत्व के भरोसे पर खरे उतरते हुए डांगी अब सदन के भीतर पार्टी के निर्देशों को लागू कराने की अहम भूमिका निभाएंगे. नीरज डांगी राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) में महासचिव और ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) के सदस्य रह चुके हैं. जून 2020 में कांग्रेस ने उन्हें राजस्थान से राज्यसभा भेजा था और उनके निष्ठावान कार्य को देखते हुए 2026 में उन्हें दोबारा राज्यसभा सदस्य चुना गया.

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कौन हैं नीरज डांगी?

नीरज डांगी राजस्थान कांग्रेस का एक जाना-माना चेहरा हैं और वर्तमान में राज्य से राज्यसभा सांसद हैं. पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात की जाए तो नीरज डांगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान सरकार में पूर्व मंत्री रहे स्वर्गीय दिनेश डांगी के पुत्र हैं. राजनीति में आने से पहले नीरज डांगी ने एनआईटी कर्नाटक से सिविल इंजीनियरिंग में बैचलर इंजीनियरिंग
की डिग्री हासिल की है. नीरज डांगी पिछले दो दशकों से अधिक समय से संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
क्या होता है 'व्हिप' और क्या है इसका काम?

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संसदीय लोकतंत्र में 'व्हिप' का पद बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है. राजनीतिक दल अपने सांसदों या विधायकों में अनुशासन बनाए रखने और सदन में पार्टी की रणनीति को लागू कराने के लिए व्हिप नियुक्त करते हैं. व्हिप का मुख्य काम सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करना है. जब भी सदन में कोई महत्वपूर्ण विधेयक पास होना होता है या वोटिंग की नौबत आती है तो व्हिप जारी कर पार्टी के सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का निर्देश दिया जाता है.

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व्हिप का सबसे प्रमुख काम यह देखना होता है कि पार्टी के सभी सदस्य दल की अधिकृत नीति के अनुसार ही मतदान करें. इसके अलावा सदन के भीतर पार्टी के सदस्यों के आचरण को नियंत्रित करना और उन्हें फ्लोर मैनेजमेंट की जानकारी देना भी इनकी जिम्मेदारी होती है.
यदि कोई सांसद पार्टी द्वारा जारी 'थ्री-लाइन व्हिप' का उल्लंघन करता है, तो दल-बदल विरोधी कानून के तहत उसकी सदस्यता तक समाप्त की जा सकती है. नीरज डांगी की इस नियुक्ति को संगठन में उनके बढ़ते कद और पार्टी नेतृत्व के उन पर गहरे विश्वास के रूप में देखा जा रहा है.

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