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नई दिल्ली डिक्लेरेशन क्या है? 88 देशों ने किया समर्थन, भारत की ऐतिहासिक सफलता

भारत की अध्यक्षता में आयोजित समिट में 88 देशों ने 'नई दिल्ली डिक्लेरेशन' पर हस्ताक्षर किए. एआई के लोकतंत्रीकरण और सुरक्षित भविष्य के लिए यह समझौता वैश्विक मंच पर भारत की बड़ी जीत है.

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Written By: Raja Alam Updated: Feb 22, 2026 09:36

भारत की अध्यक्षता में आयोजित पांच दिवसीय ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता के साथ संपन्न हुई है. इस सम्मेलन में अमेरिका, चीन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन समेत दुनिया के 88 देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने ‘नई दिल्ली डिक्लेरेशन ऑन एआई इम्पैक्ट’ पर हस्ताक्षर किए हैं. यह घोषणापत्र न केवल भविष्य के लिए एक मजबूत रूपरेखा तैयार करता है, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक ताकत को भी दर्शाता है. पिछले साल पेरिस में हुए सम्मेलन के दौरान कई बड़े देशों ने इस पर सहमति नहीं जताई थी, लेकिन भारत सबको एक मंच पर लाने में सफल रहा है.

समझौते का मुख्य उद्देश्य

इस समझौते का सबसे मुख्य उद्देश्य आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का “लोकतंत्रीकरण” करना है. भारत चाहता है कि यह आधुनिक तकनीक केवल कुछ चुनिंदा बड़ी कंपनियों या प्रभावशाली व्यक्तियों तक ही सीमित न रहे, बल्कि इसका लाभ समाज के हर वर्ग को मिले. घोषणापत्र के माध्यम से हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कई स्वैच्छिक ढांचे और साझा मंच बनाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है. इसमें ‘डेमोक्रेटिक डिफ्यूजन चार्टर’ जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो एआई के बुनियादी संसाधनों तक सबकी पहुंच को बढ़ावा देंगे और स्थानीय स्तर पर नए प्रयोगों को पूरा समर्थन देंगे.

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सुरक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए साझा प्रयास

घोषणापत्र के तहत ‘ग्लोबल एआई इम्पैक्ट कॉमन्स’ और ‘ट्रस्टेड एआई कॉमन्स’ जैसे महत्वपूर्ण मंच तैयार किए जाएंगे. ये मंच एआई प्रणालियों की सुरक्षा, विश्वसनीयता और सफलता को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी संसाधनों और सर्वोत्तम प्रथाओं का एक साझा संग्रह होंगे. इसके अलावा, ‘इंटरनेशनल नेटवर्क ऑफ एआई फॉर साइंस इंस्टीट्यूशन्स’ के जरिए दुनिया भर के संस्थानों को जोड़ा जाएगा, ताकि वैज्ञानिक शोध में एआई के उपयोग को बढ़ावा मिल सके. एआई के कारण नौकरियों के बदलते स्वरूप को देखते हुए लोगों के कौशल विकास यानी ‘रीस्किलिंग’ के लिए भी मार्गदर्शक सिद्धांतों पर सहमति बनी है.

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चुनौतियां और यूरोपीय संघ की सहमति

हालांकि 88 देशों ने इस घोषणापत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, लेकिन सबसे बड़ी चुनौती इन वादों को धरातल पर लागू करने की होगी क्योंकि ये सभी प्रतिबद्धताएं स्वैच्छिक हैं. सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में यूरोपीय संघ ने घोषणापत्र के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई थी क्योंकि वे संयुक्त राष्ट्र के चार्टर से मेल खाते थे. लेकिन भारत को एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और वैश्विक सहयोगी मानते हुए यूरोपीय संघ अंततः इस पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हो गया. इस तरह भारत ने एआई के भविष्य को सुरक्षित और समावेशी बनाने की दिशा में पूरी दुनिया का नेतृत्व कर एक बड़ी जीत हासिल की है.

First published on: Feb 22, 2026 09:36 AM

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