देश में चुनाव से पहले SIR की क्यों पड़ी जरूरत? प्रेस कॉन्फ्रेंस में ECI ने गिनाए ये मुख्य कारण
चुनाव आयोग ने आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. जिसका मकसद वोटर्स लिस्ट में फर्जीवाड़े को रोकने और फेक वोटर्स का नाम हटाना है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा चरण 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाने वाला है.'
Written By: News24 हिंदी|Updated: Oct 27, 2025 17:44
Edited By : Versha Singh|Updated: Oct 27, 2025 17:44
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Need Of Special Intensive Revision: चुनाव आयोग ने आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. जिसका मकसद वोटर्स लिस्ट में फर्जीवाड़े को रोकने और फेक वोटर्स का नाम हटाना है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा चरण 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाने वाला है.'
आपको बता दें कि इससे पहले बिहार चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट रिवीजन (Special Intensive Revision) किया गया था. इस पर काफी विवाद भी हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. इसमें करीब 65 लाख नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए गए थे. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आधार को भी पहचान पत्र के तौर पर शामिल किया गया था और नए नाम जोड़े गए थे.
आखिर क्यों पड़ी SIR की जरूरत?
देश में शहरीकरण और आबादी बढ़ने की वजह से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश से लेकर देश के सभी बड़े राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है. वोटर लिस्ट में घुसपैठ का मुद्दा भी उठता रहा है और एसआईआर इस मुद्दे से भी निपट सकती है.
वहीं, चुनाव आयोग ने X पर एक पोस्ट में भी SIR की जरूरत को समझाया है.
कानून के मुताबिक, इलेक्टोरल रोल में भी बदलाव करना होता है:
हर चुनाव से पहले; या जरूरत के हिसाब से
पॉलिटिकल पार्टियां रोल की क्वालिटी से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं.
1951 से 2004 तक 8 बार SIR हो चुका है.
पिछला SIR 21 साल से भी पहले 2002-2004 में हुआ था.
इलेक्टोरल रोल में कई बदलाव इन वजहों से हुए हैं:
बार-बार माइग्रेशन
जिसकी वजह से वोटर एक से ज़्यादा जगहों पर रजिस्टर हो जाते हैं
मृत हुए वोटरों को न हटाना
किसी विदेशी का गलत तरीके से शामिल होना
Special Intensive Revision (SIR) क्या है?
SIR चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में सुधार की एक प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है.
इसमें 18 साल से अधिक उम्र के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है.
जिन लोगों की मौत इस दौरान हो चुकी है, या जो पलायन कर चुके होते हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं.
वोटर लिस्ट में नाम, पते और अन्य त्रुटियों को भी संशोधित करके ठीक किया जाता है.
चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, 'एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा चरण 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाने वाला है.'
बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्यों पर फोकस
चुनाव आयोग के अनुसार, ऑल इंडिया SIR की कवायद चरणबद्ध तरीके से देश भर में की जाएगी. प्रथम चरण में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों समेत 10 प्रांतों को शामिल किया जाएगा. इनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हो सकते हैं. फिर आगे अन्य राज्यों में वोटर लिस्ट रिवाइज की जाएगी. जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां पर वोटर लिस्ट की समीक्षा आयोग की प्राथमिकता होगी. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे राज्य जहां पर स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं वहां अभी एसआईआर नहीं किया जाएगा.
Need Of Special Intensive Revision: चुनाव आयोग ने आज हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में देश के 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. जिसका मकसद वोटर्स लिस्ट में फर्जीवाड़े को रोकने और फेक वोटर्स का नाम हटाना है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस वक्त प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा चरण 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाने वाला है.’
आपको बता दें कि इससे पहले बिहार चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट रिवीजन (Special Intensive Revision) किया गया था. इस पर काफी विवाद भी हुआ था और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था. इसमें करीब 65 लाख नाम वोटर लिस्ट से डिलीट किए गए थे. बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आधार को भी पहचान पत्र के तौर पर शामिल किया गया था और नए नाम जोड़े गए थे.
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आखिर क्यों पड़ी SIR की जरूरत?
देश में शहरीकरण और आबादी बढ़ने की वजह से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ है. दिल्ली, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश से लेकर देश के सभी बड़े राज्यों में जनसंख्या तेजी से बढ़ी है. वोटर लिस्ट में घुसपैठ का मुद्दा भी उठता रहा है और एसआईआर इस मुद्दे से भी निपट सकती है.
वहीं, चुनाव आयोग ने X पर एक पोस्ट में भी SIR की जरूरत को समझाया है.
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कानून के मुताबिक, इलेक्टोरल रोल में भी बदलाव करना होता है:
हर चुनाव से पहले; या जरूरत के हिसाब से
पॉलिटिकल पार्टियां रोल की क्वालिटी से जुड़े मुद्दे उठाती रही हैं.
1951 से 2004 तक 8 बार SIR हो चुका है.
पिछला SIR 21 साल से भी पहले 2002-2004 में हुआ था.
इलेक्टोरल रोल में कई बदलाव इन वजहों से हुए हैं:
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बार-बार माइग्रेशन
जिसकी वजह से वोटर एक से ज़्यादा जगहों पर रजिस्टर हो जाते हैं
मृत हुए वोटरों को न हटाना
किसी विदेशी का गलत तरीके से शामिल होना
Special Intensive Revision (SIR) क्या है?
SIR चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची में सुधार की एक प्रक्रिया है, जिसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है.
इसमें 18 साल से अधिक उम्र के नए मतदाताओं को जोड़ा जाता है.
जिन लोगों की मौत इस दौरान हो चुकी है, या जो पलायन कर चुके होते हैं, उनके नाम हटाए जाते हैं.
वोटर लिस्ट में नाम, पते और अन्य त्रुटियों को भी संशोधित करके ठीक किया जाता है.
चुनाव आयोग ने देश के 12 राज्यों में SIR का ऐलान किया है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, ‘एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) का दूसरा चरण 12 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाने वाला है.’
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बंगाल, तमिलनाडु जैसे राज्यों पर फोकस
चुनाव आयोग के अनुसार, ऑल इंडिया SIR की कवायद चरणबद्ध तरीके से देश भर में की जाएगी. प्रथम चरण में विधानसभा चुनाव वाले राज्यों समेत 10 प्रांतों को शामिल किया जाएगा. इनमें पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी शामिल हो सकते हैं. फिर आगे अन्य राज्यों में वोटर लिस्ट रिवाइज की जाएगी. जिन राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं, वहां पर वोटर लिस्ट की समीक्षा आयोग की प्राथमिकता होगी. अधिकारियों का कहना है कि ऐसे राज्य जहां पर स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं वहां अभी एसआईआर नहीं किया जाएगा.