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CEC को हटाने की विपक्ष की कोशिश नाकाम, ठोस आधार न मिलने पर प्रस्ताव खारिज

लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर विस्तृत विचार के बाद कहा कि प्रस्तुत आरोप और साक्ष्य इतने ठोस नहीं हैं कि महाभियोग जैसी गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जाए. उन्होंने अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

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Written By: Kumar Gaurav Updated: Apr 6, 2026 21:16

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की विपक्ष की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने दोनों सदनों में लाए गए प्रस्तावों को खारिज कर दिया. पीठासीन अधिकारियों ने साफ किया कि प्रस्तावों को स्वीकार करने के लिए पर्याप्त और ठोस आधार मौजूद नहीं हैं.

विपक्ष की पहल और कानूनी आधार

12 मार्च को लोकसभा में 130 और राज्यसभा में 63 सांसदों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव दिया था. विपक्ष ने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 324(5) और अनुच्छेद 124(4) का हवाला देते हुए न्यायाधीश जांच अधिनियम, 1968 के तहत जांच प्रक्रिया शुरू करने की मांग की थी.

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पीठासीन अधिकारियों का फैसला

लोकसभा अध्यक्ष ने प्रस्ताव पर विस्तृत विचार के बाद कहा कि प्रस्तुत आरोप और साक्ष्य इतने ठोस नहीं हैं कि महाभियोग जैसी गंभीर संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जाए. उन्होंने अपने वैधानिक अधिकारों का उपयोग करते हुए प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

इसी तरह राज्यसभा के सभापति ने भी 63 सदस्यों द्वारा दिए गए प्रस्ताव की गहन समीक्षा की. सभी कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर विचार करने के बाद उन्होंने भी इसे नामंजूर कर दिया.

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सियासी असर

दोनों सदनों में प्रस्ताव खारिज होने के साथ ही इस मुद्दे पर चल रही राजनीतिक खींचतान को फिलहाल विराम मिल गया है. सत्ता पक्ष इसे संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा की जीत बता रहा है, जबकि विपक्ष इसे जवाबदेही से बचने का प्रयास करार दे रहा है. हालांकि, राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि यह मुद्दा आने वाले समय में फिर से कानूनी और संवैधानिक बहस का केंद्र बन सकता है.

First published on: Apr 06, 2026 08:40 PM

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